चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि SIR वाले राज्यों में अब फॉर्म 6 के साथ घोषणा पत्र की जरूरत नहीं होगी। वहीं, दूसरी ओर विपक्षी INDIA गठबंधन ने इस प्रक्रिया पर तीखा हमला बोला है।
नई दिल्ली। देश के उन सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए बड़ी राहत भरी खबर है, जहां विशेष गहन मतदाता सूची संशोधन (SIR) की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है या जहां यह शुरू होनी बाकी है। चुनाव आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बुधवार को स्पष्ट किया कि अब इन क्षेत्रों में 'घोषणा पत्र' (Declaration Form) जमा करने की कोई आवश्यकता नहीं होगी।
आयोग के स्पष्टीकरण के मुताबिक, फॉर्म 6 के नियमों में किसी भी तरह का कोई बदलाव नहीं किया गया है—चाहे वह SIR की अवधि हो या गैर-SIR अवधि। अधिकारी ने बताया, “घोषणा पत्र एक अतिरिक्त दस्तावेज था, जिसे 24 जून 2025 और उसके बाद जारी SIR आदेशों के तहत चुनिंदा राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मांगा गया था। यह सब आयोग के सर्वसम्मत फैसले के आधार पर तय किया गया था।” चुनाव आयोग द्वारा 26 सितंबर 2026 को जारी प्रेस नोट में भी इस बात की आधिकारिक पुष्टि की जा चुकी है।
एससी में एसआईआर पर मुहर
गौरतलब है कि नए आवेदकों को इस घोषणा पत्र के जरिए अपने, अपने माता-पिता या दादा-दादी के नाम पिछली गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया के दौरान तैयार मतदाता सूचियों से जोड़ने वाले विवरण देने होते थे। चुनाव आयोग ने अपने 26 सितंबर के प्रेस नोट में विशेष रूप से यह भी रेखांकित किया था कि फॉर्म 6 के साथ संलग्न इस घोषणा को देश की सर्वोच्च अदालत (Supreme Court) ने भी बरकरार रखा है। वर्तमान में बिहार और पश्चिम बंगाल समेत 20 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में SIR की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है।
ईसीआई और मतभेदों का विवाद
भले ही आयोग ने नियमों को लेकर स्थिति स्पष्ट कर दी हो, लेकिन मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार इन दिनों विपक्षी दलों के तीखे निशानों पर हैं। 'द इंडियन एक्सप्रेस' की एक रिपोर्ट सामने आने के बाद से विवाद गहरा गया है, जिसमें दावा किया गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 10 महीने की अवधि में कम से कम 14 बार SIR और अन्य चुनावी प्रक्रियाओं से जुड़े निर्णयों पर अपनी आपत्तियां दर्ज कराई थीं।
हालांकि, इन खबरों के बीच आयोग ने बैठक के बाद जारी अपने प्रेस नोट में स्थिति साफ करते हुए कहा कि 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में SIR का कार्यक्रम 27 अक्टूबर 2025 को और 19 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों के लिए 14 मई 2026 को आयोग की पूर्ण सहमति (Unanimous Approval) से ही जारी किया गया था।
INDIA ब्लॉक की तीखी आपत्ति
दूसरी ओर, राजधानी दिल्ली में बुधवार को शुरू हुई 'INDIA' ब्लॉक की बैठक में चुनावी सुधार और एसआईआर का मुद्दा छा गया। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खर्गे ने एसआईआर प्रक्रिया को तुरंत वापस लेने, मतदाता सूचियों में अधिक पारदर्शिता लाने और चुनाव आयोग की प्रशासनिक जवाबदेही तय करने की पुरजोर मांग की। खर्गे ने कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा, “मतदान जनता का है।”
INDIA गठबंधन के नेताओं को संबोधित करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष खर्गे ने कहा कि भारत की पूरी लोकतांत्रिक व्यवस्था “एक व्यक्ति, एक वोट, एक मूल्य” के बुनियादी सिद्धांत पर टिकी हुई है, लेकिन आज यह सिद्धांत गंभीर खतरे में है। खर्गे ने आरोप लगाया, “आज देश का नागरिक और हर राजनीतिक दल चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर गहरी चिंता और आशंकाएं व्यक्त कर रहा है।”
(भाषांतर: Ravi Pandey । इनपुट: ANI)
यह भी पढ़ें: INDIA Bloc Meeting: चुनाव प्रक्रिया और SIR पर INDIA गठबंधन हमलावर, तेजस्वी यादव ने लगाए गंभीर आरोप