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जानें 12 ज्योतिर्लिंगों की महिमा और स्तोत्र

12 ज्योतिर्लिंगों का धार्मिक महत्व, जानिए किस ज्योतिर्लिंग से जुड़ा है कौन-सा स्तोत्र

सनातन परंपरा में 12 ज्योतिर्लिंग भगवान शिव के दिव्य स्वरूप और उनकी महिमा के प्रमुख प्रतीक माने जाते हैं।

12 ज्योतिर्लिंगों का धार्मिक महत्व जानिए किस ज्योतिर्लिंग से जुड़ा है कौन-सा स्तोत्र

12 Jyotirlingas and Their Spiritual Significance: Know the Glory of Lord Shiva’s Sacred Shrines |

नई दिल्ली (भारत)। सनातन धर्म में भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंग अत्यंत पवित्र और पूजनीय माने जाते हैं। मान्यता है कि इन ज्योतिर्लिंगों का स्मरण, दर्शन और स्तुति करने से भक्तों को भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है। प्रत्येक ज्योतिर्लिंग का अपना अलग महत्व है और उनसे जुड़े संस्कृत स्तोत्र भगवान शिव के स्वरूप, महिमा और कल्याणकारी गुणों का वर्णन करते हैं।

सोमनाथ ज्योतिर्लिंग:

सौराष्ट्रदेशे विशदेऽतिरम्ये ज्योतिर्मयं चन्द्रकलावतंसम्।
भक्तिप्रदानाय कृपावतारं तं सोमनाथं शरणं प्रपद्ये॥

अर्थ:- मैं सौराष्ट्र की पवित्र भूमि में विराजमान, मस्तक पर चंद्रमा धारण करने वाले, भक्तों पर कृपा करने वाले और पापों का नाश करने वाले भगवान सोमनाथ की शरण ग्रहण करता हूँ।

मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग:

श्रीशैलशृङ्गे विबुधातिसङ्गे तुलाद्रितुङ्गेऽपि मुदा वसन्तम्।
तमर्जुनं मल्लिकपूर्वमेकं नमामि संसारसमुद्रसेतुम्॥

अर्थ:- मैं श्रीशैल पर्वत पर विराजमान भगवान मल्लिकार्जुन को प्रणाम करता हूँ, जो संसार रूपी सागर से पार लगाने वाले और सभी भक्तों का कल्याण करने वाले हैं।

महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग:

अवन्तिकायां विहितावतारं मुक्तिप्रदानाय च सज्जनानाम्।
अकालमृत्योः परिरक्षणार्थं वन्दे महाकालमहासुरेशम्॥

अर्थ:- मैं उज्जयिनी में विराजमान भगवान महाकाल को प्रणाम करता हूँ, जो भक्तों को मोक्ष प्रदान करते हैं और अकाल मृत्यु से रक्षा करते हैं।

ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग:

कावेरिकानर्मदयोः पवित्रे समागमे सज्जनतारणाय।
सदैव मान्धातृपुरे वसन्तं ओंकारमीशं शिवमेकमीडे॥

अर्थ:- मैं नर्मदा और कावेरी के पवित्र संगम क्षेत्र में विराजमान भगवान ओंकारेश्वर को प्रणाम करता हूँ, जो संसार से तारने वाले और कल्याणकारी शिव हैं।

केदारनाथ ज्योतिर्लिंग:

महाद्रिपार्श्वे च तटे रमन्तं सम्पूज्यमानं सततं मुनीन्द्रैः।
सुरासुरैर्यक्षमहोरगाद्यैः केदारमीशं शिवमेकमीडे॥

अर्थ:- मैं हिमालय की गोद में स्थित भगवान केदारनाथ को प्रणाम करता हूँ, जिनकी देवता, ऋषि, यक्ष और नाग भी पूजा करते हैं।

भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग:

यं डाकिनीशाकिनिकासमाजे निषेव्यमाणं पिशिताशनैश्च।
सदैव भीमादिपदप्रसिद्धं तं शङ्करं भक्तहितं नमामि॥

अर्थ:- मैं भगवान भीमाशंकर को प्रणाम करता हूँ, जो भक्तों का कल्याण करते हैं और जिनकी पूजा देवताओं सहित अनेक दिव्य शक्तियाँ करती हैं।

विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग:

सानन्दमानन्दवने वसन्तम् आनन्दकन्दं हतपापवृन्दम्।
वाराणसीनाथमनाथनाथं श्रीविश्वनाथं शरणं प्रपद्ये॥

अर्थ:- मैं आनंदवन (काशी) में विराजमान, आनंद के मूल स्रोत, पापों का नाश करने वाले, अनाथों के भी नाथ भगवान श्री विश्वनाथ की शरण में जाता हूँ।

त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग:

सह्याद्रिशीर्षे विमले वसन्तं गोदावरीतीरपवित्रदेशे।
यद्दर्शनात्पातकमाशु नाशं प्रयाति तं त्र्यम्बकमीशमीडे॥

