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12 दिन बाद मिली बाघिन

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में 12 दिन बाद मिली कॉलर वाली बाघिन, वन विभाग ने सुरक्षित किया रेस्क्यू

उमरिया के बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में 12 दिनों से लापता कॉलर लगी मादा बाघिन को वन विभाग ने हाथियों और विशेष सर्च टीम की मदद से उसके प्राकृतिक क्षेत्र में सुरक्षित खोज लिया।

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में 12 दिन बाद मिली कॉलर वाली बाघिन वन विभाग ने सुरक्षित किया रेस्क्यू

Collared Tigress Found Safe After 12-Day Search Operation in Bandhavgarh Tiger Reserve |

उमरिया,(मध्य प्रदेश)। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में पिछले 12 दिनों से वन विभाग के लिए चुनौती बनी कॉलर लगी मादा बाघिन आखिरकार सुरक्षित मिल गई। 1 जुलाई को दोपहर बाद उसका जीपीएस और वीएचएफ रेडियो कॉलर सिग्नल देना बंद हो गया था, जिसके बाद वन विभाग ने बड़े स्तर पर खोज अभियान शुरू किया। लगातार बारिश और दुर्गम जंगल के बीच करीब 100 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में चले सर्च ऑपरेशन के बाद रविवार को हाथियों की मदद से बाघिन को उसके होम रेंज में सुरक्षित खोज लिया गया।

सिग्नल बंद होने से बढ़ी थी चिंता

1 जुलाई को दोपहर करीब 2 बजे के बाद कॉलर लगी बाघिन की लोकेशन मिलना बंद हो गई। रेडियो कॉलर से कोई सिग्नल नहीं मिलने पर वन विभाग ने तत्काल वन परिक्षेत्र अधिकारी के नेतृत्व में सुरक्षा श्रमिकों और बीट गार्डों की टीम को जंगल में उतारा। पहले दिन पूरे क्षेत्र की तलाशी के बावजूद बाघिन का कोई सुराग नहीं मिला।

तीन टीमों ने संभाला मोर्चा

अगले दिन से खोज अभियान को और व्यापक बनाया गया। पांच-पांच सदस्यों की तीन अलग-अलग टीमें गठित कर संभावित क्षेत्रों में लगातार गश्त और सर्च ऑपरेशन चलाया गया। बारिश के कारण कई बार अभियान प्रभावित हुआ, लेकिन वन अमला बिना रुके बाघिन की तलाश में जुटा रहा।

हाथी, डॉग स्क्वाड और विशेषज्ञ भी उतरे मैदान में

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं मुख्य वन्यजीव अभिरक्षक के मार्गदर्शन में विशेष खोज दल बनाया गया। इसमें बांधवगढ़ के वन्यप्राणी स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. राजेश तोमर और वाइल्डलाइफ कंजर्वेशन ट्रस्ट (डब्ल्यूसीटी) के डॉ. प्रशांत देशमुख को शामिल किया गया। दो प्रशिक्षित हाथियों, उनके महावतों, डॉग स्क्वाड और अतिरिक्त वीएचएफ रिसीवर एंटीना की मदद ली गई। संभावित क्षेत्रों में ट्रैप कैमरे भी लगाए गए, लेकिन बाघिन कैमरों में कैद नहीं हो सकी।

पदचिन्ह बने सफलता की कुंजी

लगातार प्रयासों के बीच खोजी दल को सबसे पहले बाघिन के ताजा पदचिन्ह मिले। इसके बाद हाथियों की मदद से उसी क्षेत्र में सघन तलाशी ली गई और 12 जुलाई को कॉलर वाली मादा बाघिन अपने प्राकृतिक क्षेत्र में सुरक्षित दिखाई दी। वन विभाग ने उसके फोटो और वीडियो भी रिकॉर्ड किए। जांच में पता चला कि बाघिन पूरी तरह स्वस्थ है, लेकिन उसका रेडियो कॉलर पूरी तरह से काम नहीं कर रहा है।

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