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भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में गिरावट

भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में बड़ी गिरावट, गोल्ड रिजर्व भी घटा

नई दिल्ली। पिछले हफ्ते विदेशी मुद्रा भंडार में 11.683 अरब डॉलर की गिरावट, RBI की डॉलर बिक्री और रुपये के दबाव के कारण संपत्तियां भी घटीं।

भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में बड़ी गिरावट गोल्ड रिजर्व भी घटा

Reserve Bank Of India |

नई दिल्ली। देश के विदेशी मुद्रा भंडार में पिछले हफ्ते 11.683 अरब डॉलर की रिकॉर्ड गिरावट दर्ज हुई है। पश्चिम एशिया में तनाव और डॉलर के मुकाबले गिरते रुपये को थामने के लिए Reserve Bank of India द्वारा लगातार डॉलर की बिकवाली के कारण यह गिरावट देखने को मिली है। इस दौरान विदेशी मुद्रा भंडार के साथ ही विदेशी मुद्रा संपत्तियों में भी भारी कमी आई है।

आरबीआई के आंकड़ों में सामने आई बड़ी गिरावट

रिजर्व बैंक द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार 6 मार्च को समाप्त सप्ताह में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 11 अरब 68 करोड़ अमेरिकी डॉलर घटकर 716 अरब 80 करोड़ डॉलर पर आ गया। विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों में 9 अरब 80 करोड़ अमेरिकी डॉलर की गिरावट आई और यह 563 अरब डॉलर पर आ गई। यह 15 नवंबर, 2024 के बाद 15 महीने की सबसे बड़ी गिरावट है।

पिछले सप्ताह रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा था भंडार

इससे पिछले सप्ताह विदेशी मुद्रा भंडार 4.88 अरब डॉलर की बढ़ोतरी के साथ 728.49 अरब डॉलर के नए शिखर पर पहुंच गया था। आरबीआई के आंकड़ों के मुताबिक, 6 मार्च वाले सप्ताह में विदेशी मुद्रा संपत्ति 9.88 अरब डॉलर घटकर 563.24 अरब डॉलर रह गई। इस अवधि में देश के स्वर्ण भंडार के मूल्य में 1.61 अरब डॉलर की गिरावट आई और यह भंडार 130.01 अरब डॉलर रह गया।

फॉरेन करेंसी एसेट्स में आई सबसे बड़ी कमी

रिजर्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह फॉरेन करेंसी एसेट्स (Foreign Currency Assets) में आई कमी रही। यह भारत के विदेशी मुद्रा भंडार का सबसे बड़ा हिस्सा होता है। रिपोर्टिंग सप्ताह में विदेशी मुद्रा संपत्तियां 9.88 अरब डॉलर घटकर 563.245 अरब डॉलर रह गईं।

डॉलर के अलावा अन्य मुद्राओं का भी असर

फॉरेन करेंसी एसेट्स में डॉलर के अलावा यूरो, पाउंड और येन जैसी अन्य प्रमुख मुद्राओं में रखी गई संपत्तियां भी शामिल होती हैं। इन मुद्राओं के डॉलर के मुकाबले मजबूत या कमजोर होने का असर भी रिजर्व के कुल मूल्य पर पड़ता है।

एसडीआर और आईएमएफ पोजिशन में भी कमी

इसके अलावा International Monetary Fund से जुड़े विशेष आहरण अधिकार यानी स्पेशल ड्रॉइंग राइट्स (SDR) भी कम हुए हैं। रिपोर्टिंग सप्ताह में SDR का मूल्य 146 मिलियन डॉलर घटकर 18.720 अरब डॉलर रह गया। वहीं IMF के साथ भारत की रिजर्व पोजिशन भी थोड़ी कम हुई है। यह 45 मिलियन डॉलर घटकर 4.828 अरब डॉलर पर आ गई।

आर्थिक स्थिरता का अहम संकेतक है विदेशी मुद्रा भंडार

भारत के पास दुनिया के सबसे बड़े विदेशी मुद्रा भंडारों में से एक है, जिससे वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के दौर में भी देश को वित्तीय सुरक्षा का मजबूत आधार मिलता है। हालांकि हाल के हफ्तों में इसमें उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है, जो वैश्विक मुद्रा बाजार और पूंजी प्रवाह से भी प्रभावित होता है।

आयात और कर्ज भुगतान में अहम भूमिका

विदेशी मुद्रा भंडार किसी भी देश की आर्थिक स्थिरता का अहम संकेतक माना जाता है। यह रिजर्व आयात भुगतान, विदेशी कर्ज चुकाने और मुद्रा बाजार में उतार-चढ़ाव को संभालने के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है।

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