दिल्ली की कड़कड़डूमा अदालत ने 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के दौरान पुलिसकर्मियों पर हमला करने और उनके काम में बाधा डालने के आरोप में पांच लोगों को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई है।
नई दिल्ली (भारत)। दिल्ली की कड़कड़डूमा अदालत ने गुरुवार को 2020 के उत्तर पूर्वी दिल्ली दंगों के दौरान पुलिस पर हमला करने के आरोप में पांच लोगों को सजा सुनाई। ये पांचों दोषी गैरकानूनी सभा के सदस्य थे, जिन्होंने भजनपुरा पुलिस स्टेशन के अंतर्गत आने वाले क्षेत्र में दंगों को नियंत्रित करने की कोशिश कर रही पुलिस टीम पर हमला किया था।
दंगे को दबाने की कोशिश कर रहे पुलिसकर्मियों पर हमला
अदालत ने कहा, "दंगे को दबाने की कोशिश कर रहे पुलिसकर्मियों पर हमला और उनके काम में बाधा डालना एक और गंभीर परिस्थिति है।" इससे पहले, 9 सितंबर को, अदालत ने उन्हें दंगा करने (धारा 147 आईपीसी), गैरकानूनी सभा का सदस्य होने (धारा 49 आईपीसी), लोक सेवक को उसके सार्वजनिक कर्तव्य के निर्वहन में बाधा डालने (धारा 186 आईपीसी), ड्यूटी पर तैनात लोक सेवक पर हमला करने (धारा 353 आईपीसी) और दंगों को दबाने के दौरान पुलिस पर हमला करने (धारा 152 आईपीसी) के अपराधों के लिए दोषी ठहराया था।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश परवीन सिंह ने दोषियों को दी सजा
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (एएसजे) परवीन सिंह ने दोषियों, आरिफ, मोहम्मद को सजा सुनाई। खालिद, अब्दुल सत्तार, तनवीर अली और हुनैंन को आईपीसी की धारा 147 और धारा 149 के तहत डेढ़ साल की कैद और 4000 रुपये का जुर्माना, आईपीसी की धारा 152 और धारा 149 के तहत दो साल की कैद और 5000 रुपये का जुर्माना, आईपीसी की धारा 186 और धारा 149 के तहत दो महीने की कैद और 500 रुपये का जुर्माना और आईपीसी की धारा 353 और धारा 149 के तहत डेढ़ साल की कैद की सजा सुनाई गई। एएसजे सिंह ने कहा, "मेरा मानना है कि यह ऐसा मामला नहीं है जिसमें बहुत नरमी बरती जानी चाहिए, क्योंकि दोषियों ने राज्य तंत्र पर सीधा हमला किया था, जो कानून व्यवस्था बनाए रखने और दंगों को दबाने में लगा हुआ था।"
वे सभी अपने परिवारों के एकमात्र कमाने वाले
हालांकि, अदालत ने अपने आदेश में कहा कि यह ऐसा मामला भी नहीं है जिसमें कानून के तहत अधिकतम सजा दी जानी चाहिए, क्योंकि दोषियों के पक्ष में कुछ नरम परिस्थितियां मौजूद हैं। दोषियों को सजा सुनाते हुए अदालत ने कहा कि यह तथ्य कि यह एक गैरकानूनी भीड़ थी जिसने दंगा किया, एक गंभीर परिस्थिति है क्योंकि ऐसे मामलों में सजा का आम जनता पर व्यापक प्रभाव होना चाहिए। अदालत दोषियों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति, इस तथ्य कि वे पहली बार अपराध कर रहे हैं, इस तथ्य कि वे सभी अपने परिवारों के एकमात्र कमाने वाले हैं और इस तथ्य कि इस मामले के बाद भी वे किसी अन्य आपराधिक गतिविधि में शामिल नहीं हुए हैं, पर भी विचार करती है।
राज्य तंत्र की जड़ पर प्रहार
दिल्ली की ओर से विशेष लोक अभियोजक (एसपीपी) मधुकर पांडे ने लिखित दलीलें पेश कीं। उन्होंने कहा कि दोषियों द्वारा किए गए अपराध अत्यंत निर्भीक असामाजिक प्रकृति के हैं, जो राज्य तंत्र की जड़ पर प्रहार करते हैं। एसपीपी ने कहा, "जब पुलिसकर्मी ड्यूटी पर थे और भीड़ को शांत करने की कोशिश कर रहे थे, तब दोषियों सहित हिंसक भीड़ ने वर्दीधारी अधिकारियों पर पत्थर फेंककर आक्रामक रूप से जवाबी कार्रवाई की।" दूसरी ओर, आरोपियों के वकील ने उनकी गरीब पृष्ठभूमि, कम या न के बराबर शिक्षा, पारिवारिक दायित्व आदि का हवाला देते हुए नरमी बरतने की प्रार्थना की। (इनपुट: ANI)
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