अर्थ:- मैं सह्याद्रि पर्वत और गोदावरी के पावन तट पर स्थित भगवान त्र्यंबकेश्वर को प्रणाम करता हूँ, जिनके दर्शन मात्र से पाप नष्ट हो जाते हैं।

वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग: 

पूर्वोत्तरे प्रज्वलिकानिधाने सदा वसन्तं गिरिजासमेतम्।
सुरासुराराधितपादपद्मं श्रीवैद्यनाथं तमहं नमामि॥

अर्थ:- मैं माता पार्वती के साथ विराजमान भगवान वैद्यनाथ को प्रणाम करता हूँ, जिनके चरणों की देवता और असुर भी पूजा करते हैं तथा जो रोगों और दुखों का नाश करने वाले हैं।

नागेश्वर ज्योतिर्लिंग:

याम्ये सदङ्गे नगरेऽतिरम्ये विभूषिताङ्गं विविधैश्च भोगैः।
सद्भक्तिमुक्तिप्रदम् ईशमेकं श्रीनागनाथं शरणं प्रपद्ये॥

अर्थ:- मैं भगवान नागेश्वर की शरण लेता हूँ, जो भक्तों को भक्ति और मुक्ति दोनों प्रदान करते हैं तथा सभी का कल्याण करते हैं।

रामेश्वर ज्योतिर्लिंग:

सेतुबन्धे तु समुद्रतीरे श्रीरामचन्द्रेण प्रतिष्ठितं यत्।
रामेश्वराख्यं नियतं नमामि पापप्रणाशं परमेश्वरं तम्॥

अर्थ:- मैं भगवान राम द्वारा स्थापित रामेश्वर ज्योतिर्लिंग को प्रणाम करता हूँ, जो पापों का नाश करने वाले और परम कल्याणकारी भगवान शिव हैं।

घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग:

इलापुरे रम्यविशालकेऽस्मिन् समुल्लसन्तं जगदेकवन्द्यम्।
वन्दे महोदारतरस्वभावं घृष्णेश्वराख्यं शरणं प्रपद्ये॥

अर्थ:- मैं घृष्णेश्वर भगवान को प्रणाम करता हूँ, जो सभी के पूजनीय, अत्यंत उदार और भक्तों को अपनी शरण देने वाले हैं।

द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तुति मंत्र:

सौराष्ट्र सोमनाथं च श्रीशैले मल्लिकार्जुनम्, उज्जयिन्यां महाकालं ओमकारं ममलेश्वरम्।।
परल्यां वैद्यनाथं च डाकिन्यां भीमशंकरम्, सेतुबन्धे तु रामेशं नागेशं दारुकावने।। 
वारणस्यां तु विश्वेशं त्र्यम्बकं गौतमी तटे, हिमालय तु केदारं घुश्मेशं च शिवालये।।
एतानि ज्योतिर्लिंगानि सायं प्रातः पठेन्नरः, सप्तजन्मकृतं पापं स्मरणेन विनश्यति।। 

अर्थ:- गुजरात के सौराष्ट्र क्षेत्र में भगवान सोमनाथ, आंध्र प्रदेश के श्रीशैल पर्वत पर मल्लिकार्जुन, मध्य प्रदेश की उज्जैन नगरी में महाकाल और ओमकारेश्वर क्षेत्र में नर्मदा तट पर ओंकारेश्वर (अमलेश्वर) ज्योतिर्लिंग स्थित हैं। महाराष्ट्र के परली क्षेत्र में वैद्यनाथ, डाकिनी (महाराष्ट्र के पुणे के पास) क्षेत्र में भीमशंकर, तमिलनाडु के सेतुबंध क्षेत्र में रामेश्वरम और गुजरात में द्वारका के पास दारुकावन में नागेश्वर ज्योतिर्लिंग स्थित हैं। उत्तर प्रदेश की वाराणसी (काशी) नगरी में विश्वनाथ (विश्वेश), महाराष्ट्र में गोदावरी (गौतमी) नदी के तट पर त्र्यंबकेश्वर, उत्तराखंड में हिमालय पर केदारनाथ और महाराष्ट्र के वेरुल (औरंगाबाद/छत्रपति संभाजीनगर के पास) में घृष्णेश्वर (घुश्मेश) ज्योतिर्लिंग स्थित हैं। जो मनुष्य नित्य प्रातःकाल और संध्या के समय इन बारह ज्योतिर्लिंगों के नाम का पाठ करता है या स्मरण करता है, उसके पिछले सात जन्मों के किए हुए सभी पाप नष्ट हो जाते हैं। 

ज्योतिर्लिंग स्तोत्रों का श्रद्धापूर्वक पाठ करना अत्यंत शुभ 

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इन 12 ज्योतिर्लिंग स्तोत्रों का श्रद्धापूर्वक पाठ करना अत्यंत शुभ होता है। इससे भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है, मन को शांति मिलती है, पापों का क्षय होता है और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है। श्रावण मास में महाशिवरात्रि तथा सोमवार के दिन इन स्तोत्रों का पाठ विशेष रूप से शुभ और फलदायी माना जाता है।

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