रीवा के बाबा घाट पर नाले का दूषित पानी सीधे बीहर नदी में मिल रहा है। मौके पर STP प्लांट बंद मिला, जिससे श्रद्धालुओं की आस्था और लोगों की सेहत पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
रीवा (मध्यप्रदेश)। जिले में आस्था और विश्वास के केंद्र कहे जाने वाले बाबा घाट बीहर नदी पर इन दिनों श्रद्धा और सेहत दोनों के साथ खिलवाड़ हो रहा है। सुबह के शांत वातावरण में जहां लोग बीहर नदी में डुबकी लगाने और मंदिर में जल चढ़ाने आते हैं, वहीं दूसरी ओर प्रशासन की नाक के नीचे शहर की कॉलोनियों का प्रदूषित और ज़हरीला पानी सीधे नदी में घोला जा रहा है।
नदी में मिल रहा नाले का पानी
ग्राउंड ज़ीरो से सामने आई तस्वीरें हैरान और विचलित करने वाली हैं। घाट के ठीक बगल से एक बड़ा नाला सीधे नदी में आकर मिल रहा है। इस दूषित और मटमैले पानी के बीच ही लोग नहाने, कुल्ला करने और भगवान शिव को जल अर्पित करने के लिए मजबूर हैं।
वादे बड़े, हकीकत सिफर, दिखावे का 'फ़िल्टर प्लांट'
नदी को प्रदूषण मुक्त रखने और नाले के पानी को साफ़ करके नदी में छोड़ने के लिए प्रशासन ने लाखों-करोड़ों की लागत से यहाँ STP प्लांट (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट - 200 KLD) का निर्माण तो करवा दिया है, लेकिन इसकी ग्राउंड रियलिटी कुछ और ही बयां करती है। स्थानीय निवासियों और रोज़ घाट पर आने वाले लोगों का आरोप है कि यह प्लांट सिर्फ एक 'दिखावा' बनकर रह गया है।
घाट पर मौजूद एक स्थानीय नागरिक रज्जन ने अपनी आपबीती सुनाते हुए कहा:
यह नाले का पानी कभी बंद नहीं होता, हमेशा चालू रहता है। फ़िल्टर प्लांट बना ज़रूर है, लेकिन हमने आज तक इसे सही से काम करते नहीं देखा। अगर प्लांट चलता होता, तो नाले का यह गंदा पानी नदी में क्यों आता? हमारे घरों में न तो बोर है और न ही नल की व्यवस्था, इसलिए हमें मजबूरी में रोज़ सुबह यहीं आना पड़ता है। इसी गंदे पानी में लोग नहाते हैं और कपड़े धोते हैं।"
गंदा पानी बिना फ़िल्टर हुए सीधे नदी में समा रहा
जब इस सच्चाई को कैमरे में कैद करने के लिए टीम सीधे STP प्लांट के अंदर पहुंची, तो वहां सन्नाटा पसरा हुआ था। प्लांट की मशीनें पूरी तरह से बंद थीं और गंदा पानी बिना फ़िल्टर हुए सीधे नदी में समा रहा था।
घाट पर जनता परेशान, प्लांट में 'मोटर को आराम'
जब वहां तैनात कर्मचारियों से इसका कारण पूछा गया, तो पहले उन्होंने 'लाइट गोल होने' का रटा-रटाया बहाना बनाया। हालांकि, जब कैमरे पर यह साफ़ दिखा कि लाइट चालू है, तो आनन-फानन में मशीनों को ऑन किया गया। कर्मचारियों का दावा था कि प्लांट चौबीसों घंटे चलता है और मोटर गर्म न हो, इसलिए उसे कुछ देर के लिए आराम दिया गया था। लेकिन हकीकत यह है कि सुबह का समय जब सबसे ज़्यादा लोग घाट पर होते हैं, तब भी यह प्लांट बंद पड़ा था।
आस्था और स्वास्थ्य दोनों खतरे में
बीहर नदी के इस घाट पर न केवल आम लोग बल्कि छोटे-छोटे बच्चे और संभ्रांत परिवारों के लोग भी सुबह-सुबह स्नान के लिए आते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन और संबंधित अधिकारियों से कई बार इसकी शिकायत की गई, लेकिन आज तक इस पर कोई सुनवाई नहीं हुई है। सैकड़ों लोगों की सेहत और धार्मिक भावनाओं से जुड़े इस गंभीर मुद्दे पर अब यह बड़ा सवाल खड़ा होता है कि आखिर लाखों की सरकारी मशीनरी किसके भरोसे और क्यों बंद पड़ी रहती है क्या प्रशासन किसी बड़ी बीमारी या महामारी के फैलने का इंतज़ार कर रहा है?
शहर के लोग पी रहे बदबू दार पानी
आपको अवगत करवाना चाहते हैं कि इसी बीहर नदी के पानी की शहर के सभी वार्डों में मीठा पानी के तौर पर सप्लाई की जाती है यानी इसका सीधा मतलब है कि जब नाले का गंदा पानी बिहार नदी में जा रहा है तो फिर रीवा शहर के निवासी गंदा पानी पीने को मजबूर हैं। अक्सर देखा जाता है कि मीठा पानी दूषित और बदबू दार सप्लाई हो रही है जिससे लोग बीमारी की चपेट में हैं ।
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