West bengal : मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयोग पर भाजपा के मकसद को पूरा करने और केंद्र सरकार पर चुनाव आयोग को अपने इशारे पर चलाने का आरोप लगाया।
West bengal : मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयोग पर भाजपा के मकसद को पूरा करने और केंद्र सरकार पर चुनाव आयोग को अपने इशारे पर चलाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग तमाम नियमों-कानूनों को खिलाफ पश्चिम बंगाल के वोटरों के साथ गैरलोकतांत्रिक और असंवैधानिक तरीके से वोटरों को अधिकार छिनने का अन्याय कर रहा है।
वह सुप्रीम कोर्ट का निर्देशों का भी उल्लंघन कर रहा है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने साफ किया कि वे एसआईआर की नहीं बल्कि पश्चिम बंगाल में उसके क्रियान्वयन के तरीके पर घोर आपत्ति है। उसके कारण इस राज्य में डेढ़ सौ लोगों की मौत हो गई। अनेक लोग अस्पताल में है। एसआईआर से लोग परेशान और आतंकित हैं। बड़ी संख्या में गरीब, आदिवासी, दलित, पिछड़े वर्ग, अल्पसंख्यक समुदाय के वैध वोटरों के नाम काटने की साजिश हो रही है।
इसके लिए बड़ी संख्या में रोल आबजर्बर और माइक्रों आबजर्बर नियुक्त किए गए हैं। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने दिल्ली स्थिति न्यू बंग भवन में एसआईआर के कारण मृत वोटरों और बीएलओ, वोटर लिस्ट के ड्राफ्ट में मृत बताए गए जीवित वोटरों के साथ मीडिया से बातचीत की और पश्चिम बंगाल में एसआईआर के नाम पर वोटरों के साथ हो रहे अन्याय और एसआईआर में हो रही घोर गड़बड़ियों का एक-एक कर खुलासा किया। उन्होंने कहा कि जानबूझ कर चुनाव आयोग ने विधानसभा चुनाव के कुछ महीने पहले एसआईआई शुरू किया। वह 2024 के लोकसभा चुनाव के तुरत बाद एसआईआर कर सकता था। विधानसभा के बाद भी एसआईआर कर सकता है। लेकिन वह बहनियत से विधानसभा चुनाव के पहले एसआईआर करवा रहा है। एसआईआर के कारण जिन लोगों की मौत हुई, उसकी जिम्मेदारी उसे ही लेनी पड़ेगी।
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि एसआईआर के प्रक्रिया में तमाम गड़बड़ियों को बताते हुए उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त को छह पत्र लिखे। लेकिन उन्होंने उसका कोई जवाब नहीं दिया। टीएमसी से सांसदों के प्रतिनिधि मंडल ने भी मुलाकात की लेकिन उन्होंने उसकी तरफ से उठाए गए मुद्दों पर गौर नहीं किया। उन्होंने कहा कि असम में चुनाव हो रहा है, लेकिन वहां एसआईआर नहीं हो रहा है। बारह राज्यों में एसआईआर कराया जा रहा है, लेकिन पश्चिम बंगाल में ही रोल आबजर्बर और माइक्रों आबजर्बर तैनात किए गए हैं। बीएलओ के अधिकारों को अनदेखा किया गया।
भाजपा समर्थक सीमा खन्ना की मदद से एआई के मर्फत वोटरों को नाम काटा गया। 2002 के वोटर लिस्ट से मैचिंग नहीं होने के नाम पर 58 लाख वोटरों को नाम काटे गए। लाजिकल डिसक्रिपेंसी काम पर 70 लाख वोटरों का नाम हटाए गए हैं। वोटरों को वैध कागजातों की मान्यता नहीं दी जा रही है। वोटरों के नाम अव्यावहारिक और गलत आधार पर काटे जा रहे है। मुख्य चुनाव आयुक्त सुप्रीम कोर्ट के निर्देश का भी उल्लंघन कर रहे है। 2002 के वोटर लिस्ट से मैचिंग नहीं होने वाले वोटरों के नामों की सूची और लाजिक डिसक्रिपेंसी वोटरों की लिस्ट को एक कर प्रकाशित किया जा रहा है जबकि दोनों को अलग-अलग कर प्रकाशित करना है।
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