मुंबई। एन चंद्रशेखरन को टाटा संस (Tata Sons) के चेयरमैन पद पर तीसरे कार्यकाल विस्तार पर फैसला फिलहाल...
मुंबई। एन चंद्रशेखरन को टाटा संस (Tata Sons) के चेयरमैन पद पर तीसरे कार्यकाल विस्तार पर फैसला फिलहाल टाल दिया गया है। सूत्रों के मुताबिक, Tata Trusts के चेयरमैन नोएल टाटा बोर्ड के ऐसे अकेले सदस्य थे, जिन्होंने चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति पर सहमति नहीं दी।
चंद्रशेखरन का मौजूदा कार्यकाल फरवरी 2027 में खत्म होगा। उस समय तक वे 65 वर्ष के हो जाएंगे। टाटा संस के नियमों के अनुसार कोई भी व्यक्ति 65 वर्ष की उम्र तक ही टाटा संस के चेयरमैन पद पर रह सकता है। चंद्रशेखरन 2017 से Tata Group की होल्डिंग कंपनी का नेतृत्व कर रहे हैं। उन्हें साइरस मिस्त्री को हटाए जाने के बाद यह जिम्मेदारी दी गई थी। टाटा ग्रुप ने चंद्रशेखरन को 2027 तक के तीसरे कार्यकाल की मंजूरी पिछले साल दी थी।
रिपोर्ट के मुताबिक, टाटा ग्रुप की नई कंपनियों में बढ़ते नुकसान को लेकर चिंता जताई गई। हालांकि, अन्य निदेशकों ने चंद्रशेखरन का समर्थन किया। मतभेद सामने आने के बाद चंद्रशेखरन ने व्यापक चर्चा और सहमति के लिए निर्णय टालने का आग्रह किया।
इस बीच टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने कहा है कि उनके कार्यकाल विस्तार पर फैसला टालने की सिफारिश उन्होंने खुद बोर्ड मीटिंग में की थी। उन्होंने साफ किया कि इस फैसले से टाटा ग्रुप के कामकाज या रणनीति में कोई बदलाव नहीं होगा।
आर्थिक मीडिया समूह "Economic Times" की रिपोर्ट के मुताबिक, बोर्ड बैठक में समूह के कुछ नए वेंचर में हो रहे नुकसान को लेकर मैनेजमेंट के बीच मतभेद रहे हैं। इस मुद्दे को खास तौर पर नोएल टाटा ने उठाया, वहीं कुछ निदेशकों का कहना था कि ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट्स के शुरुआती चरण में वित्तीय दबाव सामान्य होता है। चंद्रशेखरन ने हालिया वार्षिक रिपोर्ट में कहा कि पिछले पांच वर्षों में Tata Group की आय लगभग दोगुनी हुई है। शुद्ध लाभ और मार्केट कैप तीन गुना से अधिक बढ़ा है। समूह ने खुद को भविष्य के लिए तैयार करने के लिए 5.5 लाख करोड़ रुपये खर्च किए हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार माना जा रहा है कि टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने चार शर्तें बताई हैं, जिन्हें वह चंद्रशेखरन का कार्यकाल बढ़ाने पर विचार करने से पहले पूरा करना चाहते हैं। पहली शर्त यह है कि टाटा संस को अनलिस्टेड रहना चाहिए, जो कि अपर-लेयर नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल एंटिटीज़ पर लागू होने वाली रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की जरूरतों के मुताबिक है, इस कैटेगरी में टाटा संस जैसे बड़े ग्रुप शामिल हैं।
दूसरी शर्त यह है कि कंपनी बिना कर्ज के काम करे। तीसरी शर्त का मकसद हाई-रिस्क वेंचर्स पर बहुत ज्यादा कैपिटल खर्च को रोकना है, जिससे कंपनी के फाइनेंशियल रिजर्व खत्म हो सकते हैं। चौथी शर्त एयर इंडिया और बिगबास्केट जैसे एक्विजिशन से होने वाले नुकसान को कम करने से जुड़ी है।
Tata Sons की आय वित्त वर्ष 2025 में 24 प्रतिशत बढ़कर 5.92 लाख करोड़ रुपये रही, जबकि शुद्ध लाभ 17 प्रतिशत घटकर 28,898 करोड़ रुपये पर आ गया। कंपनी ने कहा कि साल की शुरुआत में वैश्विक वृद्धि और महंगाई में नरमी को लेकर उम्मीद थी, लेकिन बाद में व्यापार नीति को लेकर अनिश्चितता बढ़ने से माहौल बदल गया।
Tata Investment Corporation का शेयर मंगलवार को एनएसई पर 2.94 प्रतिशत गिरकर 668 रुपये पर बंद हुआ था। पिछले एक महीने में स्टॉक 10.50% चढ़ा है। वहीं, 1 साल में इसने 16.07% का रिटर्न दिया है। 5 साल में इसने 501% का मल्टीबैगर रिटर्न दिया है।
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