लखनऊ। मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध का असर का दायरा बढ़ने लगा है। अमेरिका - ईरान के बीच छिड़ी जंग से पहले सिर्फ आम आदमी को रसोईं गैस की ही समस्या का सामना करना पड़ रहा था।
लखनऊ। मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध का असर का दायरा बढ़ने लगा है। अमेरिका - ईरान के बीच छिड़ी जंग से पहले सिर्फ आम आदमी को रसोईं गैस की ही समस्या का सामना करना पड़ रहा था। लेकिन अब खाद्य तेलों की कीमतों में लगातार वृद्धि से सामान्य घरों का बजट बिगड़ने लगा है।
10 दिन में 7-12 रुपये की बढ़ोतरी
कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमतों में उछाल और वैश्विक सप्लाई चेन पर दबाव के कारण देश में खाद्य तेलों की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। पिछले 10 दिनों में रिफाइंड और सरसों तेल के दाम थोक बाजार में 7 से 12 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ चुके हैं।
क्रूड ऑयल 100 डॉलर पार
हालिया वैश्विक घटनाक्रम के चलते क्रूड ऑयल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है। इससे बायोडीजल उत्पादन फिर से लाभदायक हो गया है, जिससे खाद्य तेलों की उपलब्धता प्रभावित हो रही है।
बायोडीजल की दौड़ से घटा पाम ऑयल
इंडोनेशिया ने बायोडीजल मिश्रण को 40 फीसदी से बढ़ाकर 50 फीसदी (बी50) करने की दिशा में तेजी दिखाई है। इससे पाम ऑयल का बड़ा हिस्सा ईंधन में इस्तेमाल हो रहा है और निर्यात घट रहा है। नतीजतन वैश्विक बाजार में पाम ऑयल महंगा हो गया है।
अन्य तेलों के दाम भी चढ़े
पाम ऑयल महंगा होने से रिफाइंड तेल की लागत बढ़ी है, वहीं सोयाबीन और सूरजमुखी तेल के दाम भी बढ़ गए हैं। भारत जैसे आयात-निर्भर देश में इसका असर और अधिक दिखाई दे रहा है।
मालभाड़ा और डॉलर ने बढ़ाई मुश्किल
मध्य-पूर्व संघर्ष के कारण शिपिंग रूट प्रभावित हुए हैं, जिससे मालभाड़ा करीब 25 फीसदी तक बढ़ गया है। कोयले, प्लास्टिक पैकेजिंग और टिन की कीमतों में भी भारी वृद्धि हुई है। डॉलर की मजबूती ने आयात लागत को और बढ़ा दिया है।
उपभोक्ताओं पर बढ़ा बोझ
थोक कारोबारियों के अनुसार सरसों तेल का भाव 132 रुपये से बढ़कर 140 रुपये प्रति लीटर हो गया है। कई जगहों पर अन्य तेलों के दाम 10-15 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ चुके हैं।
यूपी में 5000 करोड़ का असर
उत्तर प्रदेश में सालाना खाद्य तेल खपत करीब 500 करोड़ लीटर है। औसतन 10 रुपये प्रति लीटर बढ़ोतरी से उपभोक्ताओं पर करीब 5000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ा है।
उत्पादन लागत में भारी इजाफा
मयूर ग्रुप के एमडी सुनील गुप्ता के अनुसार, क्रूड ऑयल महंगा होने से बायोडीजल की मांग बढ़ी है, जिससे पाम ऑयल की उपलब्धता घटी है। साथ ही पैकेजिंग, कोयला और ट्रांसपोर्ट लागत बढ़ने से कुल उत्पादन लागत करीब 25 फीसदी तक बढ़ गई है, जिसका सीधा असर बाजार कीमतों पर दिख रहा है।
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