कुछ वकीलों ने यूट्यूबर ध्रुव राठी के एक विवादित वीडियो के खिलाफ दिल्ली की अदालत में मुकदमा दायर कर 50 लाख रुपये के हर्जाने और वीडियो पर रोक लगाने की मांग की है।
नई दिल्ली (भारत)। एक वकील ने अन्य लोगों के साथ मिलकर यूट्यूबर ध्रुव राठी के खिलाफ दीवानी मुकदमा दायर कर उनसे हर्जाने की मांग की है। शिकायतकर्ताओं ने, जिन्होंने खुद को हिंदू श्रद्धालु बताया है, आरोप लगाया है कि ध्रुव राठी द्वारा पोस्ट किए गए एक वीडियो से उनकी धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं। इसके मद्देनजर, उन्होंने अदालत से अनुरोध किया है कि राठी को इसी तरह की सामग्री बनाने, अपलोड करने या प्रकाशित करने से रोकने के लिए अंतरिम आदेश जारी किया जाए।
कम से कम 50 लाख रुपये के हर्जाने की मांग
शिकायतकर्ताओं ने कम से कम 50 लाख रुपये के हर्जाने की मांग की है। यह भी प्रार्थना की गई है कि यदि हर्जाना दिया जाता है, तो वह राशि इस न्यायालय में जमा की जाए, जिसका उपयोग भगवान श्री राम, माता सीता और भगवान श्री कृष्ण के किसी मंदिर या मंदिरों के कल्याण, रखरखाव और देखभाल के लिए या ऐसे किसी अन्य सार्वजनिक या धार्मिक उद्देश्य के लिए किया जाए, जिसे न्यायालय उचित समझे। शिकायतकर्ता अमिता सचदेवा ने मुकदमे में आरोप लगाया है कि ध्रुव राठी एक जाने-माने यूट्यूबर और कंटेंट क्रिएटर हैं, जो 3 करोड़ से अधिक सब्सक्राइबर वाले यूट्यूब चैनल "ध्रुव राठी" का संचालन करते हैं।
स्थायी रूप से प्रकाशित ये बयान मानहानिकारक
हालांकि, एक वीडियो में राठी ने मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम, सीता माता और योगेश्वर भगवान श्री कृष्ण के बारे में स्पष्ट रूप से झूठे, चुनिंदा, भ्रामक और अत्यंत आपत्तिजनक बयान दिए हैं। यह भी आरोप है कि व्यापक रूप से सुलभ मंच पर स्थायी रूप से प्रकाशित ये बयान मानहानिकारक हैं, क्योंकि इनका उद्देश्य समाज के सदस्यों की नज़र में भगवान श्री राम, सीता माता और योगेश्वर भगवान श्री कृष्ण की गरिमा, पवित्रता, प्रतिष्ठा और मर्यादा को कम करना है, और इस प्रकार उनके भक्तों के रूप में वादी की प्रतिष्ठा, धार्मिक पहचान, प्रतिष्ठा और आत्मसम्मान को प्रत्यक्ष रूप से ठेस पहुंचाना है।
ऐसे विडिओ प्रसारित करने या संचारित करने से रोकने की मांग
जिला न्यायाधीश मोहिंदर विराट ने बुधवार को इस मामले पर सुनवाई की और मामले को 5 नवंबर को विचार के लिए सूचीबद्ध किया। शिकायतकर्ता की ओर से अधिवक्ता मकरंद डी. अडकर उपस्थित हुए। अधिवक्ता अमिता सचदेवा और अन्य ने एकतरफा अंतरिम निषेधाज्ञा जारी करने की मांग की है, जिसमें ध्रुव राठी, उनके एजेंटों और उनकी ओर से कार्य करने वाले व्यक्तियों को "क्या हिंदू गोमांस खा सकते हैं?" शीर्षक वाले वीडियो या उससे मिलते-जुलते किसी भी वीडियो को इंटरनेट या किसी अन्य मीडिया पर बनाने, प्रकाशित करने, अपलोड करने, साझा करने, प्रसारित करने या संचारित करने से रोकने की मांग की गई है, जब तक कि यह मुकदमा लंबित है।
गूगल को भी एकतरफा अंतरिम निषेधाज्ञा जारी करने की मांग
शिकायतकर्ताओं ने गूगल को भी एकतरफा अंतरिम निषेधाज्ञा जारी करने की मांग की है, जिसमें यूआरएल की सूचना और सत्यापन के बाद उक्त वीडियो या उससे मिलते-जुलते किसी भी वीडियो को पुनर्स्थापित करने, होस्ट करने, अपलोड करने, साझा करने या प्रसारित करने से रोकने की मांग की गई है, जब तक कि यह मुकदमा लंबित है। यह भी प्रार्थना की गई है कि राठी को निर्देश दिया जाए कि वह उक्त वीडियो को अपने यूट्यूब चैनल और अपने नियंत्रण वाले सभी खातों से तुरंत हटा दें और उनके द्वारा या उनके कहने पर अपलोड की गई सभी प्रतियों को भी हटा दें।
(इनपुट: ANI)
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