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नौतपा-मानसून: गर्मी का असर और मान्यताएं

नौतपा और मानसून: गर्मी का मौसम चक्र, मान्यताएं और वैज्ञानिक प्रभाव

नौतपा का मौसम चक्र (खासकर मानसून) पर असर पारंपरिक मान्यताओं और कुछ वैज्ञानिक तर्कों दोनों से जुड़ा है।

नौतपा और मानसून गर्मी का मौसम चक्र मान्यताएं और वैज्ञानिक प्रभाव

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अच्छी गर्मी को माना जाता है शुभ संकेत

नौतपा का मौसम चक्र (खासकर मानसून) पर असर पारंपरिक मान्यताओं और कुछ वैज्ञानिक तर्कों दोनों से जुड़ा है।

पारंपरिक / ज्योतिषीय मान्यता

अच्छी गर्मी = अच्छा मानसून: अगर नौतपा के ९ दिनों में प्रचंड गर्मी (लू, उच्च तापमान) पड़े तो इसे अच्छे मानसून का संकेत माना जाता है।

कारण: तेज गर्मी से धरती गर्म होती है, जो समुद्र से नमी खींचने में मदद करती है। इससे मानसूनी बादल मजबूत बनते हैं और बारिश अच्छी होती है।

बारिश या कम गर्मी को माना जाता है कमजोर संकेत

अगर नौतपा में बारिश हो जाए या गर्मी कम पड़े तो कमजोर मानसून, अनियमित बारिश, फसलें प्रभावित होने या कीटों के बढ़ने का खतरा माना जाता है।

यह "मौसम चक्र" का हिस्सा समझा जाता है — नौतपा को "मानसून की गर्भावस्था" भी कहा जाता है।

वैज्ञानिक / मौसम संबंधी दृष्टिकोण

सूर्य की सीधी किरणों से बढ़ती है गर्मी

सूर्य की स्थिति: मई-जून में उत्तरी गोलार्ध सूर्य की ओर झुकता है (२३.५° टिल्ट), जिससे भारत पर सीधी किरणें पड़ती हैं। इससे तापमान चरम पर पहुंचता है। रोहिणी नक्षत्र की ज्योतिषीय गणना इसे और हाइलाइट करती है।

भूमि और समुद्र के तापमान का अंतर अहम

मानसून तैयारी: तेज गर्मी से भूमि-समुद्र तापमान अंतर बढ़ता है, जो दक्षिण-पश्चिम मानसून को खींचने में मदद करता है। गर्म हवा ऊपर उठती है, नमी वाली हवाएं आकर्षित होती हैं।

उमस बढ़ने से महसूस होती है ज्यादा गर्मी

उमस बढ़ना: नौतपा के आसपास बंगाल की खाड़ी और अरब सागर से नम हवाएं आना शुरू हो जाती हैं, जिससे "फील्स लाइक" तापमान बहुत ज्यादा (५०-५५°C तक) महसूस होता है, भले ही वास्तविक तापमान ४२-४८°C हो।

जलवायु परिवर्तन भी बड़ा कारण

आधुनिक अध्ययन: नौतपा की गर्मी का सीधा "कारण-प्रभाव" मानसून पर साबित नहीं है, लेकिन यह प्राकृतिक मौसम चक्र का हिस्सा है। जलवायु परिवर्तन, एल नीनो/ला नीना, प्रदूषण आदि बड़े कारक हैं जो मानसून प्रभावित करते हैं। कुछ विशेषज्ञ इसे सिर्फ लोक परंपरा मानते हैं।

कृषि और पर्यावरण पर असर

खेती को मिल सकता है फायदा

फायदे: मिट्टी पकती है, कीट/बीजाणु नष्ट होते हैं, बाद में अच्छी बारिश से खरीफ फसलें (धान, मक्का आदि) लाभान्वित होती हैं। नुकसान अगर गर्मी कम पड़े: कीट बढ़ सकते हैं, मिट्टी में नमी का असंतुलन और अनियमित बारिश से फसल नुकसान हो सकता है।

२०२६ का नौतपा

हीटवेव अलर्ट के बीच बढ़ी उम्मीदें

२०२६ में नौतपा २५ मई से २ जून तक है। IMD ने उत्तर भारत में हीटवेव अलर्ट जारी किया है। अगर इस बार अच्छी तपिश पड़ी तो पारंपरिक रूप से अच्छे मानसून की उम्मीद जताई जा रही है।

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