Lucknow : यूपी में प्राइवेट प्रैक्टिस में लिप्त होने और भ्रष्टाचार के मामलों में स्वास्थ्य विभाग ने 5 बड़े अफसरों के खिलाफ कार्रवाई की है। स्वास्थ्य विभाग ने बिलों में भुगतान और टेंडर में गड़बड़ी के ..
Lucknow : यूपी में प्राइवेट प्रैक्टिस में लिप्त होने और भ्रष्टाचार के मामलों में स्वास्थ्य विभाग ने 5 बड़े अफसरों के खिलाफ कार्रवाई की है। स्वास्थ्य विभाग ने बिलों में भुगतान और टेंडर में गड़बड़ी के आरोपों की जांच के बाद दोषी पाये गये इन चिकित्सा अधिकारियों का वेतन रोकने और वसूली का आदेश दिया है। यूपी के डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक के निर्देश पर यह कार्रवाई की गयी है।
स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी के अनुसार मीरजापुर के पूर्व मुख्य चिकित्साधिकारी और वर्तमान में मेरठ के जिला चिकित्सालय में वरिष्ठ परामर्शदाता के पद पर तैनात डॉ.राजीव सिंघल भी कार्रवाई की जद में आने वालों में प्रमुख हैंं। उन पर नियम विरुद्ध तरीके से बिलों के भुगतान की शिकायत थी। जांच में डॉ. राजीव दोषी पाए गए। लिहाजा उनकी एक वेतनवृद्धि रोक दी गई। साथ ही उनसे 4 लाख 35 हजार की वसूली करने के निर्देश जारी किए गए हैं।
प्रदेश भर में नर्सों के तबादले में अनियमितताओं में गड़बड़ी की शिकायत मिली थी। मामले की जांच कराई गई। जांच में उस वक्त निदेशक "चिकित्सा उपचार" के पद की जिम्मेदारी निभा रहे डॉ. पीएम श्रीवास्तव को दोषी पाया गया। डॉ. पीएम श्रीवास्तव सेवानिवृत्त हो चुके हैं। डॉ.पीएम श्रीवास्तव की पेंशन से तीन साल तक 10% के हिसाब से कटौती के आदेश दिए गए हैं।
प्रयागराज के राजकीय मेडिकल कॉलेज में नेफ्रोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. अरविन्द गुप्ता पर प्राइवेट प्रैक्टिस के आरोप लगे हैं। जांच में आरोप सही पाए गए। लिहाजा उनकी तीन वेतन वृद्धियों को स्थायी रूप से रोक दिया गया है। उप मुख्यमंत्री ने चिकित्सा शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव को एडवर्स एंट्री का दंड देने के आदेश दिए हैं।
चिकित्सा शिक्षा महानिदेशालय में सम्बद्ध चिकित्सा शिक्षक डॉ. राजेश कुमार बरनवाल पर प्रधानाचार्य, स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय देवरिया पर आरोप है कि तैनाती के दौरान 36 पदों पर आउटसोर्स ऑफ मैनपावर के आधार पर आपूर्ति के लिए नवीन निविदा नहीं की गई।
आरोप हैं कि बार-बार नवीन निविदा को निरस्त किया गया। बिना सक्षम अनुमोदन के पुरानी संस्था को अनुबन्ध समय विस्तार दिया गया। ऐसे में डॉ. राजेश को आरोप पत्र देकर विभागीय कार्यवाही के आदेश चिकित्सा शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव को दिए गए हैं।
कन्नौज के राजकीय मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्रभारी प्रधानाचार्य डॉ. दिनेश सिंह मर्तोलिया द्वारा मेडिकल कॉलेज परिसर में साफ सफाई और वेस्ट मैनेजमेंट की अनुबन्धित संस्था को बिना सक्षम अनुमोदन के पुरानी संस्था का अनुबन्ध समय विस्तारित करने का दोषी पाया गया है। आरोप पत्र देकर उनके खिलाफ विभागीय कार्यवाही के आदेश दिए गए हैं।
ब्रजेश पाठक ने इस संबंध में मीडिया से बातचीत में कहा कि भ्रष्टाचार करने वालों को किसी भी दशा में बख्शा नहीं जाएगा। रिटायरमेंट के बाद पेंशन से वसूली की जाएगी। लिहाजा स्वास्थ्य अधिकारी और कर्मचारी सरकार की योजनाओं को बहुत ही ईमानदारी से मरीजों तक पहुंचाएं। जनता में भरोसा पैदा करें।