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दिल्ली प्रदर्शन में गिरफ्तार 17 को जमानत मिली

दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान गिरफ्तार 17 छात्रों-पत्रकारों को जमानत

दिल्ली की एक अदालत ने सोमवार रात मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के विरोध प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए कई छात्रों और स्वतंत्र पत्रकारों को जमानत दे दी।

 दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान गिरफ्तार 17 छात्रों-पत्रकारों को जमानत

17 Students, Journalists Arrested in Delhi Protest Get Bail |

नई दिल्ली [भारत]: दिल्ली की एक अदालत ने सोमवार रात मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के विरोध प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए कई छात्रों और स्वतंत्र पत्रकारों को जमानत दे दी। अदालत ने जेल अधिकारियों को निर्देश दिया कि घायलों को आवश्यक चिकित्सा उपचार उपलब्ध कराया जाए।

17 आरोपियों को अदालत ने दी जमानत

पटियाला हाउस कोर्ट के न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी (जेएमएफसी) अनिमेष कुमार ने रात 9 बजे से 9:25 बजे के बीच चार अलग-अलग आदेशों में संसद स्ट्रीट पुलिस स्टेशन में दर्ज एफआईआर के संबंध में अदालत में पेश किए गए 17 आरोपियों को जमानत दी। अदालत ने निर्देश दिया कि आरोपियों को समान राशि के एक जमानती के साथ व्यक्तिगत मुचलके पर कुछ शर्तों के अधीन जमानत पर रिहा किया जाए। अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि यदि किसी अन्य मामले में उनकी हिरासत की आवश्यकता नहीं है तो उन्हें तत्काल रिहा कर दिया जाए।

घायलों को इलाज मुहैया कराने के निर्देश

अदालत ने विशेष रूप से जेल अधीक्षक को निर्देश दिया कि चिकित्सा अधिकारी की सलाह के अनुसार घायल आरोपियों को आवश्यक चिकित्सा उपचार उपलब्ध कराया जाए। आरोपियों को निर्देश दिया गया है कि वे मामले के तथ्यों से परिचित किसी भी व्यक्ति को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से प्रेरित, धमका या प्रभावित न करें और न ही सबूतों के साथ छेड़छाड़ करें। उन्हें जमानत पर रहते हुए किसी भी प्रकार का अपराध करने से भी रोका गया है।

 जमानत के लिए रखी गईं ये शर्तें

जमानत की शर्तों के तहत, आरोपियों को अपने सही स्थायी और आवासीय पते और सक्रिय मोबाइल नंबर उपलब्ध कराने, उन्हें चालू रखने और पते में किसी भी परिवर्तन की स्थिति में न्यायालय को सूचित करने का निर्देश दिया गया है। उन्हें सुनवाई की प्रत्येक तिथि पर संबंधित न्यायालय के समक्ष नियमित रूप से उपस्थित होना होगा और न्यायालय की पूर्व अनुमति के बिना देश नहीं छोड़ सकते। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि जमानत की किसी भी शर्त के उल्लंघन की स्थिति में, जांच एजेंसी जमानत रद्द करने की मांग करने के लिए स्वतंत्र होगी।

इन धाराओं में दर्ज हुई थी एफआईआर

एफआईआर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 223(ए), 221, 132, 190, 191(2) और 3(5) तथा सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने से रोकने वाले अधिनियम की धारा 3 के तहत दर्ज की गई थी। पुलिस ने आरोप लगाया था कि आरोपी गैरकानूनी सभा का हिस्सा थे, उन्होंने सार्वजनिक स्थान को अवरुद्ध या बाधित किया, पुलिसकर्मियों के साथ मारपीट की और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया।

 पुलिस ने मांगी थी 14 दिनों की न्यायिक हिरासत

जांच अधिकारी ने 14 दिनों की न्यायिक हिरासत की मांग करते हुए कहा था कि आरोपी आगे अपराध कर सकते हैं या जांच में बाधा डाल सकते हैं। बचाव पक्ष ने इस दलील का विरोध करते हुए कहा कि आरोपी युवा थे और उनमें से कई छात्र थे जो असहमति और विरोध करने के अपने लोकतांत्रिक अधिकार का प्रयोग कर रहे थे। वकील ने यह भी कहा कि गिरफ्तारी के आधारों में आरोपियों के खिलाफ किसी भी व्यक्तिगत भूमिका का उल्लेख नहीं किया गया था। बचाव पक्ष ने आगे बताया कि पुलिस के दावे के अनुसार लगभग 50 लोग विरोध प्रदर्शन कर रहे थे, जबकि केवल 17 लोगों को गिरफ्तार किया गया था। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि कथित घटना का कोई सीसीटीवी फुटेज पेश नहीं किया गया था। यह भी कहा गया कि कुछ आरोपियों को चोटें आई थीं और घटना के तुरंत बाद उनकी चिकित्सा जांच नहीं की गई थी।

 शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के अधिकार पर अदालत की टिप्पणी

अदालत ने पाया कि आरोपियों के खिलाफ आरोप गंभीर थे और एक पुलिस अधिकारी को कथित तौर पर चोटें आई थीं। हालांकि, अदालत ने यह भी कहा कि शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के अधिकार पर विवाद नहीं किया जा सकता, जबकि ड्यूटी पर तैनात पुलिस अधिकारियों पर हमला करना एक गंभीर मामला है। अदालत ने यह भी कहा कि धारा 132 बीएनएस के तहत अपराध को छोड़कर, अन्य सभी अपराध जमानती थे। अदालत ने यह भी पाया कि आरोपी आदतन अपराधी नहीं लगते और उनका पूरा करियर उनके सामने था। तथ्यों और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए, अदालत ने उन्हें कुछ शर्तों के साथ जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया।

 6 अक्टूबर को संबंधित अदालत में पेश करने का आदेश

अदालत ने यह भी आदेश दिया कि आरोपियों को 6 अक्टूबर को संबंधित अदालत में पेश किया जाए और निर्देश दिया कि आदेश की एक प्रति सूचना और आवश्यक अनुपालन के लिए नई दिल्ली के पुलिस उपायुक्त को भेजी जाए।

(एएनआई)

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