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चौधरी के अध्यक्ष बनने बाद बीजेपी में भूचाल

ब्राह्मण विधायकों की बाटी चोखा पार्टी से यूपी की सियासत गर्म

उत्तर प्रदेश में बीजेपी के ठाकुर विधायकों के बाद अब ब्राह्मण विधायकों की गोलबंदी। कुछ माह पहले ठाकुर विधायकों की कुटुम्ब बैठक सुर्खी बनी थी।

ब्राह्मण विधायकों की बाटी चोखा पार्टी से यूपी की सियासत गर्म

ब्राह्मण विधायकों की "बाटी चोखा पार्टी" से यूपी की सियासत गर्म

पंकज चौधरी के अध्यक्ष बनने बाद हुई बैठक से बीजेपी में भूचाल

लखनऊ।
उत्तर प्रदेश में बीजेपी के ठाकुर विधायकों के बाद अब ब्राह्मण विधायकों की गोलबंदी। कुछ माह पहले ठाकुर विधायकों की कुटुम्ब बैठक सुर्खी बनी थी। अब ब्राह्मण विधायकों की देर रात हुई "बाटी चोखा" डिनर पार्टी यूपी के सियासी हल्कों में सुर्खियों में है।

लखनऊ में BJP के MLA पीएन पाठक के आवास पर पार्टी के 32 विधायक जुटे। मंगलवार की शाम कुशीनगर के बीजेपी विधायक पीएन पाठक (पंचानंद पाठक) के लखनऊ स्थित बहुखंडी मंत्री आवास पर ब्राह्मण विधायकों की बैठक हुई। मिर्जापुर विधायक रत्नाकर मिश्रा और एमएलसी उमेश द्विवेदी की मुख्य भूमिका रही। इसमें पूर्वांचल और बुंदेलखंड के 45 से 50 ब्राह्मण विधायक शामिल हुए। विधायकों को लिट्टी चोखा और मंगलवार व्रत का फलाहार परोसा गया। इस बैठक में अन्य पार्टियों के भी ब्राह्मण विधायक पहुंचे थे। महत्वपूर्ण बात ये है कि बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खासम खास रिटायर्ड आईएएस अफसर रहे नृपेन्द्र मिश्रा के एमएलसी पुत्र साकेत मिश्रा भी मौजूद रहे। साथ ही सीएम योगी आदित्यनाथ के पिछले कार्यकाल में सलाहकार रहे शलभ मणि त्रिपाठी भी बैठक में शामिल हुए।

बैठक में नौतनवां विधायक ऋषि त्रिपाठी, तरबगंज से विधायक प्रेमनारायण पांडेय, मिर्जापुर से विधायक रत्नाकर मिश्रा, बांदा विधायक प्रकाश द्विवेदी, बदलापुर से भाजपा विधायक रमेश मिश्रा, खलीलाबाद से विधायक अंकुर राज तिवारी और मेहनौन से भाजपा विनय द्विवेदी सहित अन्य विधायक बैठक में शामिल हुए। इसके अलावा, एमएलसी उमेश द्विवेदी, धर्मेंद्र सिंह और बाबूलाल तिवारी भी बैठक में पहुंचे। इसके अलावा, ज्ञानपुर से विधायक विपुल दुबे, महोबा से विधायक राकेश गोस्वामी, विधायक विनोद चतुर्वेदी, संजय शर्मा, विवेकानंद पांडेय, अनिल त्रिपाठी, अंकुर राज तिवारी, सुभाष त्रिपाठी, अनिल पाराशर, कैलाशनाथ शुक्ला, प्रेमनारायण पाण्डेय, ज्ञान तिवारी और सुनील दत्त द्विवेदी भी मौजूद रहे।

उत्तर प्रदेश में बीजेपी के नये प्रदेश अध्यक्ष की ताजपोशी के कुछ दिनों बाद हो रही इस बैठक से राज्य की राजनीति में भूचाल आना तय है। इस बैठक के बाद सत्ताधारी पार्टी बीजेपी की नींद उड़ना लाजमी है। मालूम हो कि महाराजगंज के सांसद केन्द्रीय मंत्री पंकज चौधरी को पिछले हफ्ते ही बीजेपी का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया है। पंकज चौधरी ओबीसी वर्ग की कुर्मी जाति से आते हैंं। हालांकि पंकज चौधरी से पहले प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए नहीं है के लिए डाॅ दिनेश शर्मा और हरीश द्विवेदी जैसे ब्राह्मण नेताओं का नाम भी इस पद के लिए चर्चा में था। लेकिन पंकज चौधरी के नाम पर मुहर लगने से इस वर्ग को निराशा मिली है। कुछ लोगों का मानना है कि बैठक का उद्देश्य खरमास बाद यूपी में होने वाले योगी कैबिनेट से पहले पार्टी नेतृत्व पर दबाव बनाना हो सकता है। अब देखना है कि इस वर्ग के कुछ नेताओं को विस्तार में जगह मिलती है या नहीं। 

यूपी विधानसभा में इस समय 52 ब्राह्मण विधायक हैं, इनमें 46 भाजपा के हैं। बैठक में कुल 32 विधायकों के इकट्ठा होने की खबर है। बैठक में मुख्य रूप से राज्य की राजनीति में कुछ जातियों के बढ़ते वर्चस्व के बीच ब्राह्मणों के हाशिये पर पहुंच जाने पर चिंता व्यक्त की गयी। सूत्रों के अनुसार बैठक में चर्चा का मुद्दा यही था कि अलग-अलग जाति के खांचों में कई जातियां तो पॉवरफुल हो गईं, लेकिन ब्राह्मण पिछड़ गए हैं। जाति की राजनीति में ब्राह्मणों की आवाज दबती जा रही है। उनकी बातों को अनसुना किया जा रहा है। माना जा रहा है कि ब्राह्मणों के मुद्दों को जोर-शोर से उठाने के लिए यह जुटान हुई है। हालांकि मिर्जापुर नगर से विधायक रत्नाकर मिश्रा ने बैठक को सियासी पक्ष की बात को खारिजयकर दिया। उन्होंने किसी भी तरह की गुटबाजी से साफ इनकार करते हुए कहा कि 'यह सिर्फ एक चाय पार्टी थी। इसमें कोई राजनीतिक चर्चा नहीं हुई। हम मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में पूरी तरह सुरक्षित हैं और अगला चुनाव भी उन्हीं के नेतृत्व में लड़ेंगे। 

बैठक का नाम दिया गया - सहभोज। इस मीटिंग में कुछ ख़ास IAS और IPS अफ़सरों की मनमानी पर भी लंबी चर्चा हुई। बैठक के बाद हर महीने मिलते रहें, इस वादे पर सब विदा हुए। याद रहे कि पिछले विधानसभा सत्र के दौरान मुरादाबाद के एक विधायक की पहल पर क्षत्रिय विधायक पहली बार कुटुंब मिलन कार्यक्रम के तहत राजधानी के एक होटल में जुटे थे। उसके बाद कुर्मी समाज का कार्यक्रम हुआ था। और अब ब्राह्मण विधायकों की यह जुटान। इससे स्पष्ट है कि ऊपरी जातियों में असंतोष बढ़ रहा है। एक साल बाद होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले ऐसी गोलबंदियां तेज हो जाएं तो आश्चर्य नहीं होना चाहिए।

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