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'क्यूरियोसिटी' का 5000 सोल का शानदार सफर

मंगल पर 'Curiosity' के 5000 दिन: मीथेन का रहस्य, शुद्ध सल्फर की खोज और हैरान करने वाली उपलब्धियां

नासा के 'क्यूरियोसिटी' रोवर ने मंगल ग्रह पर 5000 सोल पूरे कर लिए हैं। जानिए इस ऐतिहासिक मिशन की हैरान करने वाली खोजें, मीथेन का रहस्य और जीवन से जुड़े सबूतों की पूरी कहानी।

मंगल पर curiosity के 5000 दिन मीथेन का रहस्य शुद्ध सल्फर की खोज और हैरान करने वाली उपलब्धियां

Curiosity Rover Completes 5000 Sols on Mars (File Photo) |

'क्यूरियोसिटी' रोवर (Curiosity Rover) सिर्फ एक मशीन नहीं है। मंगल ग्रह पर इसने पांच हजार सोल पूरे कर लिए। सोल (Sol) मंगल ग्रह पर समय मापने की इकाई यानी मंगल ग्रह का एक सौर दिवस (solar day) होता है। जब 'क्यूरियोसिटी' ने सफलतापूर्वक पांच हाजार सोल पूरे किए तो उस दिन सुनसान क्रेटर में कोई ताली बजाने वाला नहीं था, लेकिन यहां पृथ्वी पर वैज्ञानिकों ने तालियां बजाकर उसका स्वागत किया। बात ही ऐसी थी, इसने वैज्ञानिकों की उम्मीदों से परे जाकर हर किसी को चौंका दिया।

नासा ने इसका प्रक्षेपण 26 नवंबर 2011 को किया था। यह कीब 56 करोड़ किलेमीटर की दूरी तय करके यह मंगल ग्रह पर पहुंचा, जहां इसको "गेल क्रेटर" में सपलतापूर्वक लैंड कराया गया। इसकी यात्रा पृथ्वी दिवस के अनुसार सिर्फ दो साल के लिए निर्धारित की गई थी, लेकिन धूलभरी आंधी, ऊबड़-खाबड़ रास्तों को पार करते हुए इसकी अनवरत यात्रा ने नासा को इतना उत्साहित किया कि इसकी अवधि अनिश्चतकाल के लिए बढ़ा दी गई। 

मीथेन गैस की रहस्यमयी स्थिति

'क्यूरियोसिटी' ने अपनी खोज में पाया कि मंगल के वायुमंडल में मौजूद मीथेन गैस के स्तर में अचानक उछाल आ जाती है, फिर सहस्मयी तरीके से यह गायब हो जाती है। नासा के वैज्ञानिक अभी तक यह नहीं समझ पाए हैं कि यह मीथेन कहां से आती है और कहां चली जाती है। यह अब भी एक बड़ा सहस्य बना हुआ है। नासा लगातार इसको समझने की कोशिश कर रहा है, यह गुत्थी अभी तक अनसुलझी है। पृथ्वी पर मौजूद मीथेन का 95 प्रतिशत यहां उपस्थित अति सूक्ष्म जीवों द्वारा बनाई जाती है। हालांकि कुछ प्रतिशत प्राकृतिक रूप से बनती है। 

पीले सल्फर की खोज

वैज्ञानिकों को उम्मीद नहीं थी कि वहां शुद्ध सल्फर नहीं बल्कि उसके कुछ यौगिक मिल सकते हैं, लेकिन कार के आकार का यह रोवर जब एक पत्थर के ऊपर से गुजरा तो वह टूट गया, जिसमें शुद्ध पीले रंग के सल्फर के कण मिले। इस उपलब्धि ने वैज्ञानिकों को हैरान कर दिया। उनके लिए यह अप्रत्याशित था। उन्होंने सल्फर के सिर्फ यौगिक यानि सल्फेट मिलने की उम्मीद जताई था। हालांकि यह खोज बिल्कुल अनजाने में हुई, यदि वह पत्थर नहीं टूटता तो इसका पता नहीं चलता। 

रोवर के एल्युमीनियम से बने पहियों में छेद

मंगल की पथरीली और नुीली चट्टानों पर चलने से मजबूत एल्युमीनियम के पहियों में बने छेदों ने नासा के इंजीनियरों को हैरान कर दिया। वे समझ नहीं पा रहे हैं कि यह क्यों हुआ। इसके बाद इंजीनियरों को उसके चलने के तरीके में बदलाव करना पड़ा। साथ ही उसके साफ्टवेयर में भी बदलाव करना पड़ा। 

एलियन के दरवाजे का भ्रम

रोवर द्वारा आयताकार दरवाजे जैसी तस्वीर को लेकर पृथ्वी पर उसे एलियन का दरवाजा बताकर कई तरह के भ्रम फैला दिए गए। बाद में वैज्ञानिकों ने स्पष्ट किया कि यह सिर्फ चट्टानों में आई दरार भर है, लेकिन अभी भी इससे जुड़े वीडियो प्रसारित कर सनसनी फैलाई जा रही है। 

जीवन के बुनियादी तत्व की खोज

चट्टानों में ड्रिल करके जीवन के पनपने के लिए जरूरी तत्व कार्बन के अणु की खोज भी रोवर ने की। इसके अलावा कार्बन, हाइड्रोजन, आक्सीजन और नाइट्रोजन के अणुओं की भी खोज की है। इसने अब तक की अपनी यात्रा में 37 किलोमीटर की दूरी तय की है। इसने एक शार्प तिरछी पहाड़ी पर भी चढ़ाई की है। रास्ते में, इसने आस-पास की प्राचीन नदियों, पहाड़ों, झीलों, गड्ढों, क्रेटरों और अन्य चीजों की तस्वीरें भेजी हैं और लगातार भेज रहा है।
​(Published By: विजय नारायण सिंह)

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