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मृत्यु प्रमाण पत्र में 9 महीने की देरी

मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए 9 महीने इंतजार, लोक अदालत ने नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल

मृत्यु प्रमाण पत्र में नौ माह की देरी पर स्थायी लोक अदालत ने नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए और जिम्मेदार कर्मचारी की जांच व कार्रवाई के आदेश दिए।

मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए 9 महीने इंतजार लोक अदालत ने नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल

9-Month Delay in Death Certificate Issuance |

बांदा {उत्तर प्रदेश}: मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने के लिए सभी जरूरी औपचारिकताएं पूरी करने के बावजूद करीब नौ माह तक प्रमाण पत्र रोके रखने के मामले में स्थायी लोक अदालत ने नगर पालिका परिषद की कार्यप्रणाली पर गंभीर टिप्पणी की है। अदालत ने वाद स्वीकार करते हुए विभागीय लापरवाही के लिए जिम्मेदार कर्मचारी को चिन्हित कर समुचित जांच के बाद विधिक कार्रवाई सुनिश्चित करने के आदेश दिए हैं।

21 अगस्त 2025 को किया था आवेदन

कैलाशपुरी निवासी अधिवक्ता गिरजेश कुमार पांडेय ने अपनी मां स्व. रामरती देवी पांडेय की 22 जून 2008 को हुई मृत्यु का प्रमाण पत्र जारी कराने के लिए 21 अगस्त 2025 को नगर पालिका परिषद में आवेदन किया था। आवेदन के साथ अपना शपथपत्र, दो गवाहों के शपथपत्र, आधार कार्ड और 10 रुपये विलंब शुल्क का चालान भी जमा किया गया था। नगर पालिका के सफाई नायक सहित संबंधित कर्मचारियों से मौके का सत्यापन भी कराया गया। प्रमाण पत्र जारी न होने पर याची ने 29 अक्तूबर 2025 को स्थायी लोक अदालत में वाद संख्या 67/2025 दाखिल किया।

नगर पालिका ने बताई थी दस्तावेजों की आपत्ति

सुनवाई के दौरान नगर पालिका की ओर से पहले शपथपत्रों में ओवरराइटिंग और व्हाइटनर होने तथा मृत्यु का अभिलेखीय साक्ष्य उपलब्ध न होने की बात कही गई थी। बाद में 16 मई 2026 को नगर पालिका ने उपजिलाधिकारी को भेजी गई अपनी आख्या में आवेदक द्वारा मृत्यु तिथि का शपथपत्र और दो गवाहों के शपथपत्र प्रस्तुत किए जाने, 10 रुपये शुल्क जमा होने तथा सफाई नायक, जन्म-मृत्यु लिपिक और सफाई निरीक्षक की जांच आख्या संलग्न होने की जानकारी दी। साथ ही प्रमाण पत्र जारी करने की संस्तुति भी की गई। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने की याचिका की मुख्य मांग पूरी हो चुकी है। हालांकि प्रमाण पत्र जारी करने में करीब नौ माह तक हुई देरी को सेवा में कमी माना गया। अदालत ने अनैतिक धन की मांग के आरोप को मौखिक आरोप बताते हुए इस संबंध में अलग से प्रमाण न होने का उल्लेख किया।

विभागीय लापरवाही पर जांच के आदेश

स्थायी लोक अदालत के अध्यक्ष विवेक कुमार गुप्ता, वरिष्ठ सदस्य डॉ. ब्रह्मदत्त सिंह और सदस्य शिवांगी शुक्ला की पीठ ने वाद स्वीकार करते हुए अधिशाषी अधिकारी नगर पालिका परिषद बांदा को जांच के आदेश दिए हैं। अदालत ने विभागीय लापरवाही के लिए जिम्मेदार कर्मचारी को चिन्हित कर समुचित जांच के बाद विधिक कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा है।

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