पहलगाम आतंकी हमले के मास्टरमाइंड हाशिम मूसा के एनकाउंटर पर पीड़ित संतोष जगदाले की बेटी असवारी ने सेना का आभार जताया। उन्होंने कहा कि यह देश और 26 पीड़ित परिवारों के लिए सबसे बड़ी राहत का दिन है।
नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर के बडगाम जिले में सुरक्षाबलों ने पाकिस्तानी आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैबा के कुख्यात पाकिस्तानी लश्कर-ए-तएबा आतंकवादी और पहलगाम आतंकी हमले के मास्टरमाइंड हाशिम मूसा को एक मुठभेड़ में ढेर कर दिया है। इस खबर के बाद, 22 अप्रैल के पहलगाम आतंकी हमले में जान गंवाने वाले संतोष जगदाले की बेटी असवारी जगदाले ने कहा, "मैं भारतीय सेना, भारतीय सुरक्षा बलों और इस अभियान में काम कर रही सभी एजेंसियों की आभारी हूं।"
आतंकी हाशिम मूसा के ढेर होने पर छलकी बेटी की खुशी
असवारी जगदाले ने ANI से खास बातचीत में इस दिन को अपने जीवन का सबसे खुशी का दिन करार दिया। उन्होंने 22 अप्रैल 2025 की उस खौफनाक घटना को याद किया जब बैसरन घाटी में धर्म पूछकर 26 निर्दोष लोगों की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। असवारी ने कहा, "आज का दिन मेरे लिए सबसे खुशी का दिन है। 22 अप्रैल 2025 को बैसरन घाटी में जिस तरह से हमारे लोगों को मारा गया, 26 निर्दोषों की जान चली गई। उनसे धर्म पूछने के बाद उन्हें मौत के घाट उतारा गया। आज मुझे पता चला कि उस नरसंहार के पीछे का मास्टरमाइंड मुठभेड़ में मारा गया है। मैं कहूंगी कि यह पूरे देश के लिए सबसे बड़ा और खुशी का दिन है।"
सुरक्षा बलों के शौर्य को सलाम करते हुए उन्होंने आगे कहा, "मैं भारतीय सेना और इस अभियान में जुटी सभी खुफिया एजेंसियों को दिल से धन्यवाद देती हूं। मेरा अनुरोध है कि इस ऑपरेशन को तब तक जारी रखा जाए जब तक देश से आखिरी आतंकवादी का सफाया नहीं हो जाता।"
पिता के श्राद्ध के अगले दिन मिली मुठभेड़ की खबर
असवारी ने भावुक होते हुए साझा किया कि मुठभेड़ की खबर मिलने से ठीक एक दिन पहले उनके पिता का श्राद्ध (पुण्यतिथि) था। उन्होंने बताया कि कैसे उन्होंने अपने पिता की तस्वीर से बात करते हुए आतंकवाद के खिलाफ चल रहे अभियानों का जिक्र किया था। उन्होंने कहा, "कल मेरे पिता का श्राद्ध था और मैं उनकी तस्वीर से बात कर रही थी। मैंने उनसे कहा था कि आतंकवाद के खिलाफ जो भी अभियान चल रहे हैं, वे आप सभी के बलिदान की वजह से हैं। जिन 26 लोगों की जान गई, उनका बलिदान ही इन ऑपरेशनों की प्रेरणा है।" उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में 22 अप्रैल जैसा काला दिन कभी न दोहराया जाए और उन्होंने लोगों और सुरक्षा एजेंसियों से सतर्क बने रहने की अपील की।
'ऑपरेशन सिंदूर' और न्याय की लंबी कानूनी लड़ाई
जब उनसे यह पूछा गया कि क्या उनके परिवार को पूरा न्याय मिल गया है, तो असवारी ने इसे न्याय की दिशा में एक अहम पड़ाव बताया, हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पूरी कानूनी प्रक्रिया अभी बाकी है। उन्होंने कहा, "हां, मैं कहूंगी कि न्याय की दिशा में शुरुआत हुई है। जब 'ऑपरेशन सिंदूर' हुआ था, तब मुझे महसूस हुआ था कि प्रधानमंत्री ने एक बड़ा कदम उठाया है और पाकिस्तान को यह कड़ा संदेश दिया है कि भारत किसी भी रूप में आतंकवाद को बर्दाश्त नहीं करेगा।"
उन्होंने आगे कहा, "आज मुझे लगता है कि उन 26 परिवारों को भी राहत मिली होगी जिनके अपनों को छीना गया था। इस मामले का एक अध्याय अब समाप्त हुआ है।" हालांकि, कानूनी पहलुओं पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को अपनी जांच जारी रखनी चाहिए। उन्होंने कहा, "22 अप्रैल की घटना के संबंध में चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है। जब तक पूरा मामला बंद नहीं हो जाता, हम न्याय के रास्ते पर हैं। जब अदालत का अंतिम फैसला आएगा, तभी मैं मानूंगी कि सभी 26 परिवारों को पूर्ण न्याय मिला है।"
(भाषांतर: Ravi Pandey । इनपुट: ANI)
यह भी पढ़ें: दिल्ली दंगा साजिश: उमर खालिद और शरजील इमाम को हाईकोर्ट से झटका, जमानत अर्जी खारिज