प्राइम न्यूज़ – एक कसम, राष्ट्र प्रथम
Breaking News

सूर्यदेव की पूजा की सरल विधि

भगवान सूर्य की पूजा कैसे करें? जानिए अर्घ्य देने की विधि और प्रमुख मंत्र

सूर्यदेव की उपासना में सुबह अर्घ्य देने, मंत्र जाप और सात्विक आचरण की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सूर्य पूजा आत्मबल, ऊर्जा, यश और आरोग्य की कामना से जुड़ी है।

भगवान सूर्य की पूजा कैसे करें जानिए अर्घ्य देने की विधि और प्रमुख मंत्र

How to Worship Lord Surya? Know the Rituals, Mantras and Significance | AI Image

नई दिल्ली (भारत)। हिंदू धर्म में भगवान सूर्य को प्रत्यक्ष देवता माना गया है। धार्मिक मान्यता के अनुसार सूर्यदेव की उपासना से आत्मविश्वास, ऊर्जा, यश और आरोग्य की कामना की जाती है। रविवार को सूर्यदेव की पूजा के लिए विशेष दिन माना जाता है, हालांकि प्रतिदिन सुबह सूर्य को अर्घ्य देने की भी परंपरा है।

सूर्यदेव को अर्घ्य देने की विधि

सुबह सूर्योदय के समय स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें। इसके बाद तांबे के पात्र में स्वच्छ जल भरें। श्रद्धानुसार इसमें लाल फूल या अक्षत डाल सकते हैं। पूर्व दिशा की ओर मुख करके दोनों हाथों से धीरे-धीरे सूर्यदेव को जल अर्पित करें। अर्घ्य देते समय सूर्यदेव का ध्यान करें और मंत्र का जाप करें। अर्घ्य के बाद हाथ जोड़कर अपनी मनोकामना और परिवार के मंगल की प्रार्थना करें।

सूर्यदेव के प्रमुख मंत्र

सूर्य मंत्र
“ॐ सूर्याय नमः।”

आदित्य मंत्र
“ॐ आदित्याय नमः।”

सूर्य बीज मंत्र
“ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः।”

इन मंत्रों का जाप श्रद्धा और एकाग्रता से किया जा सकता है। नियमित जाप की संख्या अपनी सुविधा और परंपरा के अनुसार रखी जा सकती है।

सूर्य गायत्री मंत्र

सूर्यदेव की उपासना में सूर्य गायत्री मंत्र का जाप भी किया जाता है—

“ॐ आदित्याय विद्महे दिवाकराय धीमहि।
तन्नः सूर्यः प्रचोदयात्॥”

रविवार को करें विशेष पूजा

रविवार को सुबह सूर्यदेव को अर्घ्य देने के बाद उनकी पूजा की जा सकती है। गुड़, गेहूं और लाल फूल का दान धार्मिक मान्यता में शुभ माना जाता है। अपनी सामर्थ्य के अनुसार किसी जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन या आवश्यक सामग्री भी दान कर सकते हैं।

सूर्यदेव की पूजा में इन बातों का रखें ध्यान

सूर्य को अर्घ्य देते समय पानी धीरे-धीरे अर्पित करें और सूर्य को सीधे निहारने से बचें, खासकर जब सूर्य तेज हो। पूजा के दौरान स्वच्छता और सात्विक आचरण का ध्यान रखें। धार्मिक मान्यता में सूर्य को पिता, आत्मबल, सम्मान और नेतृत्व का कारक माना गया है। इसलिए पिता एवं बड़े-बुजुर्गों का सम्मान करना और अपने कर्मों में ईमानदारी रखना भी सूर्योपासना की भावना से जोड़ा जाता है।

(Disclaimer: Prime News इस लेख की पुष्टि नहीं करता। यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं एवं उपलब्ध स्रोतों पर आधारित है।)

यह भी पढ़ेंः 30 अगस्त 2026 (रविवार) को भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि और उत्तराभाद्रपद नक्षत्र का संयोग

Related to this topic: