उत्तर प्रदेश के बलिया में 25 जून 2026 को सड़क हादसे में घायल एक युवक की जिला अस्पताल में इलाज के अभाव में मौत होने का मामला अब तूल पकड़ता नजर आ रहा है।
बलिया {उत्तर प्रदेश}: उत्तर प्रदेश के बलिया में 25 जून 2026 को सड़क हादसे में घायल एक युवक की जिला अस्पताल में इलाज के अभाव में मौत होने का मामला अब तूल पकड़ता नजर आ रहा है। मृतक के परिजनों का आरोप था कि करीब 40 मिनट तक वे डॉक्टर की तलाश में इधर-उधर भटकते रहे, लेकिन ट्रॉमा सेंटर में कोई चिकित्सक नहीं पहुंचा, जिससे घायल अविनाश की मौत हो गई। इस मामले में मुख्य चिकित्साधिकारी (सीएमओ) ने सफाई देते हुए परिजनों के आरोपों को निराधार बताया है।
सीएमओ ने बताई घटनाक्रम की पूरी जानकारी
सीएमओ के अनुसार, 25 जून की सुबह अविनाश कुमार पुत्र स्वर्गीय राज किशोर को ट्रॉमा सेंटर, जिला चिकित्सालय बलिया लाया गया था, जहां ड्यूटी पर मौजूद चिकित्सक डॉ. मनोज कुमार ने उन्हें मृत घोषित किया।
सीसीटीवी फुटेज का दिया हवाला
सीएमओ ने बताया कि सीसीटीवी फुटेज के अनुसार सुबह 8:09 बजे अविनाश को ई-रिक्शा से जिला अस्पताल परिसर में लाया गया। सुबह 8:16 बजे इमरजेंसी में तैनात डॉ. संतोष कुमार सिंह ट्रॉमा सेंटर की ओर जाते दिखाई देते हैं। अपने लिखित बयान में डॉ. संतोष ने कहा कि उन्होंने ट्रॉमा सेंटर पहुंचकर मरीज को देखा था और उसके मृत होने की पुष्टि करते हुए आगे की कार्रवाई के लिए डॉ. मनोज कुमार को निर्देश दिए।
चार डॉक्टरों ने किया था मरीज का परीक्षण
डॉ. मनोज कुमार के लिखित बयान के अनुसार, वह रात से ड्यूटी पर थे और उस समय तक उनके रिलीवर डॉ. रजनीश भी पहुंच चुके थे। दोनों चिकित्सकों ने मरीज को देखा। इसी दौरान ऑन कॉल कंसलटेंट सर्जन डॉ. अनिल सिंह भी ट्रॉमा सेंटर पहुंचे और उन्होंने भी मरीज का परीक्षण किया। कुछ देर बाद डॉ. संतोष कुमार सिंह भी वहां पहुंचे। इस तरह कुल चार डॉक्टरों ने मरीज को देखा था।
तोड़फोड़ में घायल होने का भी किया जिक्र
डॉ. मनोज कुमार ने अपने बयान में कहा कि ट्रॉमा सेंटर में तोड़फोड़ शुरू हो गई थी, जिसमें उन्हें भी चोट लगी। उन्होंने बताया कि वह सुबह करीब 8:30 बजे तक ट्रॉमा सेंटर में ही मौजूद थे, जिसकी पुष्टि सीसीटीवी फुटेज से भी हुई है।
परिजनों के आरोपों को बताया निराधार
परिजनों का आरोप था कि अविनाश को पहले इमरजेंसी में लाया गया, जहां बिना जांच किए उसे ट्रॉमा सेंटर भेज दिया गया। हालांकि, सीएमओ ने कहा कि सीसीटीवी फुटेज में मरीज के इमरजेंसी में आने की पुष्टि नहीं होती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह आरोप पूरी तरह निराधार है कि मरीज को किसी चिकित्सक ने नहीं देखा। उनके अनुसार, घायल को तत्काल ड्यूटी पर मौजूद चार चिकित्सकों ने देखा था और डॉक्टरों के ड्यूटी पर न होने का आरोप भी तथ्यहीन है।
मामले की जांच जारी
सीएमओ ने बताया कि पूरे मामले की जांच अभी जारी है और सभी तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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