मुंबई। पश्चिमी एशिया में जारी तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण भारतीय रूपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले शुक्रवार को 60 पैसे टूटकर 93.49 प्रति डॉलर के अब तक के सबसे निचले स्तर पर बंद हुआ।
मुंबई। पश्चिमी एशिया में जारी तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण भारतीय रूपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले शुक्रवार को 60 पैसे टूटकर 93.49 प्रति डॉलर के अब तक के सबसे निचले स्तर पर बंद हुआ। रूपये में आयी यह गिरावट देश के आयात बिल को महंगा करेगी और आने वाले दिनों में मुद्रास्फीति बढ़ा सकती है।
डॉलर की मजबूती से रुपये पर दबाव
अमेरिका-ईरान युद्ध की वजह से सिर्फ तेल और गैस ही नहीं, अब गिरता रूपया देश के समक्ष एक और बड़ा संकट बनकर उभरा है। विदेशी मुद्रा कारोबारियों के अनुसार, विदेशी निवेशकों द्वारा भारतीय बाजार से लगातार पूंजी निकालने और डॉलर की बढ़ती मजबूती के कारण घरेलू मुद्रा भारी दबाव में है। इसका नतीजा यह रहा कि भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले ऐतिहासिक रूप से टूटकर 93.49 के सर्वकालिक निचले स्तर (All-time low) पर पहुंच गया है।
इंटरबैंक मार्केट में भारी गिरावट
अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में शुक्रवार को रुपया 92.92 पर खुला, लेकिन जल्द ही यह गिरावट के साथ 93 का स्तर पार करते हुए 93.49 तक लुढ़क गया।
शेयर बाजार में तेजी, फिर भी चिंता बरकरार
भारतीय शेयर बाजार ने एक तरफ शानदार वापसी की है, लेकिन रुपये में ऐतिहासिक गिरावट ने देश के नीति निर्माताओं की चिंता बढ़ा दी है। शुक्रवार को सेंसेक्स 442.88 अंक (0.60 प्रतिशत) चढ़कर 74,650.12 पर और निफ्टी 146.65 अंक (0.64 प्रतिशत) की बढ़त के साथ 23,148.80 पर पहुंच गया।
एफआईआई की बिकवाली जारी
बाजार में विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की बिकवाली का दबाव लगातार बना हुआ है। शेयर बाजार के आंकड़ों के अनुसार, बृहस्पतिवार को एफआईआई ने 7,558.19 करोड़ रुपये के शेयर बेचे।
डॉलर इंडेक्स में बढ़त, रुपये को झटका
इस बीच, छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की स्थिति को दर्शाने वाला डॉलर सूचकांक 0.17 प्रतिशत की बढ़त के साथ 99.40 पर रहा, जिससे रुपये को संभलने का कोई मौका नहीं मिला।
आने वाले दिनों में और बढ़ सकता है दबाव
इससे पहले 16-17 मार्च को रुपया 92.40-92.47 के स्तर तक कमजोर हुआ था, लेकिन 20 मार्च को यह कमजोरी बढ़कर 93.49 के ऐतिहासिक स्तर तक पहुंच गई। डॉलर के महंगा होने की वजह से आने वाले दिनों में भारत के लिए कच्चा तेल, इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य जरूरी वस्तुएं आयात करना महंगा हो जाएगा, जिससे अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ेगा।
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