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बांग्लादेश प्रति व्यक्ति GDP में आगे

प्रति व्यक्ति जीडीपी में भारत से आगे निकल सकता है बांग्लादेश

नई दिल्ली। International Monetary Fund की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक भारत के सामने प्रति व्यक्ति जीडीपी के मामले में 2026 में Bangladesh से पीछे होने का खतरा पैदा हो गया है।

प्रति व्यक्ति जीडीपी में भारत से आगे निकल सकता है बांग्लादेश

Global Economy |

नई दिल्ली। International Monetary Fund की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक भारत के सामने प्रति व्यक्ति जीडीपी के मामले में 2026 में Bangladesh से पीछे होने का खतरा पैदा हो गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि बांग्लादेश 2026 में इस मामले में भारत को पीछे छोड़ सकता है।

आंकड़ों में क्या कहती है रिपोर्ट

अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के अप्रैल 2026 के अनुमानों के अनुसार, बांग्लादेश की प्रति व्यक्ति जीडीपी 2,911 डॉलर रहने का अनुमान है, जबकि India की प्रति व्यक्ति जीडीपी 2,812 डॉलर रहने की उम्मीद है। 2025 में भारत 2,675 डॉलर के साथ बांग्लादेश (2,635 डॉलर) से थोड़ा आगे था, लेकिन 2023 और 2024 में भारत इस मामले में पीछे रह चुका है।

वैश्विक रैंकिंग में गिरावट

हाल के समय में यह भारत की अर्थव्यवस्था के लिए दूसरा बड़ा झटका माना जा रहा है। आईएमएफ के विश्व आर्थिक आउटलुक डेटा के अनुसार, भारत विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था से फिसलकर छठे स्थान पर आ गया है।

प्रतीकात्मक रूप से महत्वपूर्ण अंतर

"बिजनेस टुडे" की रिपोर्ट के अनुसार, यह अंतर भले ही कम हो, लेकिन प्रतीकात्मक रूप से काफी महत्वपूर्ण है। विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय से भारत की अपने पड़ोसी देश पर बनी बढ़त के संदर्भ में यह बदलाव अहम संकेत देता है।

कुल जीडीपी में भारत आगे

हालांकि, कुल जीडीपी के मामले में भारत अभी भी काफी आगे है। भारत की कुल जीडीपी करीब 4.1 ट्रिलियन डॉलर रहने का अनुमान है, जबकि बांग्लादेश की जीडीपी लगभग 510 बिलियन डॉलर है। अर्थशास्त्रियों के मुताबिक कुल आकार, विकास दर और आर्थिक विविधता जैसे कारक भी महत्वपूर्ण होते हैं।

अर्थशास्त्रियों के बीच बहस तेज

इस मुद्दे पर दो प्रमुख अर्थशास्त्रियों के बीच अलग-अलग राय सामने आई है। Kanwal Sibal और Kaushik Basu ने इस पर अपनी-अपनी प्रतिक्रिया दी है।

कंवल सिबल की राय

कंवल सिबल ने कहा कि प्रति व्यक्ति आय के आंकड़ों को अलग से देखकर निष्कर्ष निकालना सही नहीं है। उन्होंने कहा कि इसे व्यापक आर्थिक संदर्भ में समझना जरूरी है और केवल इन आंकड़ों के आधार पर सरकार की आलोचना करना उचित नहीं है।

कौशिक बसु की चिंता

वहीं, कौशिक बसु ने भारत में आर्थिक असमानता, बेरोजगारी और समावेशी विकास की कमी पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि अगर नीतियां आम लोगों की आय बढ़ाने के बजाय कुछ बड़े घरानों तक सीमित रहेंगी, तो भारत ऐसे ही अपने पड़ोसियों से पीछे रह सकता है।

रोजगार और विकास पर जोर

बसु ने कहा कि भारत को नारों से आगे बढ़कर रोजगार सृजन और मानव पूंजी के विकास पर ध्यान देना होगा। उन्होंने इस स्थिति को चौंकाने वाला बताया और कहा कि राजनीति और पर्यावरणीय समस्याएं भी विकास में बाधा बन रही हैं।

तुलना को लेकर अलग नजरिया

इसके विपरीत सिबल ने तर्क दिया कि अलग-अलग जनसंख्या और आर्थिक संरचना वाले देशों की तुलना करना भ्रामक हो सकता है। उन्होंने नौरू, मॉरीशस और कजाकिस्तान जैसे देशों का उदाहरण देते हुए कहा कि केवल प्रति व्यक्ति आय से किसी देश की पूरी आर्थिक तस्वीर समझना संभव नहीं है।

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