80 वर्ष की आयु में भी हिंदुंबी कौरम कक्काड़ा कवरत्ती स्थित सरकारी इंदिरा गांधी अस्पताल में अपनी ड्यूटी निभा रही हैं और पांच दशकों से अधिक के अपने नर्सिंग करियर को आगे बढ़ा रही हैं।
नई दिल्ली [भारत]: 80 वर्ष की आयु में भी हिंदुंबी कौरम कक्काड़ा कवरत्ती स्थित सरकारी इंदिरा गांधी अस्पताल में अपनी ड्यूटी निभा रही हैं और पांच दशकों से अधिक के अपने नर्सिंग करियर को आगे बढ़ा रही हैं। भारत के सबसे भौगोलिक रूप से पृथक क्षेत्रों में से एक में रोगी देखभाल के प्रति उनके आजीवन समर्पण ने उन्हें एस्टर गार्डियंस ग्लोबल नर्सिंग अवार्ड 2026 के शीर्ष 10 फाइनलिस्टों में स्थान दिलाया है। उनका चयन 214 देशों और अर्थव्यवस्थाओं से आए 1.34 लाख से अधिक पंजीकरणों में से किया गया है।
53 वर्षों में 20 हजार से अधिक सर्जरी में दिया योगदान
ऑपरेशन थिएटर में प्रशिक्षित नर्स हिंदुंबी ने लक्षद्वीप के लोगों की सेवा में 53 वर्षों से अधिक समय बिताया है। सीमित बुनियादी ढांचे, द्वीपों के बीच कठिन संपर्क और संसाधनों की कमी जैसी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में काम करते हुए उन्होंने 20,000 से अधिक सर्जरी और आपातकालीन मामलों में सहायता प्रदान की है।
केरोसिन लैम्प की रोशनी में भी किया काम
उनकी नर्सिंग यात्रा उस समय शुरू हुई जब द्वीपों में स्वास्थ्य सुविधाएं बेहद सीमित थीं। आपातकालीन परिवहन अक्सर मछली पकड़ने वाली नावों और नौसेना के जहाजों पर निर्भर करता था, जबकि दवाएं और जरूरी सामग्री कोच्चि से मंगाई जाती थीं। कई बार बिजली कटौती के दौरान सर्जरी और आपातकालीन प्रक्रियाएं मिट्टी के तेल के लैंप की रोशनी में करनी पड़ती थीं।
समुद्र पार कर बचाई मां और नवजात की जान
उन्हें याद आने वाले कई मामलों में से एक अगाटी द्वीप का प्रसूति आपातकाल है, जहां एक महिला को अत्यधिक रक्तस्राव हो रहा था। स्थानीय स्तर पर उन्नत चिकित्सा सुविधा उपलब्ध न होने के कारण हिंदुंबी और उनकी टीम ने मरीज को मछली पकड़ने वाली नाव से कवरत्ती पहुंचाया और रास्ते में रक्त आधान भी किया। सफल सीज़ेरियन ऑपरेशन के बाद मां और बच्चा दोनों सुरक्षित बच गए।
मानसून में नौसेना जहाज से पहुंचीं मरीज के पास
एक अन्य घटना में मानसून के दौरान उन्होंने नौसेना के जहाज से रातभर की यात्रा कर अमिनी द्वीप पहुंचकर एक गर्भवती महिला की सहायता की। सीमित संसाधनों के बावजूद टीम ने फोर्सेप्स डिलीवरी कर मां और बच्चे दोनों को सुरक्षित रखा।
स्वास्थ्य जागरूकता अभियानों में भी निभाई अहम भूमिका
अस्पताल की चारदीवारी से बाहर भी हिंदुंबी ने लक्षद्वीप में सामुदायिक स्वास्थ्य अभियानों में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने घर-घर जाकर टीकाकरण, स्वच्छता, संस्थागत प्रसव और निवारक स्वास्थ्य देखभाल को बढ़ावा दिया। वह हैजा नियंत्रण अभियान, 2004 की सुनामी और कोविड-19 महामारी के दौरान भी सक्रिय रहीं।
सेवानिवृत्ति के बाद भी जारी रखी सेवा
60 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्त होने के बावजूद हिंदुंबी मात्र तीन महीने बाद संविदा नर्स के रूप में वापस सेवा में लौट आईं। आज भी वह सक्रिय रूप से मरीजों की देखभाल कर रही हैं। लक्षद्वीप के कई लोग उन्हें उस नर्स के रूप में पहचानते हैं जिन्होंने उनके जन्म में सहायता की थी या कठिन समय में उनके परिवार का साथ दिया था।
फ्लोरेंस नाइटिंगेल पुरस्कार से भी हो चुकी हैं सम्मानित
वर्ष 2023 में भारत के राष्ट्रपति ने उन्हें फ्लोरेंस नाइटिंगेल पुरस्कार से सम्मानित किया था। अब एस्टर गार्डियंस ग्लोबल नर्सिंग अवार्ड 2026 के शीर्ष 10 फाइनलिस्टों में शामिल होकर उन्होंने वैश्विक स्तर पर पहचान हासिल की है।
नर्सों को बताया स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़
एस्टर डीएम हेल्थकेयर के संस्थापक अध्यक्ष आज़ाद मूपेन ने कहा कि नर्सें केवल मरीजों की देखभाल ही नहीं करतीं, बल्कि नवाचार को बढ़ावा देने और स्वास्थ्य क्षेत्र की नई पीढ़ी को मार्गदर्शन देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उन्होंने कहा कि इस वर्ष 214 देशों और अर्थव्यवस्थाओं से मिले 1.34 लाख से अधिक पंजीकरण नर्सों के योगदान और प्रभाव को दर्शाते हैं।
जुलाई में घोषित होगा विजेता
फाइनलिस्टों का चयन बहु-स्तरीय मूल्यांकन प्रक्रिया के जरिए किया गया। शीर्ष 10 फाइनलिस्टों में से एक को 2.5 लाख अमेरिकी डॉलर की पुरस्कार राशि के साथ ग्रैंड टाइटल प्रदान किया जाएगा। विजेता की घोषणा जुलाई 2026 में भारत में आयोजित होने वाले भव्य समारोह में की जाएगी।
स्वतंत्रता सेनानी परिवार से हैं हिंदुंबी
कवरत्ती में जन्मी और पली-बढ़ी हिंदुंबी ऐसे परिवार से आती हैं जिसकी जड़ें सेवा और देशभक्ति से जुड़ी हैं। उनके पिता स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े थे और महात्मा गांधी के साथ दांडी मार्च में शामिल हुए थे। हिंदुंबी अपने परिवार के सहयोग को अपने लंबे और चुनौतीपूर्ण करियर की सबसे बड़ी ताकत मानती हैं।
'नर्सिंग एक महान कार्य है'
अपने पेशे के बारे में हिंदुंबी कहती हैं, "नर्सिंग एक महान कार्य है। हम बिस्तर पर पड़े मरीजों की देखभाल ऐसे करते हैं जैसे वे हमारे अपने माता-पिता हों। इस पेशे में सहानुभूति और गरिमा दोनों हैं।"
(एएनआई)
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