भगवान शिव की पूजा में श्रद्धा, पवित्रता और विधि का विशेष महत्व माना गया है, इसलिए पूजन सामग्री का चयन धार्मिक मान्यताओं के अनुसार करना शुभ माना जाता है।
नई दिल्ली (भारत)। भगवान शिव को भोलेनाथ कहा जाता है, क्योंकि वे अपने भक्तों की सच्ची श्रद्धा से ही प्रसन्न हो जाते हैं। फिर भी सनातन परंपरा में शिवलिंग पर कुछ विशेष पूजन सामग्री अर्पित करने का विशेष महत्व बताया गया है। साथ ही, कुछ ऐसी वस्तुएं भी हैं जिन्हें शिव पूजा में अर्पित नहीं किया जाता। आइए जानते हैं इनका धार्मिक महत्व।
भगवान शिव को क्या-क्या चढ़ाया जाता है?
जल: शिवलिंग पर जल चढ़ाना सबसे सरल और श्रेष्ठ पूजा माना जाता है। धार्मिक मान्यता है, कि इससे मन को शांति मिलती है और भगवान शिव प्रसन्न होते हैं।
गंगाजल: गंगाजल से अभिषेक करना अत्यंत शुभ माना जाता है। मान्यताओं के अनुसार माँ गंगा का जल सबसे पवित्र और शीतल होता है, इसलिए गंगाजल अर्पित करने का विशेष महत्व है।
बेलपत्र: बेलपत्र भगवान शिव को सबसे प्रिय माना जाता है। तीन पत्तियों वाला बेलपत्र भगवान शिव के त्रिनेत्र, त्रिशूल और त्रिगुण का प्रतीक माना जाता है।
धतूरा और आक के फूल-पत्ते: समुद्र मंथन मे विश पीने के बाद भगवान शिव के शरीर में विश का प्रभाव कम करने के लिए देवताओं ने उन्हें आक और धतूरा के फूल और पत्ते चढ़ाए थे। यही कारण है, की आज भी भगवान शिव को ये दोनों ही चीजें चढ़ाई जाती है।
भस्म: भस्म संसार की नश्वरता का प्रतीक मानी जाती है। भगवान शिव स्वयं चिताओं के भस्म से अपना श्रीनगर करते हैं, इसलिए पूजा में इसका विशेष महत्व है।
चंदन: चंदन अर्पित करने से शीतलता और पवित्रता का भाव प्रकट होता है। इसे शिवलिंग पर तिलक के रूप में लगाया जाता है।
पंचामृत: (दूध, दही, शहद, घी और शक्कर) इन पांच पदार्थों को मिलकर बने पंचामृत से किया गया अभिषेक अत्यंत शुभ माना जाता है। यह समृद्धि, सुख और मंगल का प्रतीक है।
फूल: कनेर, चमेली, मोगरा, मोरशिखा (जटाधारी) जैसे सुगंधित फूल भगवान शिव को अर्पित किए जाते हैं। ये पवित्रता और सरलता का प्रतीक माने जाते हैं।
फल और नैवेद्य: मौसमी फल, नारियल और सात्विक प्रसाद के साथ भगवान शिव को भाँग अर्पित करने की परंपरा है।
भगवान शिव को क्या नहीं चढ़ाना चाहिए?
केतकी (केवड़ा) का फूल: पुराणों के अनुसार केतकी के फूल को किसी भी देवी या देवता को नहीं छड़ाया जाता है, क्योंकि मत सीट ने इस फूल को असत्य का साथ देने के लिए श्राप दिया था। जिसके बाद से इस फूल के उपयोग किसी भी पूजा में नहीं किया जाता।
तुलसी दल: धार्मिक मान्यता के अनुसार शिवलिंग पर तुलसी अर्पित नहीं की जाती, क्योंकि भगवान शिव ने माता तुलसी के पति जालंधर का वध किया था।
टूटे या सूखे बेलपत्र: भगवान शिव को बेलपत्र सबसे अधिक प्रिय है, परंतु उन्हें हमेशा ताजे, स्वच्छ और बिना कटे-फटे बेलपत्र ही अर्पित करने चाहिए।
नारियल का पानी: नारियल को लक्ष्मी का प्रतीक माना गया है, इसलिए शिवलिंग पर इसका अभिषेक नहीं किया जाता।
शंख जल: शंखचूर्ण असुर के वध की कथा के कारण शिवलिंग पर शंख से जल नहीं चढ़ाया जाता।
पूजा करते समय रखें इन बातों का ध्यान
- पूजा से पहले स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें।
- श्रद्धा और शांत मन से "ॐ नमः शिवाय" मंत्र का जप करें।
- शिवलिंग पर अर्पित सामग्री को स्वच्छता और श्रद्धा के साथ चढ़ाएं।
- पूजा में दिखावे से अधिक सच्ची भक्ति और आस्था का महत्व है।
सच्ची श्रद्धा से प्रसन्न होते है भगवान शिव
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान शिव अत्यंत भोले और दयालु हैं। कहा जाता है कि वे महंगे चढ़ावे से नहीं, बल्कि भक्त की सच्ची श्रद्धा, सरलता और निष्कपट भाव से प्रसन्न होते हैं। इसलिए शिव पूजा में नियमों के साथ-साथ श्रद्धा और सद्भाव का विशेष महत्व माना गया है।
(Disclaimer: Prime News इस लेख की पुष्टि नहीं करता। यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं एवं उपलब्ध ग्रंथ स्रोतों पर आधारित है।)
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