अयोध्या में 10वें दीपोत्सव पर सरयू के 56 घाटों पर 30 लाख से अधिक दीये जलाए गए। CM योगी ने राम मंदिर निर्माण और 500 साल के संघर्ष को याद किया।
अयोध्या (उत्तर प्रदेश)। अयोध्या धाम में शनिवार शाम दीपोत्सव का 10वां संस्करण भव्य तरीके से मनाया गया। इस अवसर पर पवित्र सरयू नदी के 56 घाटों पर 30 लाख से अधिक मिट्टी के दीये जलाए गए। नवनिर्मित राम मंदिर की पृष्ठभूमि में पूरा शहर रोशनी से जगमगा उठा। इस ऐतिहासिक आयोजन में उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन, उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित हजारों संत और श्रद्धालु शामिल हुए।

रामायण के प्रसंगों पर सांस्कृतिक कार्यक्रम और ड्रोन शो
दीपोत्सव के दौरान अयोध्या में रामायण की प्रमुख घटनाओं को दर्शाते हुए कई सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए। सरयू नदी के तट पर स्थित राम की पैड़ी में लाइट और ड्रोन शो का आयोजन भी हुआ। इस दौरान प्रार्थना और आरती की गई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भगवान राम और माता जानकी की पूजा-अर्चना की। इसके बाद उन्होंने राम कथा पार्क में मौजूद लोगों को संबोधित किया।

CM योगी ने याद किया पहला दीपोत्सव, बोले- आज मंदिर बन चुका है
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दीपोत्सव की शुरुआत से लेकर अब तक के सफर को याद किया। उन्होंने कहा कि शुरुआत में इस आयोजन की आलोचना हुई थी और सवाल उठाए गए थे कि क्या दीपोत्सव अयोध्या की परंपरा का हिस्सा है। उन्होंने राम मंदिर निर्माण की मांग को लेकर शुरुआती आयोजनों में लगाए गए नारों का भी जिक्र किया।
योगी आदित्यनाथ ने कहा, "पहला दीपोत्सव याद है? तब लोग कहते थे कि यह हमारी परंपरा का हिस्सा नहीं है। उस समय नारे लगाए जाते थे— 'योगी जी, एक काम करिए— मंदिर बना दीजिए।' और आज, आप खुद देख सकते हैं कि मंदिर बन चुका है।"

500 साल के संघर्ष से राम मंदिर निर्माण तक का किया जिक्र
मुख्यमंत्री ने अयोध्या में हुए बदलावों का उल्लेख करते हुए राम जन्मभूमि आंदोलन के लंबे संघर्ष और रामलला की प्राण प्रतिष्ठा तक के सफर को याद किया। उन्होंने कहा कि यह बदलाव उन आकांक्षाओं की पूर्ति है, जिनके लिए संतों और कार सेवकों ने आंदोलन के दौरान बलिदान दिया था।
उन्होंने कहा, "500 वर्षों की गुलामी के दौर में—जो विदेशी आक्रांताओं का समय था—शायद कई लोगों को संदेह रहा होगा कि क्या कभी राम लला फिर से अयोध्या में विराजमान हो पाएंगे। लेकिन आज, अयोध्या धाम उस गौरव को पुनः प्राप्त कर रहा है, जिसके लिए कार सेवकों ने सर्वोच्च बलिदान दिए और पूज्य संतों ने लंबा संघर्ष किया—यह राम जन्मभूमि के लिए चलाए गए आंदोलन का परिणाम है।"

प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में अयोध्या के विकास का उल्लेख
योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या में आए बदलावों का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व को दिया। उन्होंने कहा कि वर्षों की उपेक्षा के बाद अयोध्या ने अपनी आध्यात्मिक पहचान दोबारा हासिल की है। मुख्यमंत्री ने शहर में हुए बुनियादी ढांचे के विकास का भी जिक्र किया और महर्षि वाल्मीकि के नाम पर बने अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का उदाहरण दिया।
उन्होंने कहा, "आज, प्रधानमंत्री मोदी के मार्गदर्शन और नेतृत्व में, और अयोध्या की वास्तविक भावना के अनुरूप—वह स्थान जो कभी केवल 'श्री राम' नाम लेने पर लाठीचार्ज और गोलीबारी का गवाह बना था, जहाँ राम का नाम लेना भी पाप माना जाता था और जिसे पूरी तरह उपेक्षित और मानो शापित छोड़ दिया गया था—वह अयोध्या फिर से जीवंत हो उठी है, जो त्रेता युग की यादें ताजा कर रही है।"

अयोध्या आने से पहले माफी मांगें राम भक्तों का अपमान करने वाले: योगी
राम जन्मभूमि आंदोलन के राजनीतिक आलोचकों पर निशाना साधते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि अतीत में जिन लोगों ने राम भक्तों और संतों का अपमान किया था, उन्हें अयोध्या आने से पहले माफी मांगनी चाहिए।
योगी आदित्यनाथ ने कहा, "मैं आज आपको यह विश्वास दिलाने आया हूँ: जिन लोगों ने कभी हमारी उपेक्षा की और हमारा अपमान किया, जिन्होंने भगवान राम के भक्तों पर गोलियां चलाईं, और जिन्होंने संतों को अपमानित किया तथा उन पर लाठीचार्ज करवाया—यदि वे कभी अयोध्या आते हैं, तो उन्हें माफी मांगने के बाद ही आना चाहिए। उन्हें भगवान राम के भक्तों से माफी मांगनी चाहिए; उन्हें संतों से माफी मांगनी चाहिए। उन्हें अपने पिछले कार्यों के लिए पश्चाताप करना चाहिए।"

उपराष्ट्रपति बोले- राम मंदिर हिंदू आत्मसम्मान का प्रतीक
उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने राम मंदिर को हिंदू आत्मसम्मान का प्रतीक बताया। उन्होंने अयोध्या के विकास के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व की सराहना की। उन्होंने कहा कि काफी समय बाद एक संत राज्य के मुख्यमंत्री बने हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पिछले 12 वर्षों से देश का नेतृत्व कर रहे हैं।
उपराष्ट्रपति ने कहा, "आज मंदिर में दर्शन करने के बाद, मुझे गर्व महसूस हो रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में, राम मंदिर अब हमारे संपूर्ण हिंदू आत्म-सम्मान का प्रतीक बन गया है।" उन्होंने अयोध्या को केवल स्मार्ट सिटी या सोलर सिटी नहीं, बल्कि आध्यात्मिक नगरी बताया।

राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने राम को बताया राष्ट्रीय चेतना का प्रतीक
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने अपने संबोधन में भगवान राम को भारतीय मूल्यों और राष्ट्रीय चेतना का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि दीपोत्सव का महत्व केवल धार्मिक उत्सव तक सीमित नहीं है। उनके मुताबिक, भगवान राम भारतीय संस्कृति और देश की आत्मा से जुड़े विचारों का प्रतिनिधित्व करते हैं।
आनंदीबेन पटेल ने कहा, "'राम' सिर्फ एक नाम नहीं हैं; वे एक विचार हैं, मूल्यों का एक समूह हैं, भारत की आत्मा हैं और हमारी राष्ट्रीय चेतना की नींव हैं।"

अयोध्या में पर्यटन से रोजगार और आर्थिक अवसरों का जिक्र
राज्यपाल ने धार्मिक और पर्यटन स्थल के रूप में अयोध्या की बढ़ती लोकप्रियता से पैदा हो रहे आर्थिक अवसरों पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि तीर्थयात्रियों और पर्यटकों की बढ़ती संख्या से स्थानीय समुदायों के लिए रोजगार और आर्थिक समृद्धि की संभावनाएं बढ़ रही हैं। पटेल के अनुसार, हॉस्पिटैलिटी, गेस्ट हाउस, परिवहन, खान-पान, हस्तशिल्प, फूल, पूजा सामग्री और स्थानीय उत्पादों से जुड़े क्षेत्रों में हजारों परिवारों के लिए आजीविका के अवसर पैदा हो रहे हैं।
उन्होंने कहा, "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में, अयोध्या का विकास एक नई दृष्टि और नए संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है। अयोध्या में तीर्थयात्रियों और पर्यटकों की लगातार बढ़ती संख्या अपने साथ रोजगार और आर्थिक समृद्धि की अपार संभावनाएं लेकर आई है।"

आतिशबाजी से जगमगाया आसमान, 56 घाटों पर दीपों की रोशनी
अयोध्या में 10वें दीपोत्सव के दौरान भव्य आतिशबाजी का आयोजन भी किया गया, जिससे रात का आसमान रोशनी से जगमगा उठा। सरयू नदी के किनारे स्थित 56 घाटों पर लाखों दीयों का प्रज्वलन इस आयोजन का मुख्य आकर्षण रहा।
इस तरह दीपोत्सव के 10वें संस्करण में अयोध्या की धार्मिक परंपराओं, सांस्कृतिक विरासत और विकास कार्यों की झलक एक साथ देखने को मिली। (Source: ANI)
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