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भारत में ऑनलाइन गेमिंग पर सख्ती

भारत में 'ऑनलाइन गेमिंग' में पैसों के प्रयोग पर लगेगी लगाम

ऑनलाइन गेम्स से युवाओं में लत बढ़ी है, जिससे कर्ज, चोरी और आत्महत्या जैसी घटनाएं सामने आ रही हैं। लोग लगातार इस पर बैन की मांग कर रहे हैं।

भारत में ऑनलाइन गेमिंग में पैसों के प्रयोग पर लगेगी लगाम

Online Gaming Regulation |

नई दिल्ली। "ऑनलाइन गेम्स" ने देश में एक सामाजिक बुराई का रूप ले लिया है। "ऑनलाइन गेम्स" की वजह से युवाओं द्वारा आत्महत्या, अपने ही घरों में चोरी और लोगों के कर्ज के मकड़जाल में फंसने की खबरें आये दिन अखबारों की सुर्खियां बनती हैं। समय-समय पर लोग इसपर बैन लगाने की मांग करते रहे हैं।

सरकार का सख्त कदम

इस बुराई पर प्रभावी नियंत्रण के लिए केन्द्र सरकार ने "ऑनलाइन गेम्स" को लेकर "नियामक प्राधिकरण" बनाने और इसके संचालन को लेकर नये नियम लागू करने का फैसला किया है।

नया कानून और लागू होने की तारीख

केन्द्र सरकार ने "प्रमोशन एंड रेगुलेशन ऑफ ऑनलाइन गेमिंग एक्ट 2025" के तहत नए नियम अधिसूचित किए हैं। नये एक्ट के नियमों को लागू करने के लिए 1 मई की तारीख तय की गई है।

यूजर्स की सुरक्षा और फाइनेंशियल सिस्टम पर फोकस

इन नियमों का उद्देश्य गेमिंग के दौरान ऑनलाइन मनी के ट्रांजेक्शन और रियल मनी वाले खेलों को विनियमित करना, उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा और वित्तीय प्रणालियों को सुरक्षित करना है।

OGAI का गठन

इसके तहत "ऑनलाइन गेमिंग अथॉरिटी ऑफ इंडिया (OGAI)" का गठन किया जाएगा, जो 6 मंत्रालयों के सदस्यों के साथ काम करेगी। इसका मकसद गेम खेलने वालों की सुरक्षा और सोशल गेम्स को बेहतर तरीके से मैनेज करना है।

रियल मनी गेम्स पर सख्ती

नया गेमिंग एक्ट लागू होने के बाद जो गेम्स पैसे (real money) से संबंधित हैं या जिनमें जोखिम है, उनके लिए रजिस्ट्रेशन जरूरी होगा। बिना पैसे वाले (social games) को अनिवार्य रजिस्ट्रेशन से राहत मिल सकती है। गेमिंग सर्टिफिकेट 10 साल तक वैध रहेगा।

कंपनियों पर बढ़ेगी जिम्मेदारी

अब गेमिंग कंपनियों को यूजर की सुरक्षा के लिए खास तकनीकी और सिस्टम से जुड़े फीचर्स देने होंगे। भारत में संचालित होने वाले, लेकिन विदेश से चल रहे ऐप्स को भी नियमों का पालन करना होगा। कंपनियों को शिकायतों के निपटारे के लिए तंत्र (Mechanism) बनाना होगा। इन नियमों से ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म्स पर लगाम कसी जाएगी और इसे और अधिक पारदर्शी बनाया जाएगा। इसमें गेम खेलने वाले की उम्र की जांच करना, बच्चों के लिए पैरेंटल कंट्रोल, समय की पाबंदी और शिकायतों के लिए खास टूल शामिल हैं।

रजिस्ट्रेशन के समय पूरी जानकारी जरूरी

कंपनियों को रजिस्ट्रेशन के वक्त इन सुरक्षा फीचर्स और अपने शिकायत निपटारे के सिस्टम की पूरी जानकारी देनी होगी। हालांकि सरकार ने इस पूरे फ्रेमवर्क को फिलहाल कुछ हल्का रखा है ताकि ज्यादातर सोशल गेम्स को बिना किसी फालतू दबाव के चलने दिया जा सके। "ऑनलाइन गेमिंग" को लेकर बने नये नियमों में "ऑनलाइन मनी" को लेकर सतर्कता बरती जाएगी। नए नियमों के तहत एक खास लिटमस टेस्ट किया जाएगा, जिससे यह पता चलेगा कि कोई गेम 'ऑनलाइन मनी गेम' की कैटेगरी में आता है या नहीं।

90 दिनों में जांच पूरी

अगर किसी गेम में पैसे का लेन-देन ज्यादा होता है या सरकार को उसमें रिस्क लगता है, तो उसकी जांच की जाएगी। यह पूरी प्रक्रिया 90 दिनों के भीतर पूरी करनी होगी। अगर कोई कंपनी ई-स्पोर्ट्स ऑफर करती है, तो भी उसकी जांच की जा सकती है। केन्द्रीय आईटी सचिव एस कृष्णन ने बताया कि ज्यादातर गेम्स के लिए रजिस्ट्रेशन जरूरी नहीं है और वे बिना पाबंदी के काम जारी रख सकते हैं। हालांकि ई-स्पोर्ट्स के लिए रजिस्ट्रेशन अनिवार्य होगा। इसके अलावा, अगर सरकार को लगता है कि किसी गेम से यूजर्स या बच्चों को खतरा है, तो उसके लिए भी रजिस्ट्रेशन लागू किया जा सकता है।

डिजिटल सर्टिफिकेट दिखाना होगा

सफल रजिस्ट्रेशन होने पर अथॉरिटी की तरफ से 10 साल के लिए डिजिटल सर्टिफिकेट जारी किया जाएगा, जिसे कंपनी को अपने ऐप या वेबसाइट पर दिखाना होगा। "ऑनलाइन गेमिंग अथॉरिटी" एक मल्टी-सेक्टर बॉडी होगी, जिसमें गृह मंत्रालय, फाइनेंस, सूचना एवं प्रसारण, खेल और कानून मंत्रालय के अधिकारी शामिल होंगे। यह अथॉरिटी बैंकों के साथ मिलकर काम करेगी ताकि पैसों के गलत लेन-देन को रोका जा सके। अगर कोई गेम गैर-कानूनी पाया जाता है, तो बैंक उसके सारे ट्रांजेक्शन तुरंत रोक देंगे। बैंकों को यह अधिकार होगा कि वे किसी भी गेमिंग कंपनी से उसका रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट मांग सकें।

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