गुवाहाटी, (असम)। स्थित कामाख्या मंदिर में आज से देश के सबसे प्रसिद्ध शक्ति पर्वों में से एक अंबुबाची मेला शुरू होने जा रहा है। पांच दिनों तक चलने वाले इस धार्मिक आयोजन में देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु, साधु-संत, तांत्रिक और पर्यटक मां के दर्शन और आशीर्वाद के लिए कामाख्या पहुंच रहे हैं।
आज होंगे मां के कपाट बंद
आज रात 9 बजकर 08 मिनट और 42 सेकेंड पर आर्द्रा नक्षत्र में विधिवत पूजा के बाद कामाख्या मंदिर के कपाट बंद कर दिए जाएंगे। इसके बाद अगले तीन दिन और तीन रात तक मंदिर के कपाट बंद ही रहेंगे और इस दौरान कोई भी मंदिर में प्रवेश नहीं कर सकता है। 26 जून को सूर्योदय के साथ ही मंदिर के कपाट फिर खोले जाएंगे, जिसके बाद श्रद्धालु दर्शन कर सकेंगे।
अन्य मेलों से अलग है अंबुबाची मेला
अंबुबाची मेले का धार्मिक महत्व अन्य मेलों से अलग माना जाता है। मान्यता है कि इस अवधि में मां कामाख्या वार्षिक रजस्वला अवस्था में रहती हैं। इसी कारण मंदिर के गर्भगृह के कपाट तीन दिनों के लिए बंद कर दिए जाते हैं। इस समय को देवी के विश्राम का समय माना जाता है। इस दौरान देवी की पूजा मंदिर के बाहर से ही की जाती है।
भारतीय संस्कृति में नारी शक्ति और सृजन की भावना का प्रतीक
यह मेला केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति में नारी शक्ति और सृजन की भावना का प्रतीक माना जाता है। जहां कई परंपराओं में मासिक धर्म को लेकर संकोच देखा जाता है, वहीं अंबुबाची पर्व प्रकृति और मातृशक्ति की इस प्रक्रिया को पवित्रता और सृजन के रूप में सम्मान देता है। यही कारण है, कि इस मेले को शक्ति उपासना की अनूठी परंपरा का प्रतीक माना जाता है।
विभिन्न अखाड़ों से पहुंचते हैं साधक
हर वर्ष अंबुबाची मेले में विभिन्न अखाड़ों के साधु, अघोरी, तांत्रिक साधक और सन्यासी बड़ी संख्या में पहुंचते हैं। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि इस दौरान मां कामाख्या की विशेष कृपा प्राप्त होती है और साधना का विशेष महत्व रहता है। मेले में आध्यात्मिक वातावरण के साथ-साथ स्थानीय संस्कृति, लोक परंपराओं और धार्मिक आयोजनों की भी अनूठी झलक देखने को मिलती है।
श्रद्धालुओं के लिए प्रशासन ने किया विषेश व्यवस्था
इस वर्ष भी प्रशासन ने श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए सुरक्षा, यातायात, चिकित्सा, पेयजल, स्वच्छता और ठहरने की विशेष व्यवस्था की है। मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं तथा भीड़ प्रबंधन के लिए विशेष गार्ड तैनात किए गए हैं।
पूरे भारत की धार्मिक पहचान है अंबुबाची मेला
अंबुबाची मेला पूर्वोत्तर भारत ही नहीं अपितु पूरे भारत के धार्मिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। हर साल लाखों श्रद्धालुओं की उपस्थिति इसे देश के सबसे बड़े आध्यात्मिक आयोजनों बनाती है। मंदिर प्रशासन और राज्य सरकार ने श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए व्यापक तैयारियां पूरी कर ली हैं।
यह भी पढ़ेंः 'दूषित मन वालों ने बुंदेलखंड को बदनाम किया', महोबा में गरजे सीएम योगी आदित्यनाथ