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UPI टैक्स प्रस्ताव पर गौरव गोगोई की चिंता

गौरव गोगोई और जयराम रमेश ने UPI पर नए MDR चार्ज और टैक्स प्रस्ताव का किया कड़ा विरोध

गौरव गोगोई ने UPI टैक्स प्रस्ताव पर चिंता जताई है। NPCI के नए MDR फ्रेमवर्क के तहत 2,000 रुपये से ऊपर चुनिंदा UPI मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर 0.4% शुल्क लगेगा। पढ़ें पूरी खबर।

गौरव गोगोई और जयराम रमेश ने upi पर नए mdr चार्ज और टैक्स प्रस्ताव का किया कड़ा विरोध

Congress leader Gaurav Gogoi (FilePhoto) |

नई दिल्ली। कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने गुरुवार को सरकार के UPI प्रस्ताव पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि वित्त मामलों की संसदीय स्थायी समिति ने इस पर चर्चा नहीं की थी और वित्त विभाग ने इस मुद्दे पर समिति के सामने कोई खास प्रस्ताव पेश नहीं किया है। गोगोई ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, "वित्त मामलों की संसदीय स्थायी समिति ने मोदी सरकार द्वारा हाल ही में घोषित UPI टैक्स प्रस्ताव पर चर्चा नहीं की है। जब वित्त विभाग के अधिकारी वित्त समिति के सदस्यों से मिले, तो उनके पास UPI टैक्स को लेकर कोई खास प्रस्ताव नहीं था।"

छोटे व्यापारियों और वेंडर्स को होगा भारी नुकसान

पोस्ट में लिखा था, "MDR की आवश्यकता पर सवाल उठाए गए थे, लेकिन उस समय सरकार के प्रतिनिधियों के पास कोई खास या संतोषजनक जवाब नहीं था। मैं फिर से कहता हूं कि हाल की UPI टैक्स नीतियां छोटे भारतीय व्यापारियों, वेंडरों और उद्यमियों को नुकसान पहुंचाती हैं और बड़ी अमेरिकी कंपनियों की मदद करती हैं। UPI टैक्स वापस लें। घुटने टेकना बंद करें, पीएम मोदी।"

जयराम रमेश ने नए बिल पर उठाए गंभीर सवाल

गोगोई ने इस मुद्दे पर कांग्रेस नेता जयराम रमेश की एक पुरानी पोस्ट को भी रीशेयर किया है। रीशेयर की गई पोस्ट में, रमेश ने सरकार के नए 'टैक्सेशन एंड अदर लॉज (अमेंडमेंट) बिल, 2026' पर चिंता जताई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि यह बिल UPI ट्रांज़ैक्शन को मुफ्त रखने की कानूनी गारंटी को खत्म करता है और मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) चार्ज का रास्ता खोल सकता है।

RBI के सरप्लस फंड से चल सकता है UPI इकोसिस्टम

रमेश ने सरकार के इस तर्क पर भी सवाल उठाया था कि UPI इकोसिस्टम को आर्थिक रूप से टिकाऊ बनाए रखने के लिए यह कदम जरूरी है। रमेश ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में लिखा, "मोदी सरकार का यह दावा झूठ है कि UPI को आर्थिक रूप से टिकाऊ बनाए रखने का यही एकमात्र तरीका है। RBI के पास व्यापारियों या उपभोक्ताओं पर चार्ज लगाए बिना UPI इकोसिस्टम को टिकाऊ ढंग से फंड करने की आर्थिक क्षमता है। 2025-26 में, RBI ने मोदी सरकार को 2.86 लाख करोड़ रुपये ट्रांसफर किए थे। इस अहम डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर को सपोर्ट करने के लिए इस सरप्लस ट्रांसफर का एक छोटा सा हिस्सा ही काफी होगा।"

अमेरिकी दबाव में नियम बदलने का लगाया आरोप

रमेश ने आगे यह भी सवाल उठाया कि क्या प्रस्तावित संशोधन का संबंध US ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव की 2026 की रिपोर्ट में UPI और RuPay को लेकर जताई गई चिंताओं से है। "असल में, इस बदलाव को लाने की असली वजह शायद ज़्यादा चिंताजनक है। यह U.S. ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव की 2026 की रिपोर्ट के बाद आया है, जिसमें UPI और RuPay के मुफ्त होने की आलोचना की गई है और उन पर आरोप लगाया गया है कि उन्होंने Visa और MasterCard जैसे अमेरिकी पेमेंट प्लेटफॉर्म को बाहर कर दिया है। क्या प्रधानमंत्री अपने अच्छे दोस्त डोनाल्ड ट्रंप के दबाव में UPI को कमजोर करना चाहते हैं और डिजिटल पेमेंट सेक्टर को अमेरिकी कंपनियों के लिए खोलना चाहते हैं?"

NPCI ने पेश किया नया MDR फ्रेमवर्क

नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने एक नया मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) फ्रेमवर्क पेश किया है। इसके तहत 2,000 रुपये से अधिक के UPI मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर 0.4 प्रतिशत MDR लगेगा, जबकि ग्राहक UPI का इस्तेमाल करके मुफ्त में ट्रांजैक्शन करते रहेंगे। संशोधित UPI MDR फ्रेमवर्क 15 अक्टूबर, 2026 से लागू होगा और यह केवल चुनिंदा मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर लागू होगा।
​(भाषांतर: Ravi Pandey । इनपुट: ANI)

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