बांदा के गिरवां थाना क्षेत्र में साइबर ठगों ने खुद को बाल विकास विभाग का अधिकारी बताकर ठगी की वारदात को अंजाम दिया। ठगों ने गर्भवती महिला को 12,600 रुपये की सरकारी सहायता दिलाने का झांसा दिया।
बांदा: सरकारी योजना का लाभ दिलाने का लालच और बाल विकास विभाग के अधिकारी होने का दावा साइबर ठगों ने इसी तरीके से ठगी का जाल बिछाया और 12,600 रुपये दिलाने के बहाने 98,633 रुपये पार कर दिए। ठगों ने पहले आंगनबाड़ी सहायिका से संपर्क किया। फिर गर्भवती महिला के पति को फोन कर सरकारी सहायता का झांसा दिया। आरोप है कि फोन-पे स्कैनर के जरिए लेनदेन की प्रक्रिया में मेडिकल दुकान पर काम करने वाले युवक के खाते से अलग-अलग रकम निकल गई। पीड़ित ने साइबर थाने में शिकायत की है।
फर्जी अधिकारी बनकर आंगनबाड़ी सहायिका से मांगा गर्भवती महिला का नंबर
मामला गिरवां थाना क्षेत्र के बड़ोखर बुजुर्ग गांव का है। यहां की निवासी आरती पुत्री श्रीराम गांव के आंगनबाड़ी केंद्र में सहायिका के पद पर तैनात हैं। उनके मोबाइल पर एक अज्ञात नंबर से फोन आया। कॉल करने वाले ने खुद को बाल विकास परियोजना विभाग का अधिकारी बताते हुए कहा कि शिकायत मिली है कि वह बच्चों को पुष्टाहार वितरित नहीं कर रही हैं। आरती ने इसका जवाब देते हुए बताया कि वह नियमित रूप से पुष्टाहार का वितरण करती हैं। इसके बाद कॉल करने वाले ने वितरण की पुष्टि के नाम पर गांव की किसी गर्भवती महिला का मोबाइल नंबर मांगा। आरती ने प्रेमा पत्नी रविकरण का नंबर दे दिया। यहीं से ठगी का अगला चरण शुरू हुआ।
सरकारी सहायता का झांसा देकर 98,633 रुपये की साइबर ठगी
आरोप है कि ठग ने रविकरण को फोन कर कहा कि उनकी पत्नी गर्भवती हैं। सरकार की ओर से उन्हें 12,600 रुपये की सहायता राशि मिलेगी। इसके लिए ऐसे व्यक्ति का फोन-पे स्कैनर मांगा गया, जिसके खाते में 10 हजार रुपये से अधिक का लेनदेन होता हो। रविकरण ने गांव की मेडिकल दुकान पर काम करने वाले नीरज निगम पुत्र हरिशंकर निगम का स्कैनर दे दिया। इसके बाद कथित तौर पर भेजे गए मैसेज के आधार पर बटन क्लिक किया गया और अलग-अलग धनराशि में कुल 98,633 रुपये खाते से निकल गए। खाते से हजारों रुपये निकलने की जानकारी सामने आते ही पीड़ित पक्ष परेशान हो गया। नीरज निगम ने मामले की शिकायत साइबर थाने में की। पुलिस से मामले की जांच कर कार्रवाई की मांग की।
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