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USCIRF ने की RSS पर प्रतिबंध की मांग

USCIRF ने की RSS पर प्रतिबंध की मांग, मोहन भागवत की अमेरिका यात्रा से पहले बढ़ा विवाद

USCIRF द्वारा RSS पर बैन की मांग और मोहन भागवत के अमेरिका दौरे पर विवाद। जानिए क्या है पूरा मामला और भारत की प्रतिक्रिया।

uscirf ने की rss पर प्रतिबंध की मांग मोहन भागवत की अमेरिका यात्रा से पहले बढ़ा विवाद

USCIRF Commissioner Asif Mahmood (File Photo) |

वॉशिंगटन (अमेरिका)। यूनाइटेड स्टेट्स कमीशन ऑन इंटरनेशनल रिलीजियस फ्रीडम (USCIRF) के अधिकारियों ने एक बार फिर उकसावे वाला कदम उठाया है। उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर प्रतिबंध लगाने की मांग करते हुए वॉशिंगटन से कहा है कि वह RSS नेताओं को कोई राजनयिक सम्मान न दे और न ही उनके साथ उच्च-स्तरीय बैठकें करे। इस मानवाधिकार संस्था के अध्यक्ष पाकिस्तानी-अमेरिकी डॉक्टर आसिफ महमूद हैं।

भागवत की 25 अगस्त से अमेरिका, कनाडा और UK यात्रा

सूत्रों के अनुसार, अमेरिकी सलाहकार संस्था की यह टिप्पणी RSS प्रमुख मोहन भागवत की अमेरिका, कनाडा और यूनाइटेड किंगडम की प्रस्तावित यात्रा से ठीक पहले आई है। यह यात्रा 25 अगस्त से शुरू होने वाली है। भागवत भारतीय मूल के लोगों (डायस्पोरा) से जुड़े विभिन्न स्थानीय संगठनों और संघों के निमंत्रण पर यह यात्रा कर रहे हैं। यह यात्रा ऐसे महत्वपूर्ण समय पर हो रही है जब RSS अपना शताब्दी वर्ष मना रहा है। अपनी यात्रा के दौरान, भागवत के भारतीय मूल के लोगों और स्थानीय संगठनों के प्रतिनिधियों से बातचीत करने की उम्मीद है।

प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर की प्रतिक्रिया

उनकी यात्रा के कार्यक्रम के बारे में और जानकारी बाद में विस्तृत जानकारी बाद में घोषित की जाएगी। RSS के प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, "राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक (प्रमुख) डॉ. मोहन भागवत विदेशी स्थानीय संघों और संगठनों के निमंत्रण पर 25 अगस्त 2026 से अमेरिका, कनाडा और UK की यात्रा करेंगे। यह यात्रा RSS के चल रहे शताब्दी वर्ष के दौरान हो रही है।"

USCIRF कमिश्नर ने RSS पर लगाए गंभीर आरोप

USCIRF ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कमिश्नर जीन मिल्स की टिप्पणी साझा की। मिल्स ने कहा कि USCIRF के अध्यक्ष आसिफ महमूद ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को RSS का सदस्य बताया है। RSS एक ऐसी मुख्य संस्था (अंब्रेला ऑर्गनाइजेशन) है जिसके सहयोगी समूहों पर ईसाइयों और मुसलमानों सहित धार्मिक अल्पसंख्यकों पर हमले करने के आरोप लगे हैं। पोस्ट में लिखा था, "भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सदस्य हैं। RSS एक भारतीय मुख्य संस्था है जिसके उप-समूहों ने ईसाइयों और मुसलमानों सहित धार्मिक अल्पसंख्यकों पर हमले किए हैं। अब RSS नेता मोहन भागवत अमेरिका की यात्रा करने की योजना बना रहे हैं।"

RSS नेताओं से हाई-लेवल बैठकें रोकने की अपील

मिल्स ने अपने बयान में यह भी कहा कि RSS नेताओं को उच्च-स्तरीय बैठकें या राजनयिक सम्मान नहीं मिलना चाहिए, भले ही वे भारत सरकार से जुड़े हों। मिल्स ने कहा, "RSS नेताओं को, भले ही वे भारत सरकार से जुड़े हों, हाई-लेवल मीटिंग या डिप्लोमैटिक शिष्टाचार का सम्मान नहीं मिलना चाहिए। इसके बजाय, अमेरिकी सरकार को उन RSS सदस्यों पर प्रतिबंध लगाने पर ध्यान देना चाहिए जो धार्मिक स्वतंत्रता (FoRB) के उल्लंघन के लिए जिम्मेदार पाए गए हैं।"

भारत ने USCIRF की रिपोर्ट को बताया पक्षपातपूर्ण

ये ताजा टिप्पणियां इस साल मार्च में जारी USCIRF की सालाना रिपोर्ट के बाद आई हैं। इस रिपोर्ट में कमीशन ने धार्मिक स्वतंत्रता के कथित उल्लंघन को लेकर भारत की आलोचना की थी और RSS और रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (RAW) समेत कुछ लोगों और संस्थाओं के खिलाफ 'टारगेटेड प्रतिबंध' लगाने का समर्थन किया था। भारत ने इस रिपोर्ट को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। USCIRF पर 'संदिग्ध स्रोतों और वैचारिक नैरेटिव' के आधार पर देश की तोड़-मरोड़कर पेश की गई और चुनिंदा तस्वीर दिखाने का आरोप लगाया।

MEA ने अमेरिका में हिंदू विरोधी घटनाओं का मुद्दा उठाया

पैनल के रुख का कड़ा विरोध करते हुए, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने 16 मार्च को एक बयान में कहा कि भारत की 'चुनिंदा आलोचना' करने के बजाय, USCIRF को अमेरिका में हिंदू मंदिरों में तोड़-फोड़ और हमलों की परेशान करने वाली घटनाओं, भारत को चुनिंदा रूप से निशाना बनाने, और अमेरिका में भारतीय मूल के लोगों के प्रति बढ़ती असहिष्णुता और डराने-धमकाने की घटनाओं पर गौर करना चाहिए, जिन पर गंभीरता से ध्यान देने की जरूरत है।
​(भाषांतर: Ravi Pandey । इनपुट: ANI)

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