CJI सूर्य कांत ने आर्थिक अपराधों के खिलाफ ठोस कार्रवाई पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि अवैध संपत्ति का एक प्रतिशत से भी कम हिस्सा बरामद हो पाता है और वैश्विक सहयोग जरूरी है।
CJI Surya Kant Warns Against Limiting Global Fight on Economic Crimes to Speeches |
नई दिल्ली (भारत)। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्य कांत ने आर्थिक अपराधों के खिलाफ वैश्विक लड़ाई को लेकर गंभीर चिंता जताई है। कैम्ब्रिज में आर्थिक अपराध पर 43वें अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी के समापन सत्र को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि मनी लॉन्ड्रिंग और अन्य आर्थिक अपराधों से जुड़ी अवैध संपत्ति का एक प्रतिशत से भी कम हिस्सा ही बरामद हो पाता है। CJI ने साफ कहा कि आर्थिक अपराध के खिलाफ लड़ाई सिर्फ भाषणों और रिपोर्टों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि अपराध से अर्जित संपत्ति को ट्रैक करने, फ्रीज करने और वापस लाने की दिशा में ठोस कार्रवाई होनी चाहिए।
आर्थिक अपराध पुरानी बुराई, बदलते रहे हैं इसके रूप
शनिवार को कैम्ब्रिज में आर्थिक अपराध पर 43वें अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी के समापन सत्र को संबोधित करते हुए, CJI सूर्य कांत ने कहा कि आर्थिक अपराध कोई आधुनिक घटना नहीं है, बल्कि एक पुरानी बुराई है जिसने बस नए रूप ले लिए हैं - प्राचीन बीमा धोखाधड़ी से लेकर आधुनिक मनी लॉन्ड्रिंग और 'डिजिटल अरेस्ट' स्कैम तक।
अवैध संपत्ति की वास्तविक वसूली पर जोर, सिर्फ बातों तक सीमित न रहे कार्रवाई
CJI ने कहा, "आर्थिक अपराध कोई आधुनिक आविष्कार नहीं है, बल्कि एक पुरानी बुराई है जिसने बस नए रूप धारण कर लिए हैं।" उन्होंने प्राचीन ग्रीक धोखेबाज से लेकर आज की मनी लॉन्ड्रिंग और 'डिजिटल अरेस्ट' स्कैम तक इसके इतिहास का जिक्र किया। सभा को संबोधित करते हुए, CJI ने बताया कि कैसे आर्थिक अपराधों का स्वरूप बदला है और इस बात पर जोर दिया कि "अवैध संपत्ति के खिलाफ लड़ाई को केवल बातों तक सीमित न रखकर, अपराध से अर्जित संपत्ति की वास्तविक वसूली की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।"
प्राचीन ग्रीक धोखाधड़ी से आधुनिक मनी लॉन्ड्रिंग तक का दिया उदाहरण
चौथी शताब्दी ईसा पूर्व के ग्रीक अनाज व्यापारी हेगेस्ट्रेटोस के मामले का जिक्र करते हुए - जिसने कथित तौर पर बीमा का दावा करने के लिए अपना माल बेचने के बाद जहाज को डुबोने की योजना बनाई थी - भाषण में कहा गया कि आर्थिक अपराध "कोई आधुनिक आविष्कार नहीं" है, बल्कि एक पुरानी बुराई है जिसने बस नए रूप ले लिए हैं।
वैश्विक मनी लॉन्ड्रिंग पर चिंता, एक प्रतिशत से भी कम अवैध संपत्ति हो पाती है बरामद
भाषण में वैश्विक स्तर पर मनी लॉन्ड्रिंग के बड़े पैमाने की ओर इशारा किया गया और बताया गया कि अवैध संपत्ति का एक प्रतिशत से भी कम हिस्सा ही बरामद हो पाता है। इस पृष्ठभूमि में, CJI ने कहा कि ध्यान "संस्थागत रोकथाम" और ऐसी प्रणालियों पर होना चाहिए जो संपत्ति की वसूली करने और पीड़ितों को न्याय दिलाने में सक्षम हों।
