एलन मस्क की इलेक्ट्रिक कार निर्माता कंपनी टेस्ला ने काफी तामझाम के साथ भारतीय ऑटोमोबाइल मार्केट में प्रवेश किया था। लेकिन लगता है कि टेस्ला की इलेक्ट्रिक कार भारतीय ग्राहकों को लुभाने में फेल रही है।
इलेक्ट्रिक कार कंपनी ने 2025 में बेची सिर्फ 225 गाड़ियां
एलन मस्क की इलेक्ट्रिक कार निर्माता कंपनी टेस्ला ने काफी तामझाम के साथ भारतीय ऑटोमोबाइल मार्केट में प्रवेश किया था। लेकिन लगता है कि टेस्ला की इलेक्ट्रिक कार भारतीय ग्राहकों को लुभाने में फेल रही है। दुनिया में डंका बजाने वाली अमेरिकी कार कंपनी टेस्ला भारतीय बाजार में स्थान बनाने में सफल होती नजर नहीं आ रही है। कीमतें ऊंची होने के कारण कंपनी कार भारतीय मार्केट में जगह बनाने में सफल होती नजर नहीं आ रही।
भारतीय और चीनी कंपनियों से कड़ी टक्कर
टेस्ला को भारतीय कंपनियों टाटा और महिंद्रा के अलावा चीनी कंपनी बीवाईडी से कड़ी टक्कर मिल रही है। ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री के डेटा में दी गई जानकारी के अनुसार टेस्ला कंपनी ने पिछले साल केवल 225 यूनिट्स की बिक्री की है। फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन (फाडा) के डेटा के मुताबिक, टेस्ला ने सितंबर में 64 यूनिट्स, अक्टूबर में 40 यूनिट्स, नवंबर में 48 यूनिट्स और दिसंबर में 73 यूनिट्स की बिक्री की है। यह प्रदर्शन किसी भी तरह उत्साहवर्धक नहीं माना जा सकता है।
मुंबई से भारत में शुरुआत
अमेरिकी इलेक्ट्रिक कार कंपनी ने पिछले साल मुंबई में शोरूम खोलकर भारत में कदम रखा था। मौजूदा समय में कंपनी भारत में अपने मॉडल वाई की बिक्री कर रही है, जो कि रियर-व्हील-ड्राइव (आरडब्ल्यूडी) कार है। मॉडल वाई के स्टैंडर्ड आरडब्ल्यूडी वेरिएंट की कीमत 59.89 लाख रुपए (एक्स-शोरूम) है, जबकि लॉन्ग रेंज आरडब्ल्यूडी की कीमत 67.89 लाख रुपए (एक्स-शोरूम) है। विदेशों में पूरी तरह से निर्मित वाहनों को भारत में आयात करने पर लगने वाले उच्च शुल्क के कारण टेस्ला मॉडल वाई की कीमतें विदेशी बाजारों की तुलना में काफी अधिक हैं।
छूट और इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी
कंपनी को इन्वेंट्री खत्म करने के लिए छूट देनी पड़ रही है। इसके अलावा स्थानीय चार्जिंग और सर्विस सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी भी एक बाधा है, जिसके चलते टेस्ला भारत के प्रीमियम ईवी बाजार में जगह बनाने में असफल रही है।
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