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दूसरे राज्यों में गए मजदूरों पर अत्याचार का मामला

केंद्रीय मंत्री सुकांत मजुमदार और टीएमसी के महासचिव अभिषेक बनर्जी आमने-सामने

पश्चिम बंगाल से दूसरे राज्यों में गए मजदूरों पर बांग्लाभाषी होने की वजह से हो रहे अत्याचार से बचाने के सवाल पर केंदीय मंत्री सुकांत मजुमदार और टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी आमने-सामने हैं

केंद्रीय मंत्री सुकांत मजुमदार और टीएमसी के महासचिव अभिषेक बनर्जी आमने-सामने

केंद्रीय मंत्री सुकांत मजुमदार और टीएमसी के महासचिव अभिषेक बनर्जी आमने-सामने

दूसरे राज्यों में बंगाली मजदूरों पर अत्याचार का मामला

कोलकाता। 
पश्चिम बंगाल से दूसरे राज्यों में गए मजदूरों पर बांग्लाभाषी होने की वजह से हो रहे अत्याचार से बचाने के सवाल पर केंदीय मंत्री सुकांत मजुमदार और टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी एक दूसरे के खिलाफ खुल कर आमने-सामने हैं। 
सुकांत मजुमदार दक्षिण दिनाजपुर के तहत लोकसभा क्षेत्र बालूरघाट के भाजपा सांसद और केंद्रीय मंत्री सुकांत मजुमदार हें। अभिषेक बनर्जी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बाद टीएमसी में सबसे अधिक महत्वपूर्ण माने जाने वाले नेता हैं। वे विधानसभा चुनाव में भाजपा की स्थिति कमजोर करने बाबत जिलों का दौरा कर रहे हैं।   
टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव व दक्षिण चौबीस परगना के डायमंड हार्बर के सांसद अभिषेक बनर्जी ने केंद्रीय मंत्री सुकांत मजुमदार के लोकसभा क्षेत्र में जाकर उन दो मजदूरों से मुलाकात की जिन्हें महाराष्ट्र की पुलिस ने बांग्लादेशी होने के संदेह में गिरफ्तार किया और वे सात महीने जेल में रहे। अभिषेक बनर्जी के सामने महाराष्ट्र से वापस आए मजदूर असित सरकार और गौतम बर्मन ने प्रेस के लोगों को बताया कि वे मजदूरी के लिए मुबंई गए थे। वहां पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया और जेल भेज दिया। वे सात महीने जेल रहे। उन्हें बांग्ला बोलने के कारण बांग्लादेशी मान लिया गया। भाजपा समर्थक होने के कारण परिवार के लोगों ने केंद्रीय मंत्री सुकांत मजुमदार से मुलाकात उन्हें छुड़ाने की गुहार लगाई लेकिन सुकांत मजुमदार ने कुछ नहीं किया। तब परिवार के लोगों ने अभिषेक बनर्जी से मुलाकात की और उन्होंने जेल से बाहर आने में मदद की। 
टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने सवाल उठाया कि केंद्रीय मंत्री सुकांत मजुंमदार को क्या करना चाहिए था। क्या उन्हें महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री से बात कर मजदूरों को नहीं छुड़वाना चाहिए था। वे भाजपा के नेता और बालूरघाट के सांसद है, तो क्या अपनी पार्टी के समर्थकों की मदद नहीं करनी चाहिए थी। वे दिल्ली में हिंदी में बोलते हैं तो पश्चिम बंगाल में भी हिंदी बोलते हैं। अभिषेक बनर्जी ने यह जताया कि सुकांत मजुमदार बांग्लाभाषियों और पश्चिम बंगाल के हितैषी नहीं है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि केंद्रीय मंत्री होकर अपने लोकसभा क्षेत्र के लिए क्या किया है। ममता सरकार ने राज्य मं किए गए विकास कार्य का अपना रिपोर्ट कार्ड प्रकाशित कर दिया है। केंद्र सरकार क्यों नहीं अपना रिपोर्ट कार्ड पेश करती है। 
इस पर केंद्रीय मंत्री सुकांत मजुमदार ने पलट जवाब में कहा कि मजदूरों को दो लाख रुपए और नौकरी देने का आश्वासन देकर उनके (सुकांत मजुमदार) के खिलाफ बोलवाया जा रहा है। एक मजदूर के परिवार ने मुझसे मुकालात की थी। सुकांत मजुमदार का कहना है कि उन्होंने मदद के लिए अधिकारी से बात कराई थी। लेकिन परिवार के लोग उसे अपनी बात नहीं समझा पाए। उन्होंने यह सवाल उठाया कि ममता सरकार ने केंद्र सरकार की योजनाओं को क्यों नहीं लाग किया। उसने खुद भी कितना विकास किया है।

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