भारत की स्टार भारोत्तोलक मीराबाई चानू ने बुधवार को यहां महिलाओं के 49 किलोग्राम वर्ग में रजत पदक जीतकर एशियाई खेलों में पदक के 12 साल के लंबे इंतजार खत्म किया।
नागोया: भारत की स्टार भारोत्तोलक मीराबाई चानू ने बुधवार को यहां महिलाओं के 49 किलोग्राम वर्ग में रजत पदक जीतकर एशियाई खेलों में पदक के 12 साल के लंबे इंतजार खत्म किया।
कुल 198 किलोग्राम वजन उठाया
तोक्यो ओलंपिक की रजत पदक विजेता मीराबाई ने स्नैच में 88 किलोग्राम और क्लीन एंड जर्क में 111 किलोग्राम भार के साथ कुल 198 किलोग्राम वजन उठाया। यह भारत का 1998 में कर्णम मल्लेश्वरी के कांस्य पदक जीतने के बाद एशियाई खेलों में भारोत्तोलन में पहला पदक है।
‘एशियाई खेलों में पदक जीतना सपना सच होने जैसा’
मीराबाई ने बाद में कहा, ‘‘एशियाई खेलों में पदक जीतना सपना सच होने जैसा है। मैं पिछले 12 वर्षों से, 2014 के एशियाई खेलों से ही इस पदक के लिए कोशिश कर रही थी। इस पदक के साथ मेरा जीवन पूर्ण हो गया है। अब मैं बहुत हल्का महसूस कर रही हूं। ये मेरे सपनों के एशियाई खेल हैं।’’
उत्तर कोरिया की री सोंग गम ने जीता स्वर्ण
उत्तर कोरिया की दो बार की विश्व चैंपियन री सोंग गम ने उम्मीदों पर खरे उतरते हुए कुल 215 किलोग्राम (94 और 121 किलोग्राम) वजन उठाकर स्वर्ण पदक जीता और एशियाई खेलों में खिताबी हैट्रिक पूरी की। उन्होंने कुल वजन में विश्व रिकॉर्ड बनाया। इंडोनेशिया की लुलुक डायना त्रिविजयाना ने 191 किलोग्राम (88 और 103 किलोग्राम) भार के साथ कांस्य पदक हासिल किया।
एशियाई खेलों में पहली बार मिला पदक
मीराबाई ने अभी तक ओलंपिक से लेकर विश्व चैंपियनशिप में भी पदक जीते थे लेकिन वह एशियाई खेलों में यह उपलब्धि हासिल नहीं कर पाई थी। मीराबाई ने ओलंपिक में रजत पदक, विश्व चैंपियनशिप में एक स्वर्ण सहित तीन पदक तथा राष्ट्रमंडल खेलों और राष्ट्रमंडल चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक के अलावा एशियाई चैंपियनशिप में कांस्य पदक भी जीता है।
2014 में नौवें स्थान पर रही थीं
मीराबाई ने 2014 में अपने पहले एशियाई खेलों में नौवां स्थान हासिल किया था। वह पीठ की चोट के कारण 2018 के एशियाई खेलों में भाग नहीं ले पाई थी जबकि पिछले एशियाई खेलों में वह चौथे स्थान पर रही थी। अपनी मां के उपहार में दिए गए ओलंपिक रिंग की तरह के सोने के झुमके पहने और बालों में तिरंगे का रिबन लगाए मीराबाई पदक जीतने के दृढ़ लक्ष्य के साथ मंच पर पहुंची।
स्नैच में 87 किलोग्राम तक उठाया भार
मीराबाई ने स्नैच में 83 किलोग्राम के साथ शुरुआत की और फिर अपने अगले दो प्रयासों में 85 किलोग्राम और 87 किलोग्राम वजन उठाकर प्रतियोगिता के पहले चरण में तीसरा स्थान हासिल किया। इसके बाद उन्होंने क्लीन एंड जर्क में 111 किलोग्राम का भार उठाकर एशियाई खेलों में अपना पहला पदक जीता। रजत पदक पक्का होने के बाद उन्होंने अपना आखिरी प्रयास नहीं लिया।
‘इस बार मैंने अपना सपना पूरा कर लिया’
उन्होंने कहा, ‘‘जब से मैंने भारोत्तोलन में कदम रखा तब से मेरा सपना एशियाई खेलों में पदक जीतना रहा है। एशियाई खेलों से पहले या उसके दौरान कुछ न कुछ होता रहा, लेकिन इस बार मैंने अपना सपना पूरा कर लिया।’’ मीराबाई यह पदक जीतने के लिए इतनी प्रतिबद्ध थी कि पिछले महीने राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीतने के अगले दिन बाद ही वह अभ्यास में लग गई थी। अब उनका लक्ष्य 2028 में होने वाले ओलंपिक खेलों में पदक जीतना होगा।
लॉस एंजिलिस ओलंपिक को लेकर अभी रणनीति तय नहीं
उन्होंने कहा, ‘‘मैंने अभी तक लॉस एंजिलिस ओलंपिक के लिए अपनी रणनीति तय नहीं की है। क्वालिफिकेशन प्रक्रिया दिसंबर में शुरू होगी। मैं कुछ समय तक इस पदक का जश्न मनाऊंगी और फिर फैसला करूंगी।’ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मीराबाई को उनकी उपलब्धि पर बधाई देते हुए कहा कि उनके ‘दृढ़ संकल्प और निरंतर अच्छा प्रदर्शन’ करने से देश की युवा पीढ़ी को प्रेरणा मिलेगी। मोदी ने कहा, ‘‘मीराबाई चानू के लिए एक विशेष रजत पदक। भारोत्तोलन में महिला 49 किलोग्राम वर्ग में पदक जीतने पर उन्हें हार्दिक बधाई। उनका दृढ़ संकल्प और निरंतरता पूरे देश को प्रेरित करती है। भारत को उन पर गर्व है। उन्हें भविष्य के लिए शुभकामनाएं।’’
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