भारतीय रिजर्व बैंक ने नॉन-बैंकिंग फाइनेंस कंपनियों (एनबीएफसी) के वर्गीकरण में महत्वपूर्ण बदलाव और पहचान के मानदंडों में बदलाव का प्रस्ताव दिया है।
मुंबई। भारतीय रिजर्व बैंक ने नॉन-बैंकिंग फाइनेंस कंपनियों (एनबीएफसी) के वर्गीकरण में महत्वपूर्ण बदलाव और पहचान के मानदंडों में बदलाव का प्रस्ताव दिया है। इसके तहत मौजूदा 'पैरामीट्रिक स्कोरिंग सिस्टम' को समाप्त कर सीधे संपत्ति के आकार (Asset-based) को पैमाना बनाया जाएगा। जिस NBFC की संपत्ति ₹1 लाख करोड़ से अधिक होगी, उसे ही 'अपर लेयर' माना जाएगा।
सरकारी NBFC को भी ‘अपर लेयर’ में लाने की तैयारी
केंद्रीय बैंक ने नॉन-बैंकिंग फाइनेंस कंपनियों के वर्गीकरण में बदलाव का प्रस्ताव देते हुए कहा कि यदि सार्वजनिक क्षेत्र की एनबीएफसी इस परिसंपत्ति सीमा को पार करती हैं तो उन्हें भी अपर लेयर में शामिल किया जाएगा। फिलहाल ऐसी इकाइयों को बुनियादी या मध्य स्तर में रखा जाता है। मसौदा निर्देशों पर एनबीएफसी, आम लोगों और अन्य सभी संबंधित हितधारकों से 4 मई तक प्रतिक्रिया मांगी गई है।
स्कोरिंग सिस्टम खत्म, एसेट साइज बनेगा आधार
आरबीआई ने अपर-लेयर नॉन-बैंकिंग फाइनेंस कंपनियों (NBFC-UL) की पहचान के मानदंडों में बदलाव का प्रस्ताव दिया। इस प्रस्ताव के अन्तर्गत अब जटिल स्कोरिंग के बजाय, ₹1 लाख करोड़ या उससे अधिक की संपत्ति (Asset Size) के आधार पर कंपनियों को वर्गीकृत किया जाएगा। यह बदलाव अधिक पारदर्शिता लाने और सरकारी NBFC को भी इसमें शामिल करने के लिए किया जा रहा है और इस सीमा की समीक्षा हर 5 साल में होगी।
एक समान नियम और जोखिम नियंत्रण पर फोकस
रिजर्व बैंक के इस प्रस्ताव का उद्देश्य सभी बड़ी NBFC (निजी और सरकारी) के लिए समान नियामक ढांचा (Regulatory Framework) सुनिश्चित करना है ताकि उनके नियमों और कार्यप्रणाली में एकरूपता लायी जा सके। साथ ही इन बदलावों का उद्देश्य प्रणालीगत जोखिम (Systemic Risk) को कम करना और बड़ी वित्तीय कंपनियों पर सख्त निगरानी रखना है। इस नई परिभाषा के दायरे में अब सरकारी (Public Sector) NBFC को भी शामिल किया जा रहा है।
अपर लेयर में शामिल प्रमुख कंपनियों की सूची
"बिजनेस स्टैंडर्ड" की रिपोर्ट के अनुसार मौजूदा समय में 15 एनबीएफसी को उच्च श्रेणी की एनबीएफसी के रूप में वर्गीकृत किया गया है और सार्वजनिक क्षेत्र की एनबीएफसी को शामिल करने से यह संख्या बढ़ सकती है। उच्च स्तर की एनबीएफसी में बजाज फाइनैंस, श्रीराम फाइनैंस, एलऐंडटी फाइनैंस, टाटा कैपिटल, एलआईसी हाउसिंग फाइनैंस, चोलामंडलम इन्वेस्टमेंट ऐंड फाइनैंस, महिंद्रा ऐंड महिंद्रा फाइनैंशियल सर्विसेज, आदित्य बिड़ला फाइनैंस, पिरामल कैपिटल ऐंड हाउसिंग फाइनैंस, मुथूट फाइनैंस, एचडीबी फाइनैंशियल सर्विसेज, सम्मान कैपिटल, बजाज हाउसिंग फाइनैंस, पीएनबी हाउसिंग फाइनैंस और टाटा संस शामिल हैं।
टाटा संस को लेकर RBI की पहले की टिप्पणी
जनवरी 2025 में उच्च स्तर की एनबीएफसी की सूची जारी करते हुए आरबीआई ने कहा था, 'उच्च स्तर की एनबीएफसी की सूची में टाटा संस को शामिल करना, उसके पंजीकरण खत्म करने के आवेदन के परिणाम पर कोई असर नहीं डालेगा, जिसकी अभी जांच चल रही है।'
लिस्टिंग विवाद के बीच आया नया प्रस्ताव
यह प्रस्ताव ऐसे समय में आया है जब टाटा संस की लिस्टिंग को लेकर जोरदार चर्चा चल रही है। आरबीआई के निर्देशों के बावजूद अपर-लेयर एनबीएफसी में शामिल टाटा संस ने अक्टूबर 2025 की समय-सीमा बीत जाने के बाद भी लिस्टिंग के लिए कदम नहीं उठाया है। मार्च 2025 में टाटा संस का संपत्ति आधार 1.75 लाख करोड़ रुपये था।
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