भारत में बैंक ऋण वृद्धि की गति पिछले पखवाड़े में धीमी होकर 15 प्रतिशत से नीचे आ गयी। देश में बैंक ऋण वृद्धि की गति 15 अप्रैल को समाप्त पखवाड़े में धीमी होकर 15 प्रतिशत से नीचे आ गई।
मुंबई। भारत में बैंक ऋण वृद्धि की गति पिछले पखवाड़े में धीमी होकर 15 प्रतिशत से नीचे आ गयी। देश में बैंक ऋण वृद्धि की गति 15 अप्रैल को समाप्त पखवाड़े में धीमी होकर 15 प्रतिशत से नीचे आ गई।
वृद्धि दर में आई गिरावट
15 अप्रैल को समाप्त पखवाड़े में बैंक ऋण वृद्धि की सालाना दर घटकर 14.88 प्रतिशत रही, जबकि इससे पिछले पखवाड़े में यह 15.96 प्रतिशत थी। यह काफी हद तक अर्थव्यवस्था में सुस्ती को भी दर्शाता है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, 15 अप्रैल 2026 को समाप्त पखवाड़े में बैंक ऋण वृद्धि (Bank Credit Growth) 14.88% (YoY) पर आ गई।
मांग में नरमी का असर
यह गिरावट वित्त वर्ष के अंत में बैलेंस शीट लक्ष्यों को पूरा करने के बाद ऋण की मांग में आई नरमी का संकेत देती है। आंकड़ों के अनुसार, 15 अप्रैल को समाप्त हुए पखवाड़े में बैंक ऋण ₹214 लाख करोड़ रहा, जो पिछले पखवाड़े के ₹218 लाख करोड़ से कम है।
₹4.51 लाख करोड़ की गिरावट
इस अवधि के दौरान, कुल ऋण में 2.06% या ₹4.51 लाख करोड़ की कमी दर्ज की गई। 18 अप्रैल, 2025 को समाप्त हुए पखवाड़े में भारत में कुल ऋण ₹186 लाख करोड़ रहा था। आरबीआई के डाटा के मुताबिक 31 मार्च को समाप्त हुए पखवाड़े के दौरान, बैंकों द्वारा दिए गए ऋण में पिछले दो वित्तीय वर्षों में सबसे तेज़ वृद्धि दर्ज की गई थी।
बैलेंस शीट लक्ष्य का प्रभाव
बैंक वित्तीय वर्ष के अंत से पहले अपने लक्ष्यों को पूरा करने के लिए तेजी से काम कर रहे थे, जिससे ऋण और जमा दोनों में भारी वृद्धि हुई। ऋण वृद्धि लगातार सात महीनों से दो अंकों में बनी रही, जो उधार देने की गतिविधि में निरंतर गति को दर्शाती है।
GST सुधार के बाद बढ़ी रफ्तार
सितंबर 2025 में जीएसटी संरचना के युक्तिकरण के बाद ऋण विस्तार में तेजी आई। 15 अप्रैल को समाप्त पखवाड़े में बैंकों की जमा राशि में पिछले वर्ष की तुलना में 12.12% की वृद्धि हुई।
जमा राशि का आंकड़ा
15 अप्रैल, 2026 को समाप्त पखवाड़े में जमा राशि ₹261.88 लाख करोड़ रही, जबकि एक साल पहले यह ₹233.56 लाख करोड़ थी। इस अवधि में बैंकों का राज्य और केंद्र सरकार की प्रतिभूतियों में निवेश बढ़कर ₹70.64 लाख करोड़ हो गया। वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही में, एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक और एक्सिस बैंक जैसे प्रमुख निजी क्षेत्र के बैंकों ने ऋण वितरण में मध्य-दोहरे अंकों की वृद्धि दर्ज की।
आर्थिक संकेतों पर नजर
कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और आपूर्ति में बाधाओं के कारण ऋण वृद्धि में आई मंदी पर बारीकी से नजर रखी जाएगी। संकट की स्थिति में, RBI ऋण मांग को बढ़ावा देने के लिए विशेष कदम उठा सकता है। बैंक कर्ज में गिरावट को अर्थव्यवस्था में सुस्ती का महत्वपूर्ण संकेतक माना जाता है।
GDP और निवेश पर प्रभाव
इससे जीडीपी विकास दर धीमी होने की संभावना रहती है और यह व्यवसायों व उपभोक्ताओं के कमजोर विश्वास को दर्शाता है। यह संकेत देता है कि कंपनियां विस्तार नहीं कर रहीं और लोग खर्च से बच रहे हैं, जिससे भविष्य में रोजगार और विकास प्रभावित हो सकता है।
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