लखनऊ में नौवें पूर्वांचल माटी महोत्सव एवं सम्मान समारोह में डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने माटी, संस्कृति और परंपराओं से जुड़े रहने का संदेश दिया। समारोह में कवियों को सम्मानित किया गया।
लखनऊ (उत्तर प्रदेश)। उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने शनिवार को लखनऊ के संगीत नाटक अकादमी परिसर में आयोजित नौवें पूर्वांचल माटी महोत्सव एवं सम्मान समारोह में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने कहा कि माटी केवल एक शब्द नहीं, बल्कि हमारी सभ्यता, संस्कृति, संस्कारों, विचारधारा और पहचान की संवाहक है। यह हमें अपनी जड़ों से जोड़ती है और जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है। हमें देश-दुनिया में कहीं भी रहें, अपनी माटी को सदैव याद रखना चाहिए और अपने कार्यों एवं उपलब्धियों के माध्यम से उसका गौरव बढ़ाना चाहिए।
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि जीवन की आपाधापी में कई बार हम इतने व्यस्त हो जाते हैं कि अपनी जन्मभूमि, गांव, शहर और उस माटी को याद करने का समय नहीं निकाल पाते, जिसने हमें संस्कार दिए और आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। हमारी पहचान हमारी जड़ों से है। हम देश और दुनिया के किसी भी कोने में कार्य करें, लेकिन अपनी माटी का प्रतिनिधित्व करना कभी नहीं भूलना चाहिए। हमारी सफलता केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि उस मिट्टी के संस्कारों और सामर्थ्य का भी परिचायक है, जहां हमारा जन्म हुआ है।
उत्तर प्रदेश की माटी ने दिए अनेक महापुरुष
उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि उत्तर प्रदेश की माटी ने देश को अनेक महापुरुष, संत, विचारक, साहित्यकार, कलाकार और प्रतिभाशाली व्यक्तित्व दिए हैं। प्रदेश के लोगों ने अपनी प्रतिभा, परिश्रम और कर्तव्यनिष्ठा से देश-विदेश में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। आज उत्तर प्रदेश का युवा हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का परचम लहरा रहा है। शिक्षा, चिकित्सा, विज्ञान, उद्योग, व्यापार, कला, संस्कृति और प्रशासन सहित विभिन्न क्षेत्रों में प्रदेश के लोग अपनी उपलब्धियों से प्रदेश का गौरव बढ़ा रहे हैं। हमें अपनी जन्मभूमि और अपनी सांस्कृतिक विरासत पर गर्व होना चाहिए।
माटी ने दिया परिश्रम और सेवा का संदेश
उन्होंने कहा कि पूर्वांचल की माटी में हमारी समृद्ध सभ्यता, लोकपरंपराओं, आध्यात्मिक चेतना और गौरवशाली इतिहास की सुगंध समाहित है। काशी की ज्ञान परंपरा, महापुरुषों की विचारधारा, लोकगीतों की मिठास और लोककलाओं की जीवंतता पूर्वांचल की विशिष्ट पहचान हैं। यहां की संस्कृति ने सदैव समाज को एकता, समरसता, परिश्रम और सेवा का संदेश दिया है।
सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने का काम करता है माटी महोत्सव
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि ‘पूर्वांचल माटी महोत्सव’ जैसे आयोजन हमारी सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने, प्रतिभाओं को सम्मानित करने और नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। ऐसे आयोजन उन लोगों के योगदान को पहचान दिलाते हैं, जिन्होंने अपनी प्रतिभा, संघर्ष और समर्पण से समाज तथा प्रदेश का नाम रोशन किया है। अपनी माटी के प्रति सम्मान का भाव हमारी भावी पीढ़ियों में भी विकसित होना चाहिए, ताकि वे आधुनिकता के साथ अपनी परंपराओं और सांस्कृतिक मूल्यों को भी आत्मसात कर सकें।
उन्होंने आह्वान किया कि प्रत्येक व्यक्ति अपनी जन्मभूमि, अपने गांव और अपने शहर की पहचान को अपने साथ लेकर चले। हमारी उपलब्धियां हमारी माटी की प्रतिष्ठा बढ़ाएं और हमारा आचरण हमारे संस्कारों का परिचय दे। अपनी जड़ों से जुड़कर ही हम अपनी सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखते हुए विकास की नई ऊंचाइयों तक पहुंच सकते हैं। कार्यक्रम में कविजन प्रशांत पांडे, राजकुमार सिंह, अशोक टाकरी, आलोक अनिल, पंकज प्रसून, सतेन्द्र कुमार कुंतल, हसन काज़मी, बृजनाथ यादव को सम्मानित किया गया।
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