रिजर्व बैंक और आईएमएफ के जीडीपी में तेजी के दावों के बीच देश की मैन्यूफैक्चरिंग क्षेत्र की गतिविधियों में दिसंबर के महीने में सुस्ती देखने को मिली है।
नई दिल्ली। रिजर्व बैंक और आईएमएफ के जीडीपी में तेजी के दावों के बीच देश की मैन्यूफैक्चरिंग क्षेत्र की गतिविधियों में दिसंबर के महीने में सुस्ती देखने को मिली है। भारत के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की रफ्तार दिसंबर में दो साल के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है। नए आर्डर में धीमी वृद्धि को इसकी मुख्य वजह माना जा रहा है।
देश के मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर के वृद्धि दर को दर्शाने वाला एचएसबीसी इंडिया मैन्यूफैक्चरिंग खरीद प्रबंधक सूचकांक (पीएमआइ) नवंबर के 56.6 से घटकर दिसंबर में 55 पर आ गया। सीजनल आधार पर समायोजित खरीद प्रबंधक सूचकांक (पीएमआई) की भाषा में कहें तो PMI का 50 से ऊपर का स्तर बढ़त को दिखाता है, इससे नीचे होना गिरावट का संकेत है।
38 महीनों के निचले स्तर पर पहुंची उत्पादन वृद्धि
एचएसबीसी इंडिया मैन्यूफैक्चरिंग पीएमआइ सर्वेक्षण द्वारा 'ट्रैक' किए गए कई मापदंडों में 2025 कैलेंडर वर्ष के अंत में वृद्धि की गति धीमी हो गई। दो वर्ष में नए आर्डर में सबसे कमजोर उछाल के बीच उत्पादन वृद्धि 38 महीनों के निचले स्तर पर पहुंच गई। कुल बिक्री में आई मंदी का एक कारण अंतरराष्ट्रीय आर्डर में धीमी वृद्धि भी रही। नए निर्यात आर्डर में पिछले 14 महीनों में सबसे कम वृद्धि दर्ज की गई। दूसरी और एशिया, यूरोप और पश्चिम एशिया के ग्राहकों से बेहतर मांग देखने को मिली। सर्वेक्षण में कहा गया कि वर्तमान अवधि में रोजगार सृजन की गति सबसे कम रही। कीमतों के मोर्चे पर कहा गया कि कच्चे माल की लागत में ऐतिहासिक रूप से नगण्य गति से वृद्धि हुई है। साथ ही, 'मूल्य मुद्रास्फीति की दर नौ महीनें के निचले स्तर पर आ गया।
RBI ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए वृद्धि का अनुमान बढ़ाकर किया 7.3 प्रतिशत
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए GDP वृद्धि के अनुमान को बढ़ाकर 7.3% कर दिया है, जो मजबूत आर्थिक सुधार का संकेत देता है। अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने भी भारत की GDP वृद्धि दर को वित्त वर्ष 2026 के लिए 6.4% रहने का अनुमान लगाया है, जो पिछले अनुमान से अधिक है, जिससे वैश्विक परिस्थितियों का लाभ दिख रहा है। लेकिन दिसंबर माह में मैन्यूफैक्चरिंग PMI (परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स) जैसे सूचकांकों आयी गिरावट जो उत्पादन और नई मांग में कमी को दर्शाता है, के बाद यह जीडीपी लक्ष्य हासिल करना मुश्किल हो सकता है।
GDP की गणना का एक व्यापक पैमाना है जिसमें कई क्षेत्र (सेवाएं, कृषि, मैन्यूफैक्चरिंग) शामिल होते हैं। मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर की सुस्ती समग्र GDP वृद्धि को प्रभावित कर सकती है, लेकिन अन्य क्षेत्र मजबूत प्रदर्शन कर सकते हैं, जैसा कि हाल ही में देखा गया है। लेकिन मैन्यूफैक्चरिंग ही नहीं कोयला उत्पादन के क्षेत्र में भी हाल में गिरावट आयी है। ऐसे में जीडीपी पर ये फैक्टर निगेटिव असर डाल सकते हैं।
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