जोहो के सह-संस्थापक श्रीधर वेम्बु ने कहा है कि एआई के खतरों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया है। उन्होंने भारत से बुनियादी अनुसंधान और विकास में बड़े पैमाने पर निवेश करने का आग्रह किया है।
चेन्नई। प्रौद्योगिकी कंपनी जोहो के सह-संस्थापक श्रीधर वेम्बु ने कहा है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के संभावित खतरों को लेकर जताई जा रही आशंकाओं को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया है और एआई के विकास पर वैश्विक स्तर पर रोक लगने की संभावना नहीं है। उन्होंने भारत से रणनीतिक विकल्प खुले रखने और विभिन्न क्षेत्रों में बुनियादी अनुसंधान एवं विकास में बड़े पैमाने पर निवेश करने का आग्रह किया है। वेम्बु ने कहा कि भारत को एआई के क्षेत्र में स्वतंत्र दृष्टिकोण अपनाना चाहिए और अमेरिका तथा चीन के बीच उभरती प्रौद्योगिकी प्रतिस्पर्धा में किसी एक पक्ष से बंधने से बचना चाहिए।
बुनियादी अनुसंधान में निवेश और कौशल की चिंता
वेम्बु ने कहा कि महत्वपूर्ण बुनियादी अनुसंधान एवं विकास में बड़े पैमाने पर निवेश करने की जरूरत है, जिसके लिए अरबों डॉलर खर्च करने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा कि उनकी बड़ी चिंता एआई उपकरणों पर बढ़ती निर्भरता के कारण मानवीय निर्णय क्षमता और कौशल में कमी आना तथा रोजगार पर संभावित असर है। वेम्बु ने कहा कि जोहो कनिष्ठ इंजीनियरों को बुनियादी कौशल और मूल अवधारणाओं में दक्षता हासिल करने तक एआई की पहुंच सीमित करने पर विचार कर सकती है, और यही सिद्धांत स्कूलों तथा कॉलेजों पर भी लागू होना चाहिए।
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