दिल्ली हाई कोर्ट ने TMC सांसद महुआ मोइत्रा की उस याचिका को मंजूर कर लिया जिसमें उन्होंने कथित प्रश्न के लिए राशि मामले में लोकपाल की ओर से CBI को चार्जशीट दाखिल करने के लिए स्वीकृति दी थी।
कोलकाता। दिल्ली हाई कोर्ट ने टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा की उस याचिका को मंजूर कर लिया जिसमें उन्होंने कथित प्रश्न के लिए राशि (कैस फार क्वेरी) मामले में लोकपाल की ओर से सीबीआई को चार्जशीट दाखिल करने के लिए स्वीकृति दी थी। टीएमसी सांसद मोइत्रा ने सीबीआई को दी गई लोकपाल की स्वीकृति को चुनौती दी थी।
लोकपाल के निर्णय लेने में हुई त्रुटि
दिल्ली हाई कोर्ट के न्यायाधीश अनिल क्षेतरपाल और न्यायाधीश रहीश बैद्यनाथन शंकर की खंडपीठ ने मोइत्रा की याचिका को मंजूर करते हुए लोकपाल के आदेश को रद्द कर दिया। खंडपीठ ने कहा कि लोकपाल के इस मुद्दे पर निर्णय लेने में त्रुटि हुई है। उसने लोकपाल को एक महीने के भीतर इस मामले पर पुनर्विचार करने को कहा है।
सांसद महुआ मोइत्रा ने 12 नंवंबर को लोकपाल के आदेश को दी थी चुनौती
टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने 12 नंवंबर को लोकपाल के आदेश को चुनौती दी थी। मोइत्रा का तर्क था कि लोकपाल ने उनके लिखित पक्ष पर विधिवत विचार किए बिना ही सीबीआई को स्वीकृति दे दी, जबकि उनसे टिप्पणियां आमंत्रित की गई थीं और मौखिक दलीलें रखने की अनुमति भी दी गई थी।
सासंद मोइत्रा के वकील ने सुनवाई के दौरान ने सीबीआई की कार्यवाही पर अंतरिम रोक लगाने की मांग की थी लेकिन कोर्ट ने इस समय कोई अंतरिमं राहत देने से इंकार कर दिया। वकील का कहना है कि लोकपाल ने उनकी टिप्पणियों को समय के पहले और लोकपाल व लोकायुक्त अधिनियम की धारा 20 का उल्लंघन कहा था। सीबीआई की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने दलील दी थी कि मोइत्रा को मौखिक सुनवाई का कोई वैधानिक अधिकार नहीं है, लिखित टिप्पणियां देने का अधिकार था। लोकपाल ने उन्हें मौखिक सुनवाई और अतिरिक्त समय देकर पर्याप्त अवसर दिया।
हाई कोर्ट ने कहा कि उसे लोकपाल के आदेश की जांच के लिए समय चाहिए। मोइत्रा की शिकायत उनके पक्ष पर विचार ने किए जाने से जुड़ी है। आदेश का मूल्यांकन पूरे संदऱ्भ में किया जाना चाहिए, चुनिंदा अंशों के आधार पर नहीं।
मोइत्रा का मामला अक्टूबर 2023 में अधिवक्ता जय अनंत देहाद्रई की ओर से दायर शिकायत से जुड़ा है। शिकायत के बाद लोकपाल ने मामले को सीबीआई को सौंपा। सीबीआई ने फऱवरी 2024 में प्रारंभिक और 30 जून 2024 को विस्तृत रिपोर्ट दाखिल की। उसके बाद जुलाई में मोइत्रा से टिप्पणियां मांगी गई और मौखक सुनवाई का अवसर दिया गया। मोइत्रा की दलीलें सुनने के बाद लोकपाल ने 12 नवंबर को सीबीआई को स्वीकृति दी।
मोइत्रा ने हाई कोर्ट से सीबीआई को दी गई लोकपाल की स्वीकृति को रद्द करने का आग्रह किया था। उन्होंने लोकपाल के निर्णय को मनमाना, गैरकानूनी तथा न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन कहा है।
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