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ऑनलाइन फ्रॉड करने वाले गिरोह का पर्दाफाश

ऑनलाइन धोखाधड़ी से जुड़े अवैध साइबर कॉल सेंटर का भंडाफोड़, इंदौर से छह लोग गिरफ्तार

दिल्ली की द्वारका साइबर सेल ने ऑनलाइन धोखाधड़ी में शामिल अवैध साइबर कॉल सेंटर का पर्दाफाश कर इंदौर से छह आरोपियों को गिरफ्तार कियाहै।

ऑनलाइन धोखाधड़ी से जुड़े अवैध साइबर कॉल सेंटर का भंडाफोड़ इंदौर से छह लोग गिरफ्तार

Delhi Cyber Cell Busts Illegal Call Center (File Photo) |

नई दिल्ली: दिल्ली की द्वारका साइबर सेल ने ऑनलाइन धोखाधड़ी के मामले में कथित रूप से शामिल एक अवैध साइबर कॉल सेंटर का भंडाफोड़ किया है। इसके साथ ही मध्य प्रदेश के इंदौर से छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है। छापेमारी के दौरान, पुलिस ने 28 कंप्यूटर, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और कई आपत्तिजनक दस्तावेज जब्त किए हैं।

SOP तैयार करने का दिया निर्देश

पुलिस के अनुसार, प्रारंभिक जांच से पता चलता है कि यह गिरोह भोले-भाले लोगों को निशाना बनाने वाले एक बड़े साइबर धोखाधड़ी नेटवर्क का हिस्सा है। वित्तीय लेन-देन का पता लगाने और इस गिरोह से जुड़े अन्य सहयोगियों की पहचान करने के लिए आगे की जांच जारी है। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने डिजिटल धोखाधड़ी के खिलाफ उपायों को मजबूत करने के लिए देशव्यापी निर्देश जारी किए हैं, जिसमें भारतीय रिजर्व बैंक को चार सप्ताह के भीतर फर्जी खातों पर एक मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार करने का निर्देश दिया गया है। इसके साथ ही देश भर में साइबर धोखाधड़ी निवारण तंत्र को तेजी से लागू करने का आह्वान किया गया है।

साइबर फ्रॉड रोकने के लिए कोर्ट सख्त

भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और वी मोहना की पीठ ने केंद्रीय गृह मंत्रालय के भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र द्वारा दायर स्थिति रिपोर्ट पर ध्यान देने के बाद ये निर्देश पारित किए। प्रमुख निर्देशों में पीठ ने सभी राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों को गृह मंत्रालय द्वारा 2 जनवरी को जारी राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल और साइबर आरएमएस से संबंधित मानक परिचालन (एसओपी) के तहत शुरू किए गए शिकायत निवारण मॉड्यूल और धन बहाली मॉड्यूल को जल्द से जल्द लागू करने का निर्देश दिया।

साइबर ठगी से बचाव के लिए जन जागरूकता अभियान पर जोर

राज्यों को डिजिटल गिरफ्तारी घोटालों और उपलब्ध रिपोर्टिंग एवं निवारण तंत्रों के बारे में जन जागरूकता अभियान चलाने के लिए भी कहा गया। सर्वोच्च न्यायालय ने कहा, एसओपी प्रत्येक उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल को भी उपलब्ध कराई जानी है। सभी उच्च न्यायालयों के रजिस्ट्रार जनरलों को बैंक खाता फ्रीजिंग मामलों से निपटने वाले न्यायालयों और न्याय निर्णायक अधिकारियों को इन शिकायत निवारण तंत्रों के बारे में सूचित करने का निर्देश दिया गया ताकि प्रभावित व्यक्ति अपने वैधानिक या संवैधानिक अधिकारों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना पहले इन उपायों का लाभ उठा सकें। 

(इनपुट: ANI)

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