दिल्ली हाई कोर्ट ने बुधवार को दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और AAP नेता अरविंद केजरीवाल को एक याचिका पर नोटिस जारी किया। यह याचिका प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने दायर की थी।
नई दिल्ली। दिल्ली हाई कोर्ट ने बुधवार को दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और AAP नेता अरविंद केजरीवाल को एक याचिका पर नोटिस जारी किया। यह याचिका प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने दायर की थी। इसमें आबकारी नीति मामले में 'मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम' (PMLA) के तहत जारी समन का कथित तौर पर पालन न करने से जुड़े मामलों में केजरीवाल को बरी किए जाने के फैसले को चुनौती दी गई है।
कोर्ट में केजरीवाल की ओर से नहीं हुआ कोई पेश
इस मामले की सुनवाई जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने की। कोर्ट ने पाया कि पहले से नोटिस दिए जाने के बावजूद, सुनवाई के दौरान केजरीवाल की ओर से कोई भी पेश नहीं हुआ। प्रवर्तन निदेशालय की ओर से वकील ज़ोहेब हुसैन पेश हुए। हाई कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के रिकॉर्ड भी तलब किए हैं और मामले की अगली सुनवाई के लिए 29 अप्रैल की तारीख तय की है।
समन की अनदेखी का आरोप, ED ने फैसले को दी चुनौती
ED ने दिल्ली हाई कोर्ट का रुख करते हुए आबकारी नीति मामले में बार-बार समन जारी होने के बावजूद एजेंसी के सामने पेश न होने के केजरीवाल के कथित मामले से जुड़े दो केसों में उन्हें बरी किए जाने के फैसले को चुनौती दी है। एजेंसी के मुताबिक केजरीवाल ने जानबूझकर समन का पालन नहीं किया और जांच में शामिल नहीं हुए।
ट्रायल कोर्ट ने पहले किया था बरी
बीते 22 जनवरी 2026 को एक ट्रायल कोर्ट ने केजरीवाल को इन मामलों में बरी कर दिया था। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि ED यह साबित करने में नाकाम रहा कि केजरीवाल ने जानबूझकर उन्हें जारी किए गए समन का उल्लंघन किया था। इससे पहले, फरवरी 2024 में, ED ने ट्रायल कोर्ट में एक अर्जी दाखिल करते हुए आरोप लगाया था कि केजरीवाल ने दिल्ली आबकारी नीति से जुड़ी मनी लॉन्ड्रिंग जांच के दौरान जारी किए गए कई समनों का पालन नहीं किया था।
आबकारी नीति विवाद को लेकर CBI ने दर्ज की थी FIR
उल्लेखनीय है कि यह मामला दिल्ली की 2022 की आबकारी नीति को बनाने और लागू करने में हुई कथित अनियमितताओं से जुड़ा है। इस मुद्दे को सबसे पहले दिल्ली के उपराज्यपाल ने उठाया था। इसके बाद केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने प्रक्रियागत खामियों और कुछ लाइसेंस धारकों को कथित तौर पर अनुचित लाभ पहुँचाए जाने का हवाला देते हुए एक FIR दर्ज की थी।
नीति में गड़बड़ी और मुनाफे के आरोप
केजरीवाल सरकार पर आरोप था कि लाइसेंस शुल्क में कमी की गई या उसे माफ कर दिया गया और बिना उचित मंज़ूरी के लाइसेंसों की अवधि बढ़ा दी गई। जाँच एजेंसियों ने यह भी आरोप लगाया है कि अवैध रूप से कमाए गए मुनाफ़े को गलत लेखा प्रविष्टियों के ज़रिए दूसरी जगह भेजा गया और छिपाया गया। इसके बाद ED ने मनी लॉन्ड्रिंग की जाँच शुरू की और केजरीवाल सहित कई लोगों को इसमें नामज़द किया। जाँच के दौरान उन्हें गिरफ़्तार कर लिया गया और हिरासत में कई महीने बिताने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें ज़मानत दे दी।
ट्रायल कोर्ट ने 27 फरवरी को संबंधित CBI मामले में केजरीवाल, पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और 21 अन्य को बरी कर दिया। कोर्ट ने यह टिप्पणी की कि अभियोजन पक्ष का मामला न्यायिक जांच में खरा नहीं उतर सका।
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