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कोलकाता में हुई तेज बारिश..

कोलकाता में हुई तेज बारिश, बिगाड़ी नवमी की रौनक

Kolkata : कोलकाता और आसपास के उपनगरों में बुधवार को रह - रह कर हुई तेज बारिश की वजह से दुर्गोत्सव का नवमी का उत्साह उतना नहीं दिखा, जितना दिखना चाहिए था.

कोलकाता में हुई तेज बारिश बिगाड़ी नवमी की रौनक

कोलकाता में हुई तेज बारिश, बिगाड़ी नवमी की रौनक |

Kolkata : कोलकाता और आसपास के उपनगरों में बुधवार को रह - रह कर हुई तेज बारिश की वजह से दुर्गोत्सव का नवमी का उत्साह उतना नहीं दिखा, जितना दिखना चाहिए था. सरकार, स्थानीय प्रशासन और दुर्गा पूजा आयोजकों की ओर से किए गए तमाम जरूरी इंतजाम धरे रह गए. मौसम विभाग की ओर से बारिश की संभावना की जानकारी दी गई और चेतावनी भी, लेकिन आए आफत का कहर बरपा.

याद दिला दें कि माहाल्या  के एक दिन बाद हुई बारिश से कोलकाता में भारी तबाही मची. जल जमाव से बाढ़ जैसी स्थिति पैदा हो गई थी. बिजली के तार से करेंट लगने से चार लोगों की मौत हुई. कई लोग घायल हुए. यातायात ठप हो गया. रेल थम गई. कामकाज पूरी तरह से प्रभावित हुए. काफी क्षति हुई. महानगर की ऐसी स्थिति हुई कि उससे उबरने में दो दिन लग गए. यह साबित हो गया कि ते ज और लगातार बारिश हुई कि महानगर की नारको स्थिति बन जाएगी. 

सरकार, स्थानीय निकाय और राजनीतिक पार्टियों की..

सरकार और कोलकाता नगर निगम के जिम्मेदार नेताओं और अधिकारियों ने महानगर की हुई नारकीय स्थिति पर चिंता जताई. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ऐसी स्थिति से निबटने के लिए जरूरी और विशेष इंतजाम किए जाएंगे. जलनिकासी के लिए चार पंप लगाए जाएंगे. ड्रेनों की सफाई व रखरखाव पर जोर दिया जाएगा. उन्होंने पर्याप्त फंड मुहैया नहीं कराए जाने का आरोप लगाते हुए केंद्र सरकार व भाजपा नेताओं को जमकर कोसा भी.

दूसरी ओर भाजपा के प्रदेश व केंद्र नेताओं ने विफलता और भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए राज्य सरकार और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को खूब कोसा. माकपा, कांग्रेस और दूसरी पार्टियों ने भी राज्य सरकार और ममता बनर्जी की मंद स्वर में आलोचना की. कुछ संगठनों ने कोलकाता की नारकीय स्थिति को देखते हुए कोर्ट में जन याचिका दायर की. कुछ जानकारों का कहना है कि कोलकाता में जल जमाव का एक बड़ा कारण प्लास्टिक है. जलजमाव के दिन बहते प्लास्टिक के कारण पैदल चलना मुश्किल हुआ. प्लास्टिक नालों में जमा हो गए हैं और उनकी सफाई भी आसान नहीं है. सरकार, स्थानीय निकाय और राजनीतिक पार्टियों की ओर से इस समस्या को नजरअंदाज किया जा रहा है.

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