हरियाली तीज के अवसर पर जयपुर में तीज माता की भव्य राजसी सवारी निकली, जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक उमड़े।
जयपुर (राजस्थान)। हरियाली तीज के अवसर पर जयपुर में तीज माता की भव्य और पारंपरिक राजसी सवारी निकाली गई। सवारी को देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक शहर के प्रमुख मार्गों पर जुटे। ऐतिहासिक जयपुर की गलियां ढोल-नगाड़ों, लोक संगीत और कलाकारों की प्रस्तुतियों से गूंज उठीं।
जयपुर की प्राचीन सांस्कृतिक परंपराओं का हिस्सा: तीज
तीज माता की सवारी को जयपुर की प्राचीन सांस्कृतिक परंपराओं का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। सुसज्जित पालकी में तीज माता की प्रतिमा को विराजमान कर सवारी निकाली जाती है। इसके साथ पारंपरिक लवाजमा, लोक कलाकार, ऊंट, घोड़े और हाथी राजसी जुलूस की शोभा बढ़ाते हैं।
जयपुर के सिटी पैलेस से निकलती है सवारी
सवारी सिटी पैलेस से निकलकर त्रिपोलिया बाजार और छोटी चौपड़ की ओर जाती है। रास्ते में बड़ी संख्या में लोग तीज माता के दर्शन और राजसी सवारी की भव्यता देखने के लिए मौजूद रहते हैं। महिलाएं पारंपरिक राजस्थानी परिधानों और आभूषणों में नजर आती हैं, वहीं लोक कलाकार नृत्य और संगीत के माध्यम से राजस्थान की समृद्ध लोक संस्कृति की झलक प्रस्तुत करते हैं।
राज परिवार के सदस्य सवारी की करते हैं शुरुआत
राजपरिवार के सदस्य सिटी पैलेस की 'जनानी ड्योढ़ी' में तीज माता (माता पार्वती) की विधिवत पूजा-अर्चना करते हैं। इसके बाद माता को कंधे पर उठाकर चांदी की पालकी तक पहुंचाते हैं, और त्रिपोलिया गेट पर शाही लवाजमे के साथ इस ऐतिहासिक परंपरा की शुरुआत करवाते हैं।
सिटी पैलेस में माता की विशेष पूजा के बाद चांदी की पालकी में निकलती है मूर्ति
उत्सव की शुरुआत से पहले सिटी पैलेस के अंदर राजघराने की महिलाओं और सदस्यों द्वारा माता की विशेष पूजा और आरती की जाती है। माता की मूर्ति को लगभग 400 किलो वजनी चांदी की पारंपरिक पालकी में विराजित किया जाता है, जिसे राजपरिवार की देखरेख में आगे बढ़ाया जाता है।
300 साल पुरानी परंपरा आज भी कायम, राजपरिवार ने जीवंत रखी जयपुर की विरासत
महाराजा सवाई जयसिंह द्वितीय के समय (करीब 300 साल पुरानी परंपरा) से चले आ रहे इस भव्य आयोजन को राजपरिवार आज भी जीवंत रखे हुए हैं, जिससे जयपुर की रियासती विरासत और संस्कृति पूरी दुनिया में पहचानी जाती है।
आस्था के साथ संस्कृति का उत्सव
हरियाली तीज भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित पर्व है। विवाहित महिलाएं सुखी दांपत्य जीवन और परिवार की खुशहाली की कामना के लिए व्रत और पूजा करती हैं। जयपुर की तीज माता की सवारी इस धार्मिक आस्था के साथ राजस्थान की कला, संगीत और राजसी विरासत को भी प्रदर्शित करती है।
दिखती है राजस्थान की अद्भुत परंपरा एवं कला
सिटी पैलेस से निकलने के बाद कर माता की पालकी को अपने कंधे पर ढोते हैं। माता की सवारी में भव्य जुलूस निकाला जाता है, जिसमें विभिन्न प्रकार के कर्तव्य और राजस्थानी परंपराओं को दिखाया जाता है। महिलाएं पारंपरिक घूमर नृत्य करती हैं। साथ ही राज परिवार की औरतें जयपुर की प्रसिद्ध झरोखे से तीज माता के दर्शन करने आती हैं।
माता देती हैं सुख समृद्धि का वरदान
तीज माता को सौभाग्य की देवी माना जाता है। माता अपने भक्तों को सुख समृद्धि का वरदान देती हैं। साथ ही मानता है कि तीज माता का व्रत करने से महिलाओं को अखंड सौभाग्य का वरदान प्राप्त होता है।
सवारी देखना देश विदेश से आते हैं पर्यटक
तीज माता की राजसी सवारी के दौरान जयपुर का ऐतिहासिक वातावरण उत्सव के रंग में नजर आता है। यही वजह है कि यह आयोजन स्थानीय लोगों के साथ देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों के लिए भी खास आकर्षण का केंद्र बना रहता है।
यह भी पढ़े: रीवा में स्वतंत्रता दिवस पर दर्दनाक हादसा, खदान के पानी में डूबे दो छात्र