भारतीय झंडे वाले बड़े गैस कैरियर 'ग्रीन सान्वी' ने हर्मुज जल डमरूमध्य को शुक्रवार रात सुरक्षित पार किया। उसमें 46,650 मैट्रिक टन एलपीजी गैस भरी है।
नई दिल्ली। भारतीय झंडे वाले बड़े गैस कैरियर 'ग्रीन सान्वी' ने हर्मुज जल डमरूमध्य को शुक्रवार रात सुरक्षित पार किया। उसमें 46,650 मैट्रिक टन एलपीजी गैस भरी है। अधिकारियों ने यह जानकारी दी है। इससे पहले 28 मार्च को 47 हजार मीट्रिक टन एलपीजी की एक खेप कांडला के वाडिनार टर्मिनल पर पहुंची थी।
भारतीय नौसेना की सुरक्षा और कूटनीतिक प्रयास
इसके अलावा एक और जहाज 'एमटी जग वसंत' लंगर डाले एक अन्य जहाज को अपना कर्गो देने वाला है। एएनआई ने सूत्रों के हवाले से यह खबर दी है कि भारतीय नौसेना के जहाज मर्चेंट जहाजों के समर्थन के लिए तैनात हैं। भारतीय अधिकारी ईरानी अधिकारियों के साथ हर्मुज जलमार्ग से भारतीय जहाजों को गुजरने की अनुमति देने के लिए वार्ता की है।
सरकार ने तेल खेप चीन भेजे जाने की खबरों को बताया गलत
पेट्रोलियम मंत्रालय ने शनिवार को उन रिपोर्टों का खंडन किया, जिनमें यह आरोप लगाया गया था कि ईरान से भारत आ रहा कच्चे तेल का एक जहाज़ भुगतान संबंधी दिक्कतों के कारण चीन भेज दिया गया। मंत्रालय ने एक्स पर एक पोस्ट में जानकारी दी कि कच्चे तेल के आयात को लेकर भारत को भुगतान संबंधी किसी भी तरह की बाधा का सामना नहीं करना पड़ा है। मीडिया रिपोर्टों को खारिज करते हुए मंत्रालय ने कहा कि 'बिल ऑफ़ लैडिंग' (माल ढुलाई के दस्तावेज़) में अक्सर माल उतारने के संभावित बंदरगाह और मंज़िलें लिखी होती हैं। समुद्र में चल रहे जहाज़ व्यापार को बेहतर बनाने और काम में लचीलापन लाने के मकसद से यात्रा के बीच में ही अपनी मंज़िल बदल सकते हैं।
भुगतान विवाद की अफवाहों पर सफाई
मंत्रालय ने कहा कि, "ईरानी कच्चे तेल की खेप को भुगतान संबंधी दिक्कतों के चलते भारत के वाडिनार से चीन की ओर मोड़े जाने की खबरें और सोशल मीडिया पोस्ट तथ्यात्मक रूप से गलत हैं। भारत 40 से ज़्यादा देशों से कच्चा तेल आयात करता है। कंपनियों को व्यावसायिक हितों के आधार पर अलग-अलग स्रोतों और भौगोलिक क्षेत्रों से तेल खरीदने की पूरी आज़ादी है। मध्य-पूर्व में आपूर्ति में आई रुकावटों के बीच, भारतीय रिफाइनरियों ने अपनी कच्चे तेल की ज़रूरतें पूरी कर ली हैं। इसमें ईरान से होने वाली आपूर्ति भी शामिल है। जैसा कि कुछ अफ़वाहें फैलाई जा रही हैं, ईरानी कच्चे तेल के आयात में भुगतान संबंधी कोई बाधा नहीं है।"
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