कैब एग्रीगेटर कंपनी ओला (Ola) की पैरेंट कंपनी 'एएनआई टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड' को चंडीगढ़ प्रशासन ने एक बड़ा झटका दिया है।
चंडीगढ़। कैब एग्रीगेटर कंपनी ओला (Ola) की पैरेंट कंपनी 'एएनआई टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड' को चंडीगढ़ प्रशासन ने एक बड़ा झटका दिया है। नियमों के उल्लंघन और बार-बार चेतावनियों को नजरअंदाज करने के आरोप में कंपनी का एग्रीगेटर लाइसेंस तत्काल प्रभाव से 6 महीने के लिए सस्पेंड कर दिया गया है। स्टेट ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी (STA) ने यह सख्त कार्रवाई चंडीगढ़ एडमिनिस्ट्रेशन मोटर व्हीकल एग्रीगेटर रूल्स, 2025 के तहत की है।
मुख्य बिंदु (Key Highlights):
लाइसेंस सस्पेंड: ओला की पैरेंट कंपनी एएनआई टेक्नोलॉजीज का एग्रीगेटर लाइसेंस 6 महीने के लिए तुरंत प्रभाव से निलंबित।
नियमों का उल्लंघन: ड्राइवरों के हेल्थ और टर्म इंश्योरेंस, ट्रेनिंग और मनमाने किराये को लेकर मिली थीं कई शिकायतें।
चोरी-छिपे दफ्तर बदला: बिना प्रशासन को बताए करीब एक साल पहले ही चंडीगढ़ का स्थानीय दफ्तर खाली कर दिया था।
अथॉरिटी की सख्त कार्रवाई: लाइसेंसिंग अथॉरिटी ने चंडीगढ़ एडमिनिस्ट्रेशन मोटर व्हीकल एग्रीगेटर रूल्स, 2025 के नियम 17 के तहत लिया एक्शन।
ड्राइवरों के हक पर मार और मनमाना किराया, प्रशासन ने लिया कड़ा एक्शन
यह पूरा मामला चंडीगढ़ में कैब चलाने वाले ड्राइवरों के हितों और तय नियमों की अनदेखी से जुड़ा है। स्टेट ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी के सचिव और लाइसेंसिंग अथॉरिटी नीतीश सिंगला (PCS) द्वारा जारी आदेश के मुताबिक, ओला के खिलाफ ड्राइवरों के हेल्थ इंश्योरेंस, टर्म इंश्योरेंस, ड्राइवर ट्रेनिंग और तय फेयर स्ट्रक्चर (किराया नीति) का पालन न करने की लगातार शिकायतें मिल रही थीं। इसके अलावा, कंपनी द्वारा चलाए जा रहे सब्सक्रिप्शन मॉडल को भी नियमों के खिलाफ पाया गया, जिसमें कैब ऑपरेटरों को प्रीपेड सब्सक्रिप्शन रिचार्ज करने के लिए मजबूर किया जा रहा था।
बैठकों से बनाई दूरी, जांच टीम पहुंची तो गायब मिला ओला का दफ्तर
प्रशासन ने ओला को सुधरने के कई मौके दिए थे। 8 जुलाई 2025 को पत्र और ईमेल के जरिए नियमों का पालन करने को कहा गया था, जिसके बाद 3 सितंबर 2025 को सचिव (परिवहन) की अध्यक्षता में बैठक भी हुई। हद तो तब हो गई जब 24 सितंबर 2025 को गठित एक जांच समिति ने पाया कि कंपनी ने अधिकारियों को बताए बिना ही करीब एक साल पहले अपना स्थानीय दफ्तर कहीं और शिफ्ट कर दिया था।
इसके बाद मई 2026 में भी कंपनी का अड़ियल रवैया जारी रहा। 7 मई को बुलाई गई बैठक में कंपनी का कोई प्रतिनिधि नहीं आया। 11 मई को जारी कारण बताओ नोटिस का भी कंपनी ने 7 दिनों के भीतर कोई जवाब नहीं दिया। जांच कमेटी ने जब 1 मई, 8 मई और 19 मई को ओला के दिए गए पते पर दौरा किया, तो वहां ताला लटका मिला।
आम जनता और ड्राइवरों पर क्या होगा असर?
इस निलंबन के बाद अब अगले 6 महीनों तक ओला चंडीगढ़ में वैध रूप से अपनी सेवाएं नहीं दे सकेगी। नियमों के मुताबिक, लाइसेंस सस्पेंड होने के बाद कंपनी के ऐप पर नए नियमों के तहत बुकिंग और संचालन पर रोक रहेगी। इससे जहां एक तरफ चंडीगढ़ के यात्रियों को वैकल्पिक कैब सेवाओं का रुख करना पड़ सकता है, वहीं नियमों का उल्लंघन करने वाली एग्रीगेटर कंपनियों के लिए यह एक कड़ा संदेश है।
FAQ Block: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Q1. चंडीगढ़ में ओला का लाइसेंस क्यों सस्पेंड किया गया है?
Ans. ओला की पैरेंट कंपनी ने चंडीगढ़ एडमिनिस्ट्रेशन मोटर व्हीकल एग्रीगेटर रूल्स, 2025 का उल्लंघन किया है। कंपनी ड्राइवरों के बीमा, ट्रेनिंग, तय किराये के नियमों का पालन नहीं कर रही थी और बिना बताए अपना दफ्तर भी बंद कर दिया था।
Q2. ओला पर यह निलंबन कितने समय के लिए लागू रहेगा?
Ans. स्टेट ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी (STA) के आदेश के अनुसार, ओला का एग्रीगेटर लाइसेंस तत्काल प्रभाव से 6 महीने की अवधि के लिए सस्पेंड किया गया है।
(यह खबर न्यूज़ एजेंसी ANI के इनपुट और मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है।)
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