भारत के कानूनी ढांचे को CJI ने बताया संस्थागत व्यवस्था का उदाहरण
CJI ने भारत के कानूनी ढांचे को ऐसे संस्थागत ढांचे के उदाहरण के तौर पर पेश किया। उन्होंने कहा कि (PMLA Act) प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट, 2002, फ्यूजिटिव इकोनॉमिक ऑफेंडर्स एक्ट, 2018, विशेष एजेंसियां और विशेष अदालतें मिलकर एक बहु-स्तरीय तंत्र बनाती हैं, जिसका उद्देश्य अपराध से अर्जित संपत्ति का पता लगाना, उसे जब्त करना और अंततः उसे अपने कब्जे में लेना है।
कौटिल्य के अर्थशास्त्र का जिक्र, राजस्व हेराफेरी रोकने के 40 तरीकों की चर्चा
CJI ने प्राचीन भारतीय ज्ञान से भी इसका संबंध जोड़ा। CJI ने कहा कि दूसरी सदी BC में लिखे गए कौटिल्य के अर्थशास्त्र में सरकारी अधिकारियों द्वारा राज्य के राजस्व की हेराफेरी करने के 40 तरीकों की पहचान की गई थी और इसके लिए ऑडिट, मुखबिर, क्रॉस-वेरिफिकेशन, जब्ती और व्यक्तिगत जवाबदेही जैसे उपाय बताए गए थे।
अपराध की संपत्ति वापस लाने के लिए 40 बेहतर तरीकों की जरूरत: CJI
CJI ने अपने संबोधन में कहा, "अर्थशास्त्र में बताए गए चोरी के उन 40 तरीकों के साथ-साथ अब उन्हें पकड़ने, फ्रीज़ करने और वापस लाने के 40 बेहतर तरीके भी जोड़े जाने चाहिए।" उन्होंने बरामद की गई आपराधिक संपत्ति के ग्लोबल लेजर को अंततः संतुलन की ओर ले जाने का आह्वान किया।
आर्थिक अपराधों पर कड़े कानून 'कानून के शासन' के दायरे में लागू हों
साथ ही, CJI ने इस बात पर जोर दिया कि आर्थिक अपराध से जुड़े कड़े कानून 'कानून के शासन' (rule of law) के दायरे में ही लागू होने चाहिए। उन्होंने उभरते हुए "डिजिटल अरेस्ट" स्कैम पर कोर्ट की प्रतिक्रिया का भी जिक्र किया, जिसमें धोखेबाज अधिकारी बनकर अनजान लोगों से पैसे ऐंठते हैं।
सीमा-पार अवैध संपत्ति पर अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बताया जरूरी
संबोधन में कहा गया कि अवैध संपत्ति का स्वरूप तेजी से सीमा-पार (cross-border) होता जा रहा है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग बहुत जरूरी है। उन्होंने कहा कि आपसी कानूनी सहायता संधियों, वित्तीय खुफिया जानकारी साझा करने, लाभकारी स्वामित्व रजिस्टरों और अन्य साधनों को अलग-अलग काम करने के बजाय मिलकर काम करना चाहिए।
आर्थिक अपराध के खिलाफ लड़ाई में ठोस कार्रवाई से ही तय होगी सफलता: CJI
अपने समापन संदेश में, CJI ने केवल बातें करने के बजाय ठोस कार्रवाई करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आर्थिक अपराध के खिलाफ वैश्विक लड़ाई की सफलता इस बात से नहीं मापी जाएगी कि समस्या का वर्णन कितनी अच्छी तरह किया गया है, बल्कि इस बात से मापी जाएगी कि अलग-अलग अधिकार-क्षेत्र अवैध संपत्तियों का पता लगाने, उन्हें फ्रीज करने और वापस लाने के लिए कितनी लगन से काम करते हैं। (Source: ANI)
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