अमेरिका-ईरान तनाव के कारण वैश्विक बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में भारी उछाल आया है। ब्रेंट क्रूड 125 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है।
नई दिल्ली। अमेरिका-ईरान तनाव के कारण वैश्विक बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में भारी उछाल आया है। ब्रेंट क्रूड 125 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है। होर्मुज जलडमरूमध्य में आपूर्ति बाधित होने और अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण तेल की कीमतों में यह 2022 के बाद सबसे बड़ी तेजी है। क्रूड में आयी इस तेजी का भारत की अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ सकता है, और पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ाने का पेट्रोल कंपनियों पर दबाव बढ़ सकता है।
बाजार भाव और ताजा आंकड़े
बाजार सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार 30 अप्रैल को ब्रेंट क्रूड 6.2% की बढ़त के साथ 125.36 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। इसी के साथ वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड 112 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया जबकि MCX पर क्रूड 9,096.00 रुपए के स्तर पर ट्रेड करता दिख रहा है। इस तेजी का असर भारत जैसे बड़े तेल आयातक देशों पर पड़ सकता है।
भारतीय अर्थव्यवस्था पर संकट के बादल
कच्चे तेल में आयी इस तेजी ने भारत समेत कई देशों की अर्थव्यवस्थाओं के लिए चिंता का सबब बन गयी है। भारत अपनी जरूरत का 80% से अधिक तेल आयात करता है, इसलिए तेल की ऊंची कीमतें घरेलू महंगाई को बढ़ावा दे सकती हैं। संयुक्त राष्ट्र और भारत का वित्त मंत्रालय इसे लेकर पहले ही चिंता जाहिर कर चुका है।
वैश्विक महंगाई का बढ़ता खतरा
कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल से दुनिया भर में एक बार फिर महंगाई का बड़ा खतरा मंडराने लगा है। कच्चे तेल की कीमतों में जबरदस्त तेजी देखने को मिल रही है और ब्रेंट क्रूड करीब 125 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है, जो पिछले लगभग चार साल का उच्चतम स्तर माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर स्थिति जल्द नहीं सुधरी, तो इसका सीधा असर महंगाई पर पड़ेगा और दुनियाभर की अर्थव्यवस्थाएं दबाव में आ सकती हैं।
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