अदालत ने अंकिता भंडारी हत्याकांड में सभी आरोपियों की जमानत याचिकाएं एक बार फिर खारिज कर दीं।
देहरादून (उत्तराखंड)। बुधवार को अदालत ने अंकिता भंडारी हत्याकांड में सभी आरोपियों की जमानत याचिकाएं एक बार फिर खारिज कर दीं। उत्तराखंड सरकार ने पीड़िता को न्याय दिलाने और दोषियों को कानून के अनुसार कड़ी सजा दिलाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
आरोपियों को 24 घंटे के भीतर जेल भेजा
राज्य सरकार ने कहा कि सरकार द्वारा किए गए सशक्त और प्रभावी कानूनी प्रतिनिधित्व के कारण ही आरोपियों को राहत नहीं मिल सकी। इस मामले में दोषियों को दी गई आजीवन कारावास की सजा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में सरकार द्वारा मामले की शुरुआत से लेकर अंतिम न्यायिक फैसले तक दोषियों को कड़ी सजा दिलाने के निरंतर प्रयासों को दर्शाती है। घटना के सामने आते ही धामी ने अधिकारियों को सख्त कार्रवाई करने का निर्देश दिया। आरोपियों को 24 घंटे के भीतर जेल भेज दिया गया और निष्पक्ष और गहन जांच सुनिश्चित करने के लिए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया। आरोपियों के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत भी कार्रवाई शुरू की गई।
लगभग 500 पन्नों की चार्जशीट तैयार
जांच के दौरान लगभग 500 पन्नों की चार्जशीट तैयार की गई, जिसमें महत्वपूर्ण सबूत और लगभग 100 गवाहों के बयान शामिल हैं। अभियोजन पक्ष ने अदालत के समक्ष लगातार अपना पक्ष रखा, जिसके परिणामस्वरूप आरोपियों की जमानत याचिकाएं बार-बार खारिज होती रहीं और मुकदमे की सुनवाई के दौरान वे सलाखों के पीछे ही रहे। जांच और अभियोजन के फलस्वरूप अंततः दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। पूरी कार्यवाही के दौरान, राज्य सरकार ने अंकिता के माता-पिता और परिवार की भावनाओं और चिंताओं को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। परिवार की मांगों के अनुरूप, सरकार ने तीन बार सरकारी वकील बदले। इसके अलावा, जब अंकिता के माता-पिता ने सीबीआई जांच की मांग की, तो मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उनकी भावनाओं का सम्मान करते हुए मामले की सीबीआई जांच का आदेश दिया।
परिवार को सरकार ने 25 लाख रुपये की वित्तीय सहायता दी
परिवार को सहयोग देने के लिए सरकार ने 25 लाख रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की। सरकार ने अंकिता के भाई और पिता को रोजगार भी दिया, जिससे शोक संतप्त परिवार के साथ खड़े रहने की अपनी प्रतिबद्धता पूरी हुई। शुरुआत से ही, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का स्पष्ट रुख रहा कि अपराधी चाहे कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, उसे न्याय के कटघरे में लाया जाएगा और कानून के तहत उसे कड़ी से कड़ी सजा दी जाएगी। जांच को लेकर उठे सवालों के बावजूद, न्यायिक स्तर पर भी प्रक्रिया संतोषजनक पाई गई और मजबूत अभियोजन ने अंततः यह सुनिश्चित किया कि दोषियों को न्याय के कटघरे में लाया जाए। इस बीच, कांग्रेस नेताओं और अन्य संगठनों के सदस्यों ने कथित 'वीआईपी' के नाम पर बार-बार सवाल उठाए और जनता में भ्रम पैदा करने की कोशिश की।
अदालत के बाहर राजनीतिक लाभ के लिए आरोप लगाना न्याय की लड़ाई नहीं
अगर किसी के पास इस संबंध में ठोस तथ्य या सबूत थे, तो उन्हें जांच एजेंसियों और अदालत के सामने पेश करना चाहिए था। अदालत के बाहर राजनीतिक लाभ के लिए आरोप लगाना और जनता को गुमराह करना न्याय की लड़ाई नहीं है, बल्कि अंकिता से जुड़े एक अत्यंत संवेदनशील मामले का राजनीतिकरण करने का प्रयास है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पहले दिन से ही यह स्पष्ट कर दिया था कि अंकिता को न्याय दिलाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। त्वरित गिरफ्तारी, एसआईटी जांच और व्यापक आरोपपत्र से लेकर गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई, आरोपियों को जमानत मिलने का लगातार विरोध, परिवार की इच्छा के अनुसार अभियोजन व्यवस्था में बदलाव, वित्तीय सहायता और रोजगार, और अंत में अंकिता के माता-पिता के अनुरोध पर सीबीआई जांच का आदेश देने तक, सरकार ने हर चरण में संवेदनशीलता और दृढ़ संकल्प के साथ निर्णय लिए। धामी सरकार ने अंकिता के लिए न्याय की लड़ाई में केवल आश्वासन तक ही सीमित नहीं रखा। उसने ठोस कार्रवाई, प्रभावी कानूनी प्रतिनिधित्व और निर्णायक परिणाम के माध्यम से उसके परिवार के साथ मजबूती से खड़ी रही।
(इनपुटः ANI)
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