देश में कृत्रिम मेधा के बढ़ते प्रयोग के बीच इसके दुरूपयोग ने केन्द्र सरकार की चिंता बढ़ा दी है। खासकर डीपफेक और गलत सूचनाओं पर आधारित सामग्रियों की सोशल मीडिया पर आई बाढ़ को लेकर सरकार चिंतित है।
नई दिल्ली। देश में कृत्रिम मेधा (एआई) के बढ़ते प्रयोग के बीच इसके दुरूपयोग ने केन्द्र सरकार की चिंता बढ़ा दी है। खासकर डीपफेक और गलत सूचनाओं पर आधारित सामग्रियों की सोशल मीडिया पर आई बाढ़ को लेकर सरकार चिंतित है। इस पर रोक लगाने के लिए केन्द्र सरकार ने आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (एआई) से तैयार सामग्री के लिए सख्त खुलासा मानदंड लागू करने का निर्णय लिया है।
आईटी नियमों में संशोधन का प्रस्ताव
केन्द्रीय इलेक्ट्रॉनिक एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) से बनाई गई सामग्री के लिए सख्त खुलासा मानदंड लागू करने का प्रस्ताव दिया है। मंत्रालय ने सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) नियमों में संशोधन के मसौदे में इन बदलावों को शामिल किया है।
हर कंटेंट पर अनिवार्य पहचान चिन्ह
प्रस्ताव के तहत एआई से तैयार सामग्रियों पर अनिवार्य, लगातार और स्पष्ट रूप से दिखने वाला पहचान चिन्ह लगाना जरूरी होगा। अब ‘प्रमुख रूप से दिखाई देने’ की जगह पूरे वीडियो या विजुअल कंटेंट की अवधि के दौरान यह चिन्ह लगातार दिखाना होगा।
7 मई तक मांगी गई राय
इस प्रस्तावित मसौदे पर सरकार ने 7 मई 2026 तक आम लोगों और संबंधित पक्षों से टिप्पणियां आमंत्रित की हैं। इस बदलाव का उद्देश्य एआई के सही उपयोग को बढ़ावा देना और उसके दुरुपयोग से समाज को बचाना है।
मेटाडेटा और वॉटरमार्क होंगे जरूरी
नए मानदंडों के तहत एआई टूल डेवलपर्स और प्लेटफॉर्मों को सिंथेटिक कंटेंट में स्थायी ‘मेटाडेटा’ या ‘वॉटरमार्क’ लगाना होगा, ताकि कंटेंट का स्रोत आसानी से पहचाना जा सके।
गलत और भ्रामक कंटेंट पर सख्ती
नए नियमों में एआई से बनी अश्लील सामग्री, डीपफेक और किसी व्यक्ति की नकल करने वाले कंटेंट के खिलाफ सख्त कार्रवाई का प्रावधान रखा गया है।
नियम न मानने पर कानूनी सुरक्षा खत्म
यदि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म या अन्य मध्यवर्ती इन नियमों का पालन नहीं करते हैं, तो उन्हें मिलने वाली ‘सेफ हार्बर’ यानी कानूनी सुरक्षा समाप्त हो सकती है।
स्वतंत्र कंटेंट क्रिएटर्स भी दायरे में
संशोधित मसौदे में स्वतंत्र रूप से समाचार सामग्री तैयार करने वाले निर्माताओं को भी नियामकीय दायरे में लाने का प्रावधान है। साथ ही, उनके लिए सरकारी परामर्शों का पालन करना अनिवार्य किया जा सकता है।
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