मधुबनी का उगना महादेव मंदिर जहां भगवान शिव और महाकवि विद्यापति की अद्भुत कथा तथा स्वयंभू शिवलिंग का धार्मिक महत्व भक्तों को आकर्षित करता है।
Ugna Mahadev Temple Draws Devotees in Sawan, Steeped in the Legend of Lord Shiva and Vidyapati |
मधुबनी (बिहार)। सावन का महीना शुरू होते ही बिहार के प्रसिद्ध शिवधामों में श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ने लगती है। इन्हीं प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है मधुबनी जिले के पंडौल प्रखंड के भवानीपुर गांव में स्थित उगना महादेव मंदिर, जिसे उग्रनाथ मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। यह मंदिर अपनी धार्मिक मान्यताओं के साथ-साथ भगवान शिव और महाकवि विद्यापति की अद्भुत कथा के कारण विशेष पहचान रखता है।
भगवान और भक्त के अटूट प्रेम का उदाहरण
लोकमान्यता के अनुसार, महाकवि विद्यापति की अटूट भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने 'उगना' नामक एक साधारण सेवक का रूप धारण किया और लंबे समय तक उनकी सेवा की। यह प्रसंग मिथिला की सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है और आज भी श्रद्धालु इसे भगवान और भक्त के बीच अटूट प्रेम का सर्वोच्च उदाहरण मानते हैं।
भू-स्तर से 5 फीट नीचे है शिवलिंग
मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यहां स्थित स्वयंभू शिवलिंग है, जो जमीन से लगभग पांच फीट नीचे स्थापित है। भक्त सीढ़ियों से नीचे उतरकर जलाभिषेक और पूजा-अर्चना करते हैं। मान्यता है कि सच्चे मन से यहां पूजा करने पर भगवान शिव भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करते हैं।
मंदिर तक कैसे पहुंचे?
मधुबनी शहर से करीब 14 किलोमीटर, पंडौल रेलवे स्टेशन से लगभग 3 किलोमीटर और पटना से करीब 180 किलोमीटर दूर स्थित यह मंदिर वर्षभर श्रद्धालुओं के लिए खुला रहता है। हालांकि महाशिवरात्रि और सावन के दौरान यहां विशेष धार्मिक आयोजन होते हैं, जिनमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं।
मिथिला के पहचान का प्रतीक
धार्मिक महत्व के साथ-साथ उगना महादेव मंदिर मिथिला की ऐतिहासिक, साहित्यिक और सांस्कृतिक पहचान का भी प्रतीक है। यही वजह है कि हर साल देश के विभिन्न हिस्सों से श्रद्धालु और पर्यटक इस पावन धाम के दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
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