निर्वाचन सदन मार्च के दौरान राहुल गांधी और विपक्षी सांसदों ने आकाशवाणी भवन में धरना दिया। पुलिस ने बीएनएसएस की धारा 163 के तहत कार्रवाई की।
नई दिल्ली। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व में मंगलवार को 'इंडिया' गठबंधन के सांसदों ने निर्वाचन सदन (चुनाव आयोग मुख्यालय) की ओर मार्च किया, जिसे पुलिस ने बैरिकेड्स लगाकर रोक दिया। इसके बाद विपक्षी सांसदों ने आकाशवाणी भवन परिसर में अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया है।
निर्वाचन सदन मार्च और पुलिस बैरिकेड्स
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने मंगलवार को स्पष्ट किया कि 'इंडिया' गठबंधन आकाशवाणी भवन परिसर के अंदर अपना विरोध प्रदर्शन जारी रखेगा। उन्होंने कहा कि यदि दिल्ली पुलिस को इस प्रदर्शन से असुविधा है, तो वह उनके विरोध के लिए कोई वैकल्पिक स्थान उपलब्ध कराए।
इससे पहले, 'इंडिया' ब्लॉक के सांसदों ने निर्वाचन सदन (भारतीय निर्वाचन आयोग का मुख्यालय) की ओर मार्च निकाला, जहां सुरक्षा बलों ने उन्हें बैरिकेड्स लगाकर रोक दिया। इसके बाद सांसदों ने चुनाव आयोग कार्यालय से लगभग 100 मीटर दूर स्थित आकाशवाणी परिसर के भीतर धरना शुरू कर दिया। राहुल गांधी समेत कई विपक्षी सांसदों को निर्वाचन आयोग मुख्यालय तक पहुंचने के लिए बैरिकेड्स फांदते हुए देखा गया।
राहुल गांधी और विपक्षी नेताओं का कड़ा रुख
आकाशवाणी भवन में पत्रकारों से बातचीत करते हुए राहुल गांधी ने कहा, "हमें यहां विरोध प्रदर्शन करने में कोई आपत्ति नहीं है... हम अपना प्रदर्शन जारी रखेंगे। यदि वे (दिल्ली पुलिस) हमारे यहां प्रदर्शन करने से असहज हैं, तो वे हमें विरोध के लिए कोई दूसरी जगह दे सकते हैं... संविधान हमें अपने लोकतांत्रिक अधिकारों के तहत विरोध दर्ज कराने की अनुमति देता है।"
इस मार्च में 'इंडिया' गठबंधन की कई पार्टियों के शीर्ष नेताओं ने हिस्सा लिया और मतदाता सूची संशोधन प्रक्रिया पर गहरी चिंता व्यक्त की। यह प्रदर्शन विपक्ष के राष्ट्रव्यापी 'लोकतंत्र बचाओ' अभियान का एक अहम हिस्सा है।
धारा 163 लागू और कांग्रेस कार्यकर्ताओं की हिरासत
इस विरोध प्रदर्शन के दौरान तनाव उस समय और बढ़ गया जब कांग्रेस कार्यकर्ताओं और 'इंडिया' गठबंधन के समर्थकों ने निर्वाचन सदन में जबरन प्रवेश करने की कोशिश की, जिससे सुरक्षाकर्मियों के साथ तीखी हाथापाई हुई। मार्च के बाद इलाके में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू होने के कारण पुलिस ने आकाशवाणी भवन में प्रवेश करने वाले कांग्रेस कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया।
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने भवन के बाहर एकत्र हुए भारतीय युवा कांग्रेस और एनएसयूआई कार्यकर्ताओं को क्षेत्र खाली करने का निर्देश देते हुए स्पष्ट किया कि वहां किसी भी प्रकार का जमावड़ा गैर-कानूनी है। चेतावनी के बावजूद सहयोग न करने पर कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेकर बसों में ले जाया गया।
चुनाव आयोग और केंद्र सरकार पर तीखा हमला
राहुल गांधी ने आयोग के अधिकारियों से मिलने से रोके जाने पर चुनाव आयोग और पुलिस प्रशासन पर तीखा निशाना साधा। उन्होंने कहा, "वहां से 300 विपक्षी सांसदों को हटा दिया गया, इसलिए मैं यहां आकर बैठ गया। हम केवल मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और अन्य चुनाव आयुक्तों से मिलना चाहते हैं। हम लोकसभा और राज्यसभा के सभी विपक्षी सांसद हैं और केवल उनसे बातचीत करना चाहते हैं। पता नहीं चुनाव आयोग हमसे बात क्यों नहीं करना चाहता। करोड़ों लोगों ने हमें वोट दिया है। हम केवल सवाल पूछना चाहते हैं, लेकिन वे जवाब देने से बच रहे हैं।"
केंद्र सरकार और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर सीधा हमला बोलते हुए उन्होंने आगे कहा, "देश में लोकतंत्र समाप्त हो चुका है। नरेंद्र मोदी जी, अमित शाह, मोहन भागवत और ज्ञानेश कुमार ने वोटों को खत्म कर दिया है। देश इस सच्चाई को समझ चुका है। एक तरह से नरेंद्र मोदी जी और अमित शाह जी ने देश को हाईजैक कर लिया है। हम देश के संविधान को बचाने की कोशिश कर रहे हैं।"
एसआईआर (SIR) विवाद और सुप्रीम कोर्ट का रुख
यह नया राजनीतिक विवाद द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट की पृष्ठभूमि में सामने आया है, जिसमें दावा किया गया था कि दो चुनाव आयुक्तों - सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने एसआईआर (SIR) प्रक्रिया के दौरान 14 आपत्तियां उठाई थीं। हालांकि, चुनाव आयोग का यह रुख रहा है कि सभी निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए थे।
इसके अलावा, विपक्षी नेताओं ने 'प्रारूप 6' (Form 6) में किए गए संशोधनों पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। इस बीच, सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को स्पष्ट किया कि उसने एसआईआर प्रक्रिया के दौरान नए मतदाताओं के नामांकन के लिए उपयोग किए जा रहे फॉर्म 6 के किसी भी संशोधित संस्करण को अपनी मंजूरी नहीं दी है।